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NSO सर्वेक्षण में खुलासा: अधिकांश भारतीय अपनी आय और टैक्स डिटेल बताने से कतराते हैं

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इसमें सामने आया कि लगभग सवालों का जवाब देने वाले 95 प्रतिशत लोगों ने विभिन्न स्रोतों से होने वाली आय के बारे में जानकारी देने में झिझक महसूस की

Last Updated- October 14, 2025 | 10:34 PM IST
Income

भारतीय लोग अपनी जेब का राज किसी को भी नहीं बताना चाहते। आयकर विभाग को भी नहीं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा राष्ट्रीय घरेलू आय सर्वेक्षण का मसौदा तैयार करने से पहले किए गए इस तरह के परीक्षण सर्वेक्षण में पाया गया कि वेतन, वित्तीय संप​त्तियों से आमदनी, गहनों पर खर्च या कितना आयकर चुकाया आदि का खुलासा करने में लोग हिचकिचाते हैं।

बड़े पैमाने पर किए जाने वाले सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों में स्पष्टता, प्रवाह और सर्वेक्षण उपकरणों की संरचना से संबंधित मुद्दों की पहचान करने के लिए फील्ड में कर्मचारियों की तैनाती से पहले यह पूर्व-परीक्षण अ​भियान एक मानक प्रक्रिया है। इसमें सामने आया कि लगभग सवालों का जवाब देने वाले 95 प्रतिशत लोगों ने विभिन्न स्रोतों से होने वाली आय के बारे में जानकारी देने में झिझक महसूस की। लगभग इतने ही लोगों ने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि उन्होंने कितना आयकर चुकाया।

एनएसओ फिलहाल अगले साल फरवरी में घरेलू आय पर पहला अखिल भारतीय सर्वेक्षण शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसलिए, सर्वेक्षण के इन मुख्य प्रश्नों के प्रति उत्तरदाताओं द्वारा गैर-जिम्मेदारी दिखाने से सर्वेक्षण के सफल संचालन में बाधा आ सकती है।

एनएसओ ने अपने नौवें (1955), 15वें (1959), 19वें (1964) और 24वें (1969) दौर (जुलाई 1969-जून 1970) में घरेलू आय पर जानकारी एकत्र करने की कोशिश की थी, लेकिन लोगों द्वारा गैर-जिम्मेदारी दिखाने के कारण यह कवायद अधूरी ही रह गई। इसलिए, पहले किए गए प्रयासों के परिणाम से बचने के लिए एनएसओ अभी से पुख्ता तैयारी करने में जुटा है।

पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणव सेन का कहना है कि घरेलू आय सर्वेक्षण करने के पहले के प्रयासों में बड़ी कमी यह रही कि वे भारत में लोगों के आय के कई स्रोतों का पता लगाने में असमर्थ रहे। उदाहरण के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कम से कम तीन व्यवसायों की जानकारी देते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में कम से कम दो व्यवसायों की जानकारी देते हैं। इसके अलावा, किराए और निवेश जैसे अतिरिक्त स्रोतों से भी आय होती है।

सेन ने कहा, ‘सरकार आय डेटा उत्पन्न करने के अपने प्रयासों में बुरी तरह विफल रही है। आमतौर पर माना जाता है कि इस डेटा को एकत्र करना बहुत मुश्किल है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अ​धिकांश लोग खुद अपनी आय का खुलासा नहीं करना चाहते हैं। लोगों की इस प्रवृ​त्ति को ध्यान में रखते हुए पूरा शेड्यूल तैयार किया जाना चाहिए।’

इस बीच, सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने इस अ​​भियान की स्पष्टता, समझ, व्याख्या और प्रासंगिकता के संबंध में अधिक उत्साह दिखाया। लगभग 84 प्रतिशत उत्तरदाताओं में सर्वेक्षण के उद्देश्य के बारे में थोड़ी-बहुत समझ जरूर पाई गई। यही नहीं, 87 प्रतिशत उत्तरदाताओं को इसके संदर्भ के बारे में काफी जानकारी थी।

पूर्व-परीक्षण अ​भियान से यह भी पता चला कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परिवार खर्च को बढ़ा-चढ़ाकर और आय को कम करके बताते हैं। इसके अलावा, वित्तीय संपत्तियों की जानकारी को याद रखना या सटीक रूप से बताना उत्तरदाताओं के लिए मुश्किल पाया गया, क्योंकि उन्हें बचत खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य वित्तीय संपत्तियों से मिलने वाले ब्याज के बारे में जानकारी नहीं होती है।

इसके अलावा, सर्वेक्षण अ​भियान में उच्च आय और धनी परिवारों के लिए अलग दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें एक स्व-संकलन प्रणाली का आह्वान किया गया है, जिसमें उत्तरदाताओं को एक लिखित अनुरोध भेजा जा सकता है, जिसमें सर्वेक्षण के उद्देश्यों और आय सर्वेक्षण डेटा के महत्त्व को समझाया गया हो।

मसौदे के लिए पूर्व-परीक्षण अ​भियान 4 से 8 अगस्त के बीच एनएसओ के फील्ड ऑपरेशंस डिवीजन के 15 क्षेत्रीय कार्यालयों में चलाया गया, जिसमें मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर और हैदराबाद सहित छह क्षेत्रों को शामिल किया गया था। हर चयनित क्षेत्रीय कार्यालय में धनी और पिछड़े दोनों को कवर करते हुए दो शहरी और दो ग्रामीण इलाके चुने गए।

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First Published - October 14, 2025 | 10:28 PM IST

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