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निवेशकों की ऊंची बोली से प्राइसिंग बिगड़ी, PFC–सिडबी का 11,500 करोड़ रुपये का बड़ा बॉन्ड प्लान ठप

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बॉन्ड की नीलामी में निवेशकों की ओर से ऊंची यील्ड पर बोलियां आईं जिससे बॉन्ड जारी करने वाले सहज नहीं थे इसलिए उन्होंने बॉन्ड निर्गम को रद्द कर दिया

Last Updated- December 09, 2025 | 10:13 PM IST
Bonds
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने अपने 11,500 करोड़ रुपये के निर्धारित बॉन्ड निर्गम को रद्द कर दिया। बॉन्ड की नीलामी में निवेशकों की ओर से ऊंची यील्ड पर बोलियां आईं जिससे बॉन्ड जारी करने वाले सहज नहीं थे इसलिए उन्होंने बॉन्ड निर्गम को रद्द कर दिया।

पीएफसी 15 साल के बॉन्ड के माध्यम से 3,500 करोड़ रुपये (600 करोड़ रुपये का मूल निर्गम और 2,900 करोड़ रुपये का ग्रीन शू) जुटाने के लिए बाजार में उतरी थीं जबकि सिडबी 3 साल,  4 महीने में परिपक्व होने वाले बॉन्ड के माध्यम से 8,000 करोड़ रुपये जुटाना रहा था।

बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि बोलियां उम्मीद के अनुरूप नरम नहीं रहीं, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में की गई रीपो दर में की गई 25 आधार अंक की कटौती का असर नहीं दिखा और छोटी अवधि के बॉन्ड पर दबाव बना हुआ है।

सूत्रों का कहना है कि पीएफसी ने 7.12 प्रतिशत कूपन दर का लक्ष्य रखा था, लेकिन निवेशकों ने 7.16 से 7.21 प्रतिशत के बीच बोली लगाई, जो उसके लक्ष्य से अधिक थी। इसी तरह से सिडबी ने 6.75 प्रतिशत के करीब कटऑफ का लक्ष्य रखा था, जबकि बोली 6.82 से 6.86 प्रतिशत के बीच आई।

बाजार के भागीदारों ने कहा कि ऑर्डर बुक मजबूत थे, लेकिन मिली बोली थोड़ी अधिक यील्ड की थी, क्योंकि निवेशकों ने संशोधित सॉवरिन बेंचमार्कों के अनुसार कीमत लगाई, न कि कम स्तर के जारीकर्ता के हिसाब से निचले स्तर पर।  इसकी वजह से प्राइसिंग में साफ गड़बड़ी हुई, मांग मजबूत बनी रही, लेकिन यील्ड को रीसेट किए जाने की वजह से बाजार के स्तर और जारीकर्ताओं की उम्मीद के बीच अंतर पैदा कर दिया।    इसके पहले नवंबर के अंतिम सप्ताह में पीएफसी ने ऊंचे कॉर्पोरेट बॉन्ड यील्ड और रेट कट के बाद बेहतर रेट की उम्मीद के चलते 3,000 करोड़ रुपये का तीन साल का बॉन्ड जारी किया था।

बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति द्वारा दर में 25 आधार अंक की कटौती किए जाने के बाद कुछ बड़े कॉर्पोरेट तात्कालित प्राइसिंग के लाभ का अनुमान लगाकर बाजार में संभावनएं तलाशने पर विचार कर रहे  हैं।  इसके बजाय 10 साल के बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड का यील्ड मामूली बढ़ा है और कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड इसी गति में ही चला है। निवेशक आमतौर पर कॉर्पोरेट पेपर की कीमत सरकारी बॉन्ड की चाल से अलग तय करते हैं, इसलिए जी सेक यील्ड में बढ़ोतरी से कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में भी स्वतः रीप्राइसिंग हुई।

दर में कटौती के बाद पिछले 2 दिन में 10 साल के मानक सरकारी बॉन्ड की यील्ड में 10 आधार अंक की वृद्धि हुईहै।

इसके साथ ही बाजार के आंतरिक लोगों ने कहा कि जारीकर्ता इस समय बाजार का रुख कर रहे हैं, क्योंकि उनके सीमित विकल्प हैं। या तो यील्ड स्थिर होने और धारणा में सुधार का इंतजार किया जाए, या बाजार द्वारा संरेखित स्तर पर बोली स्वीकार की जाए, जहां निवेशकों की मांग बेहतर बनी हुई है। एक व्यक्ति ने कहा, ‘यहां तक कि दर में कटौती के बाद भी यील्ड में 10 से 12 आधारअंक की वृद्धि हुई है और जारीकर्ता अधिक बोली स्वीकार करने के इच्छुक नहीं थे।’ उन्होंने कहा, ‘वे जल्दबाजी में नहीं हैं। ऐसे में वे उतार चढ़ाव वाले माहौल के स्थिर होने का इंजजार करेंगे। उसके बाद संभवतः बाजार में वापस लौटेंगे।’

रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘स्वाभाविक रूप से निवेशक कॉरपोरेट बॉन्डों की यील्ड सॉवरिन दरों के उतार चढ़ाव से अलग रखते हैं। इसलिए जैसे ही सी सैक यील्ड थोड़ी बढ़ी, कॉरपोरेट बाजार में निवेशकों की बोलियां भी थोड़ी ऊपर हो गईं। भले ही ऑर्डर बुक मजबूत थी, लेकिन बोलियां थोड़ी ज्यादा यील्ड पर आईं, क्योंकि निवेशकों द्वारा लगाई गई दर बदले हुए सॉवरेन स्तर  पर थे, न कि उस निचले स्तर पर, जिसकी उम्मीद इश्यू करने वाले कर रहे थे।’

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First Published - December 9, 2025 | 10:13 PM IST

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