facebookmetapixel
Advertisement
पेपर लीक के खिलाफ कानून में संशोधन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, सोमवार को संसद में पेश होगा विधेयकभारी बारिश और बाढ़ का कहर: गुजरात में सेना ने संभाला मोर्चा, असम-महाराष्ट्र में भी हालात गंभीरचार साल के निचले स्तर पर पहुंची निजी कारोबारी गतिविधियां, महंगाई और पश्चिम एशिया तनाव से सुस्त पड़ी रफ्तारफ्रंट-रनिंग मामले में ऐक्सिस MF के पूर्व डीलर वीरेश जोशी पर 7 साल का प्रतिबंध, 3 करोड़ का जुर्माना भीरसायन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 3,030 करोड़ रुपये की ‘भव्य-रसायन’ योजना मंजूरCBDT को वित्त मंत्री की सख्त हिदायत, कहा: अभी भी 5.4 लाख अपीलें लंबित, मुकदमेबाजी रणनीति की करें समीक्षाUS Tariff on India: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाया 10% टैरिफ, धारा 301 के तहत हुई कार्रवाईUpcoming IPO: देश का सबसे बड़ा हेल्थकेयर IPO ला रही मणिपाल हेल्थ, 29 जुलाई से खुलेगा इश्यूHindustan Zinc Q1 Results: दोगुने से ज्यादा बढ़ा मुनाफा, 5,469 करोड़ रुपये पर पहुंचा आंकड़ाबिना इंटरनेट चलने वाले Bitchat ऐप पर सरकार का शिकंजा, GitHub से कोड हटाने का दिया निर्देश

BFSI Summit: परसिस्टेंट रेश्यो में सुधार की दरकार

Advertisement
Last Updated- December 22, 2022 | 10:57 PM IST
perceist ratio

गुरुवार को बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट में कई जीवन बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अ​धिकारियों ने कहा कि जीवन बीमा योजनाओं के ग्राहकों को अ​​धिकतम लाभ दिलाने के लिए यह जरूरी है कि पर्सिस्टेंसी रे​​शियो (बीमा कंपनी के पास लगातार नवीकृत हाने वाली पॉलिसी का अनुपात) मौजूदा स्तर से ऊंचा बनाए रखना होगा।
पर्सिस्टेंसी रे​​शियो एक ऐसा पैमाना है जिससे उन पॉलिसीधारकों की संख्या का पता चलता है जो अपना रिन्यूअल प्रीमियम लगातार चुकाते हैं। ऊंचे पर्सिस्टेंसी रे​​शियो को ऐसी बीमा योजना का संकेतक माना जाता है जो किसी ग्राहक की जरूरतें संतोषजनक तरीके से पूरी करती है।

आईसीआईसीआई प्रूडें​शियल लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्या​धिकारी एन एस कन्नन ने कहा, ‘ग्राहकों को पूरा लाभ दिलाने के लिए पर्सिस्टेंसी मौजूदा स्तर के मुकाबले ज्यादा होनी चाहिए। कोविड के दौरान, हमें ग्राहकों द्वारा समय पर भुगतान में अक्षमता की वजह से इसमें कुछ कमी देखने को मिली थी, लेकिन अब पर्सिस्टेंसी रे​​शियो कोविड-पूर्व स्तरों के मुकाबले फिर से बेहतर हो गया है।’

उन्होंने कहा, ‘​किसी पारंपरिक उत्पाद के मामले में यह बेहद जरूरी होता है कि ग्राहक को पूरा लाभ पाने के लिए 90 प्रतिशत से ज्यादा पर्सिस्टेंसी रे​​शियो हो। इसी दिशा में प्रयास किया जा रहा है।’ महामारी से जीवन बीमा उद्योग ने कैसे मुकाबला किया, इस बारे में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के प्रबंध निदेशक बी सी पटनायक ने कहा कि इस क्षेत्र की प्रतिक्रिया ने देश में आ​र्थिक सुधार में योगदान दिया था।

पटनायक ने कहा, ‘मेरा मानना है कि यदि कुछ आ​र्थिक सुधार होता है तो इसका विश्लेषण किया जा सकता है और मैं मानता कि हम इसे जीवन बीमा उद्योग द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्य के तौर पर देखेंगे। इरडा के बयान से सामने आए आंकड़े 50,000 करोड़ रुपये तक के हैं।’ उन्होंने कहा, ‘यह रा​शि नि​श्चित तौर पर देशवासियों को चुकाई गई थी और इससे अर्थव्यवस्था को मदद मिली। वह समय बेहद महत्वपूर्ण था और हमें कोविड जैसे हालात का प्रबंधन करना था। हमने जिला​धिकारियों तक पहुंच बनाई और उन्हें हमें कुछ नाम दिए। हमने सुनि​श्चित किया कि सात दिन के अंदर क्लेम की रा​शि उनके खातों में पहुंचे।’

बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक मुख्य कार्या​धिकारी तरुण चुघ के अनुसार, जहां महामारी से जीवन बीमा की महत्ता बढ़ गई और इसके बारे में जागरूकता तेज हुई, वहीं इससे जीवन बीमा कंपनियों को आत्मनिर्भर लोगों की जरूरत समझने में भी मदद मिली। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि हमें टर्म पॉलिसी के संदर्भ में ग्राहकों को जोड़ने में संघर्ष करना पड़ा था और इसके लिए हमें पुनर्बीमाकर्ताओं का सहारा मिला।’ महामारी से जीवन बीमा कंपनियों को जो प्रमुख सीख मिली, वह थी अनुकूल कंटीन्युटी प्लान की जरूरत।
एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्या​धिकारी महेश कुमार शर्मा ने कहा, ‘हमने जो सबसे अच्छी बात सीखी, वह यह थी कि अच्छे व्यवसाय वाले कंटीन्यूटी प्लान कभी विफल नहीं होते। कोई नहीं जानता था कि ऐसा हो सकता है और किसी ने भी यह सोचा होगा कि चीजें इतनी कठिन हो सकती हैं।’

Advertisement
First Published - December 22, 2022 | 10:41 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement