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ग्रामीण भारत में वाहन ऋणों में आई गिरावट

Last Updated- December 12, 2022 | 2:05 AM IST

वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वाहन ऋणों में चूक के मामले बढ़े जिसके कारण इसे खराब तिमाही के तौर पर देखा जा रहा है।
ऐसे में गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां (एनबीएफसी) और वाणिज्यिक बैंक त्योहारी सीजन से आस लगाए बैठे हैं जब अमूमन वाहनों की अधिक खरीदारी होती है और इससे समग्र तौर पर धारणा में सुधार होता है। जैसे जैसे महीने दर महीने आर्थिक गतिविधि जोर पकड़ रही है ऋणदाताओं को वित्त वर्ष की दूसरी छमाही बेहतर रहने का अनुमान है।
लॉकडाउन और प्रतिबंधित आवाजाहियों के बीच वाहन ऋण देने वाले एनबीएफसी की गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) में तिमाही दर तिमाही इजाफा हुआ है। इसकी वजह यह है कि इन एनबीएफसी के अधिक ग्राहक ग्रामीण इलाकों में हैं और कोविड-19 की दूसरी लहर की पहुंच दूर दराज के इलाकों तक हुई जिससे जीवन और आजीविकाओं पर संकट आ गया।      
सबसे अधिक चूक के मामले वाणिज्यिक वाहनों में आए जिसके बाद तिपहिया और शुरुआती स्तर के दोपहिया वाहनों में चूक की घटनाएं हुईं।
करीब 80 फीसदी तिपहिया और 45 फीसदी दोपहिया की खरीदारी देश में उधारी पर की जाती है। इन वाहनों के लिए भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। महामारी से पूर्व की अवधि में यह औसत और अधिक हुआ करता था।
बजाज ऑटो के कार्यकारी निदेशक राकेश शर्मा कहते हैं कि रोजाना की कमाई में सबसे खराब स्थिति नजर आ रही है, ऐसे में तिपहिया मालिकों ने अपने ईएमआई के भुगतान में चूक किया है। शर्मा कहते हैं, ‘यदि महामारी से पूर्व उनकी कमाई 25,000 रुपये थी तो वह अब घटकर 15,000 रुपये रह गई है। यदि बाजार में सुधार का हल्का या कोई संकेत नजर नहीं आता है तो स्थिति में बदलाव होना मुश्किल है।’
वाहन खंड की दो बड़ी एनबीएफसी बजाज फाइनैंस और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंस सर्विसेज (एमएमएफएसएल) के लिए एनपीए में सकल वृद्घि पहली तिमाही में 700 आधार अंकों से अधिक रही। ऐसा इसलिए हुआ कि वाहन ऋण में तिपहिया वाहनों को दिए गए ऋण की हिस्सेदारी अधिक है।
बजाज फिनसर्व के वाहन वित्त कारोबार पर सबसे बुरा असर पड़ा है।
निवेशक प्रस्तुतीकरण के मुताबिक वाहन ऋणों पर शुद्घ एनपीए 30 जून को 2,307 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया जो मार्च, 2021 में 1,136 करोड़ रुपये था। मोटे तौर पर इसकी वजह दोपहिया और तिपहिया वाहनों को दिया गया ऋण है।         
भले ही एनबीएफसी के एनपीए की अधिक चर्चा हुई है लेकिन बैंकों के लिए भी यह तिमाही आसान नहीं रहा है।
यूनियन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी राजकिरण राय जी कहते हैं कि वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही कोई सामान्य तिमाही नहीं रही है।
दूसरी लहर में स्वास्थ्य और आमदनी को हुए नुकसान के कारण ग्रामीण इलाकों में वाहन ऋणों सहित खुदरा क्षेत्र में दबाव स्पष्ट नजर आ रहा है। ऐसे ऋणों का बड़े पैमाने पर पुनर्गठन किया गया है।
 राय कहते हैं, ‘हमें ऋण बड़े पैमाने पर चूकों में समाप्त होते नजर नहीं आते। समस्या बैंक की सहन करने की सीमा में है।’
यस बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी प्रशांत कुमार कहते हैं कि ग्रामीण और शहरी इलाके दूसरी लहर की चपेट में थे। अप्रैल और मई में शून्य आवाजाही के कारण परिवहन क्षेत्र में नौकरियों और कारोबार पर बुरी तरह से असर हुआ। इसी का असर ग्रामीण इलाकों में वाणिज्यिक वाहन श्रेणी के ऋणों पर पड़ा।
वह कहते हैं कि एनबीएफसी को बैंकों की तुलना में अधिक झटके लगे हैं।
कुमार कहते हैं कि प्रतिबंधों में ढील दिए जाने और मॉनसून के आगे बढऩे से बदलाव की शुरुआत हो गई है। ग्रामीण इलाकों में आर्थिक बहाली बहुत अधिक तेज गति से होगी जिससे दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

First Published - August 6, 2021 | 12:50 AM IST

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