facebookmetapixel
Budget 2026: राजकोषीय घाटे से आगे बढ़कर कर्ज पर नजर, डेट-टू-जीडीपी रेश्यो बनेगा नया पैमानासावधान! पुरानी इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर हो रही बड़ी ठगी, ‘रिफंड’ के कॉल आए तो हो जाएं सचेत₹190 तक जाएगा अदाणी का यह शेयर, 40% उछल सकता है दाम; 150 रुपये से कम है शेयर भाव‘सिल्वर बेचना होगी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल’, रिच डैड पुअर डैड के लेखक कियोसाकी ने ऐसा क्यों कहा?2011 का दौर खत्म, 2024 से तय होगी महंगाई, जानिए नई CPI में क्या बदलेगाLTCG खत्म करने का सही समय! रुपये की कमजोरी और FPI पलायन से क्या बढ़ रहा दबाव?Auto stocks: तेजी के बीच ऑटो सेक्टर में कौन मारेगा बाजी? मोतीलाल ओसवाल ने बताए अपने टॉप पिक्सBudget 2026: बजट डे पर शेयर बाजार में कैसे करें ट्रेडिंग? 1 फरवरी के लिए एक्सपर्ट्स ने बताई स्ट्रेटेजीबजट से एक दिन पहले क्यों लुढ़क गया शेयर बाजार?Indian Equities: 14 साल में सबसे कम भरोसा, भारत से क्यों दूर हो रहे हैं विदेशी निवेशक?

औषधि मूल्य संशोधन समिति का हुआ विस्तार; फार्मा इंडस्ट्री के विकास, निर्यात के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना लक्ष्य

औषधि व चिकित्सा उपकरणों के मूल्य की समीक्षा के लिए संतुलित नजरिया अपनाए जाने की जरूरत है। लिहाजा फैसला लेने की प्रक्रिया में विभिन्न रेंज के साझेदारों को शामिल किया गया है।

Last Updated- April 24, 2024 | 11:30 PM IST
Centre fails to form policy on e-sale of drugs within Delhi HC’s deadline ऑनलाइन दवाओं पर नीति बनाने के अंतिम अवसर से भी चूक गई केंद्र सरकार, दिल्ली हाईकोर्ट ने वार्निंग के साथ दी थी समय सीमा

सरकार ने औषधि व चिकित्सा उपकरणों के मूल्य संशोधन समिति का विस्तार किया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार समिति में विभिन्न औद्योगिक निकाय शामिल किए गए हैं। फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने इस समिति का गठन 12 मार्च को किया था।

हालांकि अब इस समिति में औद्योगिक निकाय जैसे भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), ऑर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्यूटिकल प्रोड्यूसर ऑफ इंडिया (ओपीपीआई), यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) सहित अन्य शामिल किए गए हैं।

समिति की शर्तों में नैशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग एथॉरिटी (एनपीपीए) के तहत संस्थागत सुधार सहित आवश्यक दवाओं के दामों में संतुलन व उपलब्धता मुहैया कराने के साथ उद्योग को सतत विकास व निर्यात के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना है।

ओपीपीआई के महानिदेशक अनिल मताई ने इस समिति में औद्योगिक निकायों को शामिल करने के बारे में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि औषधि व चिकित्सा उपकरणों के मूल्य की समीक्षा के लिए संतुलित नजरिया अपनाए जाने की जरूरत है। लिहाजा फैसला लेने की प्रक्रिया में विभिन्न रेंज के साझेदारों को शामिल किया गया है।

ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर के कार्यकारी निदेशक व समूह के मुख्य कार्याधिकारी सत्यकी बनर्जी ने बताया, ‘व्यापक साझेदारी की बदौलत समिति अधिक समावेशी मूल्य रणनीति विकसित कर सकेगी जिससे सभी साझेदारों की आवश्यकताओं और चिंताओं का समाधान होगा।’

उद्योग के सूत्रों के मुताबिक समिति चिकित्सा उपकरणों के लिए मूल्य निर्धारण का ढांचा तैयार करने के तरीकों को भी सुझाएगी और चिकित्सा के तकनीकी उद्योग को आयात कम करने के लिए प्रोत्साहन मुहैया करवाएगी।

उन्होंने बताया, ‘इस मिशन के अनुरूप विभाग ने चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी एसोसिएशनों जैसे मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमटीएएल) और एसोसिएशन ऑफ मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) को आमंत्रित किया है।

First Published - April 24, 2024 | 10:58 PM IST

संबंधित पोस्ट