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प्रामेरिका लाइफ को खरीदेगा कौन? हिस्सेदारी बेचने के लिए तैयार प्रमोटर

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नुकसान और पूंजी संकट के बीच प्रामेरिका लाइफ के प्रमोटर पूरी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में

Last Updated- January 29, 2026 | 9:08 AM IST
Pramerica Life
Representational Image

प्रामेरिका लाइफ इंश्योरेंस के प्रमोटरों ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने के लिए कई जीवन बीमा कंपनियों से संपर्क साथा है। यह पीरामल फाइनैंस की इकाई और प्रूडेंशियल इंटरनैशनल इंश्योरेंस होल्डिंग्स लिमिटेड के बीच एक संयुक्त उद्यम है। मामले से जुड़े कई सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी है।

नए बिजनेस प्रीमियम कलेक्शन के मामले में 0.3 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी वाली इस बीमा कंपनी को पिछले 2 वित्त वर्षों- वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2024 में नुकसान हुआ है। सूत्रों ने कहा कि प्रमोटर अब कंपनी में पूंजी डालने  में सक्षम नहीं हैं और अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं।

यह जीवन बीमा कंपनी पीरामल फाइनैंस लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी डीएचएफएल इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (डीआईएल) और अमेरिका स्थित प्रूडेंशियल फाइनैंशियल इंक (पीएफआई) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी प्रूडेंशियल इंटरनैशनल इंश्योरेंस होल्डिंग्स लिमिटेड (पीआईआईएच) के बीच एक संयुक्त उपक्रम है। इसमें डीआईएल की 50 प्रतिशत और पीआईआईएच की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है और शेष 1 प्रतिशत हिस्सेदारी यार्डस्टिक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के पास है।

अमेरिका स्थित प्रूडेंशियल इंटरनेशनल इंश्योरेंस होल्डिंग्स लिमिटेड और प्रूडेंशियल फाइनैंशियल इंक का ब्रिटेन की कंपनी प्रूडेंशियल पीएलसी से कोई ताल्लुक नहीं हैं। प्रूडेंशियल पीएलसी,  आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में आईसीआईसीआई बैंक की संयुक्त उपक्रम साझेदार है।

इस बीमा कंपनी ने भारत में सितंबर 2008 में अपना कामकाज शुरू किया था। यह प्रूडेंशियल और डीएलएफ रियल्टी के बीच एक संयुक्त उपक्रम थी। इसके स्वामित्व ढांचे में कई बदलाव हुए हैं। 2013 में डीएलएफ रियल्टी ने अपने गैर-प्रमुख व्यवसायों को बेचने की अपनी रणनीति के तहत बीमा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी दीवान हाउसिंग फाइनैंस लिमिटेड (डीएचएफएल) को बेचकर 74:26 के संयुक्त उद्यम से बाहर निकल गई।
2016 में प्रूडेंशियल ने अपनी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दी। पीरामल फाइनैंस ने 2021 में 34,250 करोड़ रुपये में डीएचएफएल का अधिग्रहण किया, जिससे डीआईएल के माध्यम से जीवन बीमा कंपनी में उसे 50 प्रतिशत हिस्सेदारी मिल गई।

एक सूत्र ने कहा, ‘बीमा कंपनी में परिचालन संबंधी कुछ मसले हैं। स्वामित्व में बार-बार बदलाव के कारण यह अपना कारोबार बढ़ाने में सक्षम नहीं हुई और डिस्ट्रीब्यूशन मिक्स के हिसाब से नुकसान है। एजेंसी चैनल एक कैप्टिव चैनल है, जबकि खुले विकल्प के बावजूद बैंक उन बीमा कंपनियों का समर्थन करते हैं जिन्हें संबंधित कर्जदाताओं द्वारा प्रमोट किया जाता है।’

इस मसले पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर प्रूडेंशियल फाइनैंशियल के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘प्रूडेंशियल फाइनैंशियल नियमित रूप से अपने व्यवसायों के लिए रणनीतिक अवसरों का मूल्यांकन करता है। हम अफवाहों या बाजार की अटकलों पर कोई टिप्पणी नहीं करते हैं।’ इस सिलसिले में पीरामल फाइनैंस और प्रामेरिका लाइफ इंश्योरेंस को भेजे गए मेल का कोई जवाब खबर प्रकाशित होने को भेजे जाने तक नहीं मिला। पिछले साल पीरामल ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत और आगे सुव्यवस्थित करने की कंपनी की रणनीति के अनुरूप अपनी गैर-प्रमुख संपत्तियों से धन जुटाने के लिए श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस में अपनी पूरी 14.72 प्रतिशत हिस्सेदारी सैनलाम इमर्जिंग मार्केट्स को 600 करोड़ रुपये में बेच दी थी।
प्रामेरिका ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि प्राइवेट बीमा कंपनियों के बीच बैंकाश्योरेंस वितरण मॉडल पर हावी है और वे प्राइवेट जीवन बीमा कंपनियों के लिए रिटेल बिजनेस का एक प्रमुख स्रोत हैं।

शीर्ष 11 प्राइवेट जीवन बीमा कंपनियों के प्रमुख बैंकाश्योरेंस समझौते हैं या उन्हें देश के प्रमुख बैंकों द्वारा प्रमोट किया जाता है। यहां तक कि 2008 के बाद स्थापित जीवन बीमा कंपनियों में भी बैंकों या  गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा प्रमोट किए गए जाते हैं, जिससे अन्य की तुलना में लाभ होता है।

एक विश्लेषक ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहा, ‘जिन जीवन बीमा कंपनियों का स्वामित्व बैंक के पास नहीं है, उन्हें वितरण में स्वाभाविक रूप से नुकसान होता है। प्रामेरिका अपनी प्रोडक्ट स्ट्रक्चर और वितरण पैटर्न के कारण अपना कारोबार बढ़ाने में भी सक्षम नहीं रही है।’ उन्होंने कहा, ‘जीवन बीमा उद्योग में कारोबार हासिल करने के प्रमुख स्रोत एजेंट और बैंक हैं। बैंकों की प्रवृत्ति उन बीमा कंपनियों का समर्थन करने की होती है, जिन्हें संबंधित बैंकों द्वारा प्रमोट किया जाता है।  उन्हें अपना कारोबार बढ़ाने के लिए उन चैनलों पर अधिक निवेश करना होगा।’

प्रामेरिका लाइफ इंश्योरेंस के पास वितरण के लिए एक छोटा फाइनैंस बैंक है और उसके पार्टनर कुछ कोआपरेटिव बैंक हैं। जीवन बीमा कंपनी की विविध ग्राहक क्षेत्रों की विभिन्न बीमा जरूरतें पूरा करने के लिएकई वितरण चैनलों के माध्यम से देश भर में मौजूदगी है।

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First Published - January 29, 2026 | 9:08 AM IST

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