facebookmetapixel
Advertisement
Sugar Price: मॉनसून की मार से चीनी महंगी, जानें क्यों बढ़ रही हैं कीमतें और आगे क्या होगा?कच्चे तेल की कीमतें घटीं, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों? हरदीप पुरी ने बताई वजहInvesco Mutual Fund ने SIF सेगमेंट में रखा कदम, लॉन्च किया समिट इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड; क्या है इसमें खास?India-EU FTA: 10-12 दिन में पूरी होगी कानूनी समीक्षा, गोयल बोले- साल के अंत तक होगी डील30 चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेश का मौका, 17 जुलाई तक खुला रहेगा MOMF का नया इंडेक्स फंडMirae Asset MF ने उतारे 2 नए मिडकैप फंड, ₹5,000 से निवेश शुरू; प्राइस मोमेंटम वाले शेयरों पर फोकसविदेशी फंड्स में लौटी निवेशकों की दिलचस्पी, 40% रिटर्न और ₹7,600 करोड़ के इनफ्लो ने बदला ट्रेंडSBI Mutual Fund का IPO अगले हफ्ते आ सकता है, ₹11,400 करोड़ जुटाने की तैयारी: रिपोर्टModi-Takaichi बैठक में बड़ा फैसला! AI, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस में भारत-जापान मिलकर करेंगे कामRed Bull से Monster तक कई एनर्जी ड्रिंक कंपनियों पर FSSAI का शिकंजा, भ्रामक दावों पर भेजा नोटिस

नया बीमा संशोधन विधेयक का होगा असर! ज्यादा कमीशन वाले एजेंटों का घटेगा भुगतान

Advertisement

उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि अधिक कमीशन देने के मामले में कभी कभी पॉलिसीधारक के हितों से समझौता करना पड़ता है और कंपनियां दावों में काट छांट करती हैं।

Last Updated- December 19, 2025 | 9:46 AM IST
Insurance
Representational Image

नया बीमा संशोधन विधेयक लागू होने के बाद ज्यादा कमीशन पाने वाले बीमा मध्यस्थों के भुगतान में कमी आ सकती है। इस विधेयक में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) को बीमाकर्ताओं और मध्यस्थों के गैरकानूनी लाभों को वापस लेने का अधिकार दिया गया है। साथ ही मध्यस्थों को कमीशन के भुगतान की सीमा तय करने का अधिकार भी दिया गया है।

बहरहाल विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल इस पर निर्भर है कि इसके लिए किस तरीके से नियम बनाए जाते हैं। मध्यस्थों में बैंकाश्योरेंस भागीदार, ओईएम-लिंक्ड साझेदारी या इसी तरह के हाई वॉल्यूम चैनल शामिल हैं।

उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि अधिक कमीशन देने के मामले में कभी कभी पॉलिसीधारक के हितों से समझौता करना पड़ता है और कंपनियां दावों में काट छांट करती हैं। अधिक कमीशन होने की स्थिति में विधेयक में इसमें कटौती किए जाने का अधिकार दिया गया है। उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि यह देखना होगा कि विधेयक को लेकर किस तरह से नियमन किया जाता है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि कुछ वितरण व्यवस्थाएं हैं, जिसमें असमान रूप से ज्यादा भुगतान किया जाता है, जबकि दावों के प्रदर्शन और निरंतरता के संकेतकों से इस तरह के भुगतान का ढांचा उचित नहीं नजर आता है। इस तरह के उल्लंघन के मामले में नियामक को कार्रवाई करने की अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं, ऐसे में मानकों का उल्लंघन करने वाली इकाइयां व्यापक रूप से नियामकीय जांच के दायरे में आ सकती हैं, जिनमें बीमाकर्ता और मध्यस्थ दोनों ही शामिल हैं।

क्विकइंश्योर के सह संस्थापक और सीईओ आनंद श्रीखंडे ने कहा, ‘वाहन बीमा पर कमीशन कम होने की उम्मीद है।’
पॉलिसीधारकों के दावों का कुप्रबंधन करने वाले बीमाकर्ता भी गहन जांच के दायरे में आ सकते हैं। साथ ही आईआरडीएआई के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर जुर्माना मौजूदा 1 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

आईबीएआई के प्रेसीडेंट नरेंद्र भरींदवाल ने कहा, ‘सेबी की तरह ही आईआरडीएआई को भी मजबूत पर्यवेक्षी ढांचे की शक्ति दी गई है, जिससे दीर्घावधि के पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा हो सके।  इस प्रावधान का इरादा दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक है। इसका उद्देश्य एक निवारक के रूप में कार्य करना है और संभवतः केवल असाधारण परिस्थितियों में ही इसका प्रयोग किया जाएगा, जहां वितरण प्रोत्साहन और पॉलिसीधारक के दावों के निपटान साफतौर पर बेमेल नजर आते हैं।’

Advertisement
First Published - December 19, 2025 | 9:46 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement