facebookmetapixel
Advertisement
केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में कोर्ट से क्लीन चिट: क्या अब बदल जाएगी 2026 की राजनीति?भारत विभाजन का गवाह ‘जिन्ना हाउस’ होगा नीलाम, ₹2600 करोड़ के इस बंगले की लगेगी बोलीफरवरी में UPI लेनदेन में मामूली गिरावट, कुल 26.84 लाख करोड़ रुपये का हुआ ट्रांजैक्शनGST की शानदार रफ्तार: फरवरी में शुद्ध राजस्व 7.9% बढ़ा, ₹1.61 लाख करोड़ पहुंचा संग्रहफिनो पेमेंट्स बैंक के CEO की गिरफ्तारी से हड़कंप, गेमिंग और सट्टेबाजी के अवैध लेनदेन पर बड़ी कार्रवाईबाजार की गिरावट में भी चमके वायर शेयर: पॉलिकैब और KEI इंडस्ट्रीज ने बनाया नया रिकॉर्डईरान-इजरायल युद्ध का बाजार पर दिख सकता है असर, सोमवार को सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट का डरपेंट दिग्गजों पर दोहरी मार: महंगे कच्चे तेल और कड़ी प्रतिस्पर्धा ने बिगाड़ा एशियन पेंट्स का गणितएमेजॉन इंडिया का बड़ा धमाका: 12.5 करोड़ उत्पादों पर रेफरल शुल्क खत्म, विक्रेताओं की होगी भारी बचतVolvo India का यू-टर्न: 2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनने का लक्ष्य बदला, अब बाजार तय करेगा रफ्तार

तीसरे पक्ष पर निर्भरता जोखिमभरी : RBI डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव

Advertisement

उन्होंने कहा कि नियमन इकाइयों को तीसरे पक्ष की विश्वसनीयता और सुरक्षा की जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे जरूरी मानकों को पूरा करते हों।

Last Updated- July 22, 2024 | 11:08 PM IST
तीसरे पक्ष पर निर्भरता जोखिमभरी : RBI डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव , RBI dy guv flags risks in digital outsourcing for financial companies
M Rajeshwar Rao, Deputy Governor, RBI

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने आज कहा कि डिजिटल आउटसोर्सिंग और उनकी ‘तीसरे पक्ष पर निर्भरता’ का इस्तेमाल करने वाली वित्तीय कंपनियों को इससे लाभ तो होता है लेकिन इसमें जोखिम भी शामिल है।

उन्होंने ‘केयरएज कन्वर्सेशन बीएफएसआई- नेविगेटिंग ग्रोथ ऐंड रिस्क’ को संबंधोति करते हुए कहा, ‘तीसरे पक्ष के खराब तरीके से प्रबंधित संबंधों से नियमन वाली इकाइयों को न केवल ग्राहक असंतोष और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि नियामक और पर्यवेक्षीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।’

उन्होंने कहा कि नियमन इकाइयों को तीसरे पक्ष की विश्वसनीयता और सुरक्षा की जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे जरूरी मानकों को पूरा करते हों। आउटसोर्सिंग एजेंसियों या डिजिटल ऋण सेवा प्रदाताओं के चयन के संबंध में चिता है।

उन्होंने कहा ‘नियमन से जुड़ी इकाइयां दक्षता बढ़ाने, लागत कम करने और ग्राहक अनुभव बेहतर करने के लिए तीसरे पक्ष की एजेंसियों और अपने परिचालन की आउटसोर्सिंग पर लगातार निर्भर हो रही हैं। अलबत्ता जहां तीसरे पक्ष पर निर्भरता के कई लाभ हैं, वहीं वे कुछ जोखिम और चुनौतियां भी पैदा करती हैं। मुख्य चिंताओं में से एक है आउटसोर्सिंग भागीदार का चयन या डिजिटल ऋण संचालन के मामले में ऋण सेवा प्रदाता (एलएसपी) का चयन।’

राव ने कहा कि साइबर सुरक्षा ऐसा महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां विनियमित इकाइयों को अपनी डिजिटल संपत्तियों और ग्राहकों की सूचनाओं की सुरक्षा के लिए तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं की तैयारियों का आकलन करना चाहिए।

Advertisement
First Published - July 22, 2024 | 11:08 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement