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भारत समेत वैश्विक बाजारों के लिए तेजी सीमित

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Last Updated- December 12, 2022 | 6:17 AM IST

बीएस बातचीत

एक साल के शानदार प्रदर्शन के बाद बाजार वित्त वर्ष 2022 में प्रवेश कर चुके हैं। सिटी इंडिया में इक्विटी प्रमुख अभिनव खन्ना ने एक साक्षात्कार में पुनीत वाधवा को बताया कि भारत विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए पसंदीदा निवेश स्थान बना हुआ है। हालांकि बढ़ते कोविड मामलों और स्थानीय तौर पर लॉकडाउन पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी। बातचीत के मुख्य अंश:

अगले कुछ महीनों के लिए आपका बाजार नजरिया क्या है?
हम अल्पावधि में, खासकर दबावग्रस्त मूल्यांकन की वजह से भारत समेत वैश्विक बाजारों के लिए सीमित तेजी देख रहे हैं। हालांकि वित्त वर्ष 2022 में वृहद आर्थिक और कॉरपोरेट आय सुधार बेहद महत्वपूर्ण होगा। जहां कोविड मामलों में ताजा तेजी चिंताजनक है, लेकिन कम मौतों की दर, टीकाकरण की तेज होती रफ्तार, और अनुकूल सरकारी नीतियों से मदद मिलेगी। हमारी प्रॉपराइटरी ग्लोबल ‘बियर मार्केट चेकलिस्ट’ ‘गिरावट पर खरीदारी’ का सुझाव दे रही है।

दिसंबर तक सेंसेक्स और निफ्टी के लिए क्या लक्ष्य मान रहे हैं?
दिसंबर के लिए हमारा निफ्टी का लक्ष्य 14,800 है जिससे मौजूदा स्तरों से मामूली तेजी का संकेत मिलता है। जिंस कीमतों में लगातार तेजी, वित्त वर्ष 2022ई की ऊंची वृद्घि के अनुमान (30 प्रतिशत से ज्यादा आय वृद्घि ), और 21 गुना वित्त वर्ष 22ई ईपीएस के मूल्यांकन हमारी नजर में जोखिमपूर्ण हैं। इसलिए, हमने हाल में अपने मॉडल पोर्टफोलियो को कुछ हद तक रक्षात्मक बनाने के प्रयास में बदलाव किया है।

बॉन्ड प्रतिफल में तेजी पर आपकी क्या राय है?
वैश्विक रूप से अप्रत्याशित वित्तीय और मौद्रिक विस्तार से इन उम्मीदों को बढ़ावा मिला है कि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के लक्ष्यों से ज्यादा रह सकती है जिससे पहले के मुुकाबले अब ज्यादा सख्त मौद्रिक नीति अपनाई जा सकती है। इसकी वजह से, 10 वर्षीय अमेरिकी प्रतिफल जनवरी के अंत के 1 प्रतिशत और अगस्त के निचले स्तर के मुकाबले के मुकाबले बढ़कर 1.6-1.7 प्रतिशत हो गया। हमारी अमेरिकी दर संबंधित टीम ने हाल में 2021 के अनुमान को 1.45 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2021 की चौथी तिमाही में परिसंपत्ति खरीदारी में नरमी लाएगा और मुख्य मुद्रास्फीति के मजबूत होने से 2022 के अंत में दर वृद्घि को बढ़ावा मिलेगा।

क्या आप मानते हैं कि बाजार और ऊंचे प्रतिफल के बीच संबंध बना रहेगा?
प्रतिफल में यदि वृद्घि क्रमबद्घ रहती है और इसका असर आर्थिक सुधार के साथ साथ मुद्रास्फीति के सामान्य स्तरों के तौर पर दिखता है तो ऊंचे प्रतिफल और बाजार का सह-संबंध बना रह सकता है। हालांकि इसे लेकर बाजार पर अलग अलग नजरिया है कि लंबी अवधि में प्रतिफल कैसा रह सकता है और हमारे नजरिये में इसकी आशंका नहीं है कि अमेरिकी फेड अमेरिकी रियल प्रतिफल में शून्य प्रतिशत से ज्यादा ऊपर की वृद्घि की अनुमति देगा।

जिंस संबंधित शेयरों के लिए क्या रणनीति रह सकती है?
हमने उम्मीद से बेहतर खपत वृद्घि (खासकर, चीन को छोड़कर) की मदद से 2021 के लिए धातु कीमतों के संदर्भ में संशोधन किए हैं। धातु कीमतें ऐसी दरों पर हैं जिनकी हमने 2022-23 तक उम्मीद नहीं की थी। हम तांबा और एल्युमीनियम में सुपर साइकल की उम्मीद देख रहे हैं, क्योंकि हमने वैश्विक चक्र में बड़े बदलाव के बावजूद इन्वेंट्री कम बनाए रखने के लिए कार्बनीकरण-मुक्त कारक देख रहे हैं। जब ओपेक+आपूर्ति बहाल होगी, कच्चे तेल की कीमतें फिर से गिरकर 40-55 डॉलर पर आ सकती हैं।

वित्त वर्ष 2022 की आय वृद्घि उम्मीद से कम रहने की आशंका का बाजार पर कितना प्रभाव पड़ा है, क्योंकि उत्पादन लागत बढ़ी है?
वित्त वर्ष 2022ई के लिए, हमने निफ्टी ईपीएस वृद्घि 32 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान जताया है। यदि मांग परिवेश अच्छा रहता है तो कोविड संबंधित छिटपुट लॉकडाउन के बावजूद कंपनियां लागत वृद्घि का बोझ ग्राहकों पर डालने में सक्षम रह सकती हैं और इससे उनका मार्जिन सुरक्षित बना रह सकता है।

ओवरवेट व अंडरवेट सेक्टर कौन से हैं?
बढ़ते बॉन्ड प्रतिफल के परिवेश में हमारे वैश्विक इक्विटी रणनीतिकार ने ऊर्जा, धातु और वित्त को ओवरवेट और आईटी, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी तथा संचार सेवाओं को अंडरवेट के तौर पर सुझाया है। अपने स्टैंडर्ड पोर्टफोलियो में, हम उभरते बाजारों पर ओवरवेट हैं। भारत की स्थिति के संदर्भ में, हम वित्त, उद्योग और रियल एस्टेट पर सकारात्मक हैं, जबकि कंज्यूमर स्टैपल्स पर नकारात्मक बने हुए हैं।

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First Published - April 4, 2021 | 11:51 PM IST

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