facebookmetapixel
Q3 Results: DLF का मुनाफा 13.6% बढ़ा, जानें Zee और वारी एनर्जीज समेत अन्य कंपनियों का कैसा रहा रिजल्ट कैंसर का इलाज अब होगा सस्ता! Zydus ने भारत में लॉन्च किया दुनिया का पहला निवोलुमैब बायोसिमिलरबालाजी वेफर्स में हिस्से के लिए जनरल अटलांटिक का करार, सौदा की रकम ₹2,050 करोड़ होने का अनुमानफ्लाइट्स कैंसिलेशन मामले में इंडिगो पर ₹22 करोड़ का जुर्माना, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हटाए गएIndiGo Q3 Results: नई श्रम संहिता और उड़ान रद्द होने का असर: इंडिगो का मुनाफा 78% घटकर 549 करोड़ रुपये सिंडिकेटेड लोन से भारतीय कंपनियों ने 2025 में विदेश से जुटाए रिकॉर्ड 32.5 अरब डॉलरग्रीनलैंड, ट्रंप और वैश्विक व्यवस्था: क्या महा शक्तियों की महत्वाकांक्षाएं नियमों से ऊपर हो गई हैं?लंबी रिकवरी की राह: देरी घटाने के लिए NCLT को ज्यादा सदस्यों और पीठों की जरूरतनियामकीय दुविधा: घोटालों पर लगाम या भारतीय पूंजी बाजारों का दम घोंटना?अवधूत साठे को 100 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश 

बीमा कंपनियों के शेयरों पर सतर्कता रखें निवेशक; 1 फरवरी के बाद से आई है 3 से 19 प्रतिशत की गिरावट

विशेषज्ञों का सुझाव है कि हालिया बिकवाली को देखते हुए long term के लिहाज से इन शेयरों में खरीदारी पर करें विचार

Last Updated- February 20, 2023 | 11:37 PM IST
In a first, micro insurance premium in life segment tops Rs 10k cr in FY24 माइक्रो बीमा सेगमेंट ने FY24 में रचा इतिहास, पहली बार न्यू बिजनेस प्रीमियम 10,000 करोड़ के पार निकला

बजट में पांच लाख रुपये से ज्यादा के सालाना प्रीमियम वाली सामान्य पॉलिसियों से होने वाली आय पर कर लगाने के प्रस्ताव के बाद से बीमा संबंधी शेयरों में कमजोरी आई है। एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल (आईसीआईसीआई प्रू), मैक्स फाइनैंशियल (मैक्स लाइफ की मालिक), भारतीय जीवन ​बीमा निगम (एलआईसी), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों में 1 फरवरी के बाद से तीन से 19 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसी अवधि के दौरान NSE Nifty में लगभग 0.6 प्रतिशत की तेजी आई है।

विश्लेषकों को इस बात की आशंका है कि यह कमजोर प्रदर्शन कुछ समय तक जारी रहेगा क्योंकि सरकार द्वारा नई कर व्यवस्था पर जोर दिए जाने से बीमा योजनाओं की मांग प्रभावित हो सकती है। इस व्यवस्था में कर-बचत की कटौती नहीं है। उनका मानना है कि इस संबंध में दिक्कत ज्यादा समय तक नहीं रहेगी और हालिया बिकवाली को देखते हुए दीर्घाव​धि वाले निवेशकों को शेयर जमा करने के संबंध में विचार करना चाहिए।

जेएसटी इन्वेस्टमेंट्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी आदित्य शाह ने कहा कि जैसे ही नई कर व्यवस्था आकार लेने लगेगी, पुरानी व्यवस्था एक-दो साल में खत्म हो जाएगी। इसका मतलब यह है कि जीवन बीमा और निवेश योजनाओं को खरीदने का प्रोत्साहन कम हो रहा है, जो जीवन बीमा जैसे क्षेत्र के लिए नकारात्मक बात है, क्योंकि जीवन बीमा की हमेशा से ही कर लाभ के उद्देश्य से बिक्री की जाती रही है।

अधिक मूल्य वाली पॉलिसियों पर कर मानदंड जीवन बीमाकर्ताओं के अंतर्निहित मूल्य (ईवी) को पांच से 15 प्रतिशत तक असर ड़ाल सकते हैं। लेकिन इस बढ़ते क्षेत्र के संबंध में हमारा दीर्घावधि दृष्टिकोण सकारात्मक है क्योंकि इसका दायरा बढ़ता रहेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि मूल्यांकन के दृष्टिकोण से बजट प्रस्ताव ने बीमा संबंधी शेयरों में रेटिंग में कमी को तेज कर दिया है, जो पहले ही पिछले एक-दो साल से जारी थी। उदाहरण के लिए एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वित्त वर्ष 23 की पी/ईवी (उद्यम मूल्य के मुकाबले कीमत) क्रमशः 2.3 गुना, 1.9 गुना और 1.4 गुना के मल्टीपल पर कारोबार कर रहे हैं, जो वित्त वर्ष 22 के 3.5 गुना, 2.9 गुना और 1.9 गुना के मल्टीपल से कम है।

शाह ने उम्मीद जताई कि यह मूल्यांकन जल्द ही निचले स्तर आ जाएगा, हालांकि जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों ने कहा कि वे मौजूदा गिरावट में खरीदार होंगे।

विश्लेषकों का कहना है कि नई कर व्यवस्था से पार्टिसिपेटिंग (पार) और नॉन-पार्टिसिपेटिंग श्रेणियों में सबसे ज्यादा (नॉन-यूलिप या यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) में सर्वाधिक बिकने वाली पॉलिसियों पर असर पड़ सकता है।

First Published - February 20, 2023 | 10:12 PM IST

संबंधित पोस्ट