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CBDT की सख्ती: दान संबंधी दावों की दोबारा जांच के बाद टैक्सपेयर्स को डिपार्टमेंट से SMS-ईमेल से अलर्ट

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टैक्स डिपार्टमेंट ने उन टैक्सपेयर्स को SMS और ईमेल भेजना शुरू कर दिया है, जिन्होंने बिना मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों या चैरिटेबल संस्थाओं के नाम पर गलत टैक्स छूट ली है

Last Updated- December 15, 2025 | 4:00 PM IST
Income Tax
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दान से जुड़ी टैक्स छूट के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल का पता लगाने के बाद एक खास अभियान शुरू किया है। इसका बड़ा कारण यह है कि बिना मान्यता वाले राजनीतिक दलों और संदिग्ध चैरिटेबल संस्थाओं से जुड़े मामलों में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। जिन टैक्सपेयर्स ने गलत तरीके से छूट का दावा किए हो, उन्हें अब SMS और ईमेल के जरिए सलाह भेजी जा रही है कि वे अपने रिटर्न की जांच करें और जरूरत पड़े तो सुधार कर लें।

शनिवार को जारी बयान में वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) द्वारा डेटा की गहन जांच के बाद उठाया गया है। जांच में दान से जुड़े सेक्शन में “बड़ी मात्रा में फर्जी दावे” पकड़े गए हैं। इन दावों से व्यक्तियों और कंपनियों ने अपनी टैक्स देनदारी कम की और कई मामलों में गलत रिफंड भी हासिल कर लिया।

टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को सुधार करने की सलाह क्यों दे रहा है?

मंत्रालय के मुताबिक, जांच में पता चला कि रजिस्टर्ड अनरेकोग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियां (RUPP) इस तरह का काम कर रही थीं:

  • इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करती थीं
  • अपने रजिस्टर्ड पते पर काम नहीं कर रही थीं
  •  कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं दिखा रही थीं
  • हवाला लेन-देन, अवैध फंड रूटिंग, सीमा पार भुगतान और फर्जी दान रसीदें जारी करने के लिए इस्तेमाल हो रही थीं

कुछ RUPP और ट्रस्टों पर की गई तलाशी में कुछ और सबूत भी मिले। जैसे लोगों ने फर्जी दान दिखाकर छूट ली या फिर कंपनियों ने फर्जी CSR खर्च बुक किया और बिना किसी वास्तविक चैरिटेबल या राजनीतिक गतिविधि के बड़ी संख्या में रसीदें जारी की गईं।

SMS और ईमेल टैक्स डिपार्टमेंट किसे भेज रही है?

12 दिसंबर 2025 से टैक्स डिपार्टमेंट उन टैक्सपेयर्स को सलाह भेजना शुरू कर चुका है जिन्होंने संदिग्ध संस्थाओं को दान दिखाकर छूट ली हो, या दान की सच्चाई साबित करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं दी है।

इसे “taxpayer-friendly NUDGE campaign” बताया गया है। इसका मकसद लोगों को मौका देना है कि वे:

  • पहले के रिटर्न की समीक्षा करें
  • गलत छूट हटाएं
  • जरूरत पड़े तो अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-U) फाइल करें

CBDT ने कहा कि काफी संख्या में टैक्सपेयर्स ने AY 2025-26 के लिए अपने रिटर्न सुधार किए हैं और पिछले सालों के लिए भी अपडेटेड रिटर्न फाइल किए हैं, क्योंकि उन्हें एहसास हो गया कि उनके दावे सही नहीं थे।

Also Read: टैक्सपेयर्स ध्यान दें! एडवांस टैक्स जमा करने का आज आखिरी मौका, देर की तो लगेगा भारी जुर्माना

टैक्सपेयर्स को अब क्या करना चाहिए?

डिपार्टमेंट ने लोगों से अपील की है कि वे:

  • यह दोबारा जांच लें कि जिन संस्थाओं को उन्होंने दान दिया है
  • वे असली हैं, रजिस्टर्ड हैं और टैक्स छूट के लिए योग्य हैं या नहीं
  • रसीदों की सही-सही जांच करें
  • डिपार्टमेंट के साथ रजिस्टर्ड अपना मोबाइल नंबर और ईमेल ID सही रखें, ताकि कोई सूचना मिस न हो

टैक्सपेयर्स के लिए यह क्यों जरूरी है?

दान के जरिए छूट लेना लंबे समय से टैक्स बचाने का कारगर तरीका रहा है, लेकिन यह कार्रवाई दान करने वाले की सावधानी की अहमियत दिखाती है।

इनकम टैक्स एक्ट के तहत मान्यता प्राप्त न संस्थाओं को दान पर:

  • छूट वापस ली जा सकती है
  • टैक्स मांग नोटिस आ सकता है
  • गलत रिपोर्टिंग पर जुर्माना लग सकता है और पिछले रिटर्न की जांच हो सकती है

ज्यादातर वेतनभोगी टैक्सपेयर्स, जो इन छूटों पर निर्भर रहकर अपना टैक्स कम करते हैं, उन्हें यह सलाह याद दिलाती है कि टैक्स बचत की रणनीति सटीक, नियमों के मुताबिक और अच्छी तरह डॉक्यूमेंटेड होनी चाहिए। फिलहाल जिन्हें ऐसी सलाह मिल रही है, उन्हें इसे गंभीरता से लेना चाहिए, तुरंत अपने फाइलिंग की जांच करनी चाहिए और कोई गलती हो तो उसे सुधार लेना चाहिए, वरना मामला औपचारिक टैक्स मांग तक पहुंच सकता है।

कुछ जरूरी बातें!

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मान्यता प्राप्त न राजनीतिक दलों या चैरिटेबल संस्थाओं से जुड़े गलत छूट दावों के लिए टैक्सपेयर्स को SMS और ईमेल सलाह भेजना शुरू कर दिया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने देखा है कि रजिस्टर्ड अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों (RUPP) या चैरिटेबल संस्थाओं को दान दिखाकर बड़ी मात्रा में फर्जी दावे किए गए हैं, जिससे टैक्स देनदारी कम की गई और फर्जी रिफंड भी लिए गए।

CBDT ने कहा कि कार्रवाइयों से मिले सबूतों से पता चला कि RUPP फंड रूटिंग, हवाला लेन-देन, सीमा पार भुगतान और फर्जी दान रसीदें जारी करने के लिए इस्तेमाल हो रही थीं। इनमें से कई रिटर्न नहीं फाइल करती थीं, रजिस्टर्ड पते पर काम नहीं कर रही थीं और कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं कर रही थीं।

CBDT ने कुछ ऐसे RUPP और ट्रस्टों पर तलाशी ली और लोगों द्वारा फर्जी दान तथा कंपनियों द्वारा फर्जी CSR से जुड़े पक्के सबूत जुटाए। CBDT की डेटा एनालिटिक्स से पता चला कि कई टैक्सपेयर्स संदिग्ध संस्थाओं को दान दिखाकर छूट लेने या संस्थाओं की सच्चाई साबित करने की जरूरी जानकारी न देने में शामिल हो सकते हैं।

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First Published - December 15, 2025 | 3:54 PM IST

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