facebookmetapixel
Navratna कंपनी का बड़ा ऐलान! शेयरधारकों को 2.50 रुपये का डिविडेंड, जानिए रिकॉर्ड डेटAdani Ports Q3 Results: तीसरी तिमाही में मुनाफा 21.2% बढ़ा, अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भारी उछालएडवेंट इंटरनेशनल का बड़ा दांव: आदित्य बिड़ला हाउसिंग फाइनेंस में ₹2,750 करोड़ में खरीदी हिस्सेदारी‘दबाव में नहीं लिए फैसले’, CBIC प्रमुख ने सीमा शुल्क सुधारों पर दी सफाई, बताया क्यों घटे टैरिफनौकरी बाजार में अजीब संकट: भीड़ बढ़ी पर नहीं मिल रहे योग्य पेशेवर, 74% कंपनियां टैलेंट के लिए परेशानट्रेड डील पर बोले PM मोदी: राष्ट्रहित में लिया गया ‘बड़ा फैसला’, देश के हर वर्ग को मिलेगा फायदाममता बनर्जी का बड़ा ऐलान: मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए विपक्ष के प्रस्ताव का करेंगी समर्थनसंसद में संग्राम: विपक्ष के 8 सांसद पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित, राहुल गांधी के नेतृत्व में बड़ा प्रदर्शनट्रेड डील से नहीं बदलेगी बाजार की किस्मत, तेजी के लिए चाहिए और स्पष्टता: शंकर शर्माभारत-अमेरिका व्यापार समझौते से दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स गदगद, दावा: बाजार में बढ़ेगा निवेश

नया बीमा संशोधन विधेयक का होगा असर! ज्यादा कमीशन वाले एजेंटों का घटेगा भुगतान

उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि अधिक कमीशन देने के मामले में कभी कभी पॉलिसीधारक के हितों से समझौता करना पड़ता है और कंपनियां दावों में काट छांट करती हैं।

Last Updated- December 19, 2025 | 9:46 AM IST
Insurance
Representational Image

नया बीमा संशोधन विधेयक लागू होने के बाद ज्यादा कमीशन पाने वाले बीमा मध्यस्थों के भुगतान में कमी आ सकती है। इस विधेयक में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) को बीमाकर्ताओं और मध्यस्थों के गैरकानूनी लाभों को वापस लेने का अधिकार दिया गया है। साथ ही मध्यस्थों को कमीशन के भुगतान की सीमा तय करने का अधिकार भी दिया गया है।

बहरहाल विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल इस पर निर्भर है कि इसके लिए किस तरीके से नियम बनाए जाते हैं। मध्यस्थों में बैंकाश्योरेंस भागीदार, ओईएम-लिंक्ड साझेदारी या इसी तरह के हाई वॉल्यूम चैनल शामिल हैं।

उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि अधिक कमीशन देने के मामले में कभी कभी पॉलिसीधारक के हितों से समझौता करना पड़ता है और कंपनियां दावों में काट छांट करती हैं। अधिक कमीशन होने की स्थिति में विधेयक में इसमें कटौती किए जाने का अधिकार दिया गया है। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि यह देखना होगा कि विधेयक को लेकर किस तरह से नियमन किया जाता है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कुछ वितरण व्यवस्थाएं हैं, जिसमें असमान रूप से ज्यादा भुगतान किया जाता है, जबकि दावों के प्रदर्शन और निरंतरता के संकेतकों से इस तरह के भुगतान का ढांचा उचित नहीं नजर आता है। इस तरह के उल्लंघन के मामले में नियामक को कार्रवाई करने की अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं, ऐसे में मानकों का उल्लंघन करने वाली इकाइयां व्यापक रूप से नियामकीय जांच के दायरे में आ सकती हैं, जिनमें बीमाकर्ता और मध्यस्थ दोनों ही शामिल हैं।

क्विकइंश्योर के सह संस्थापक और सीईओ आनंद श्रीखंडे ने कहा, ‘वाहन बीमा पर कमीशन कम होने की उम्मीद है।’
पॉलिसीधारकों के दावों का कुप्रबंधन करने वाले बीमाकर्ता भी गहन जांच के दायरे में आ सकते हैं। साथ ही आईआरडीएआई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर जुर्माना मौजूदा 1 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

आईबीएआई के प्रेसीडेंट नरेंद्र भरींदवाल ने कहा, ‘सेबी की तरह ही आईआरडीएआई को भी मजबूत पर्यवेक्षी ढांचे की शक्ति दी गई है, जिससे दीर्घावधि के पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा हो सके।  इस प्रावधान का इरादा दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक है। इसका उद्देश्य एक निवारक के रूप में कार्य करना है और संभवतः केवल असाधारण परिस्थितियों में ही इसका प्रयोग किया जाएगा, जहां वितरण प्रोत्साहन और पॉलिसीधारक के दावों के निपटान साफतौर पर बेमेल नजर आते हैं।’

First Published - December 19, 2025 | 9:46 AM IST

संबंधित पोस्ट