facebookmetapixel
Advertisement
अच्छे दिनों में राजकोषीय गुंजाइश न बनाना भारत की बड़ी भूल, आर्थिक संकट में विकल्प हुए सीमितEditorial: फेड चीफ के सख्त रुख और ब्याज दर बढ़ने के डर से सहमा ग्लोबल मार्केटफार्मा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क के सिस्टम में बड़ी सेंधमारी, हैकर्स ने मांगी 2.5 करोड़ डॉलर की फिरौतीमहंगाई दर को लेकर सतर्क रहना जरूरी, नीतिगत दरों में बदलाव के लिए करना होगा इंतजार: RBIटेलीग्राम बैन पर केंद्र सरकार के फैसले को दिल्ली HC की मंजूरी, कोर्ट ने कहा: यह कदम अनुचित नहींमुकेश अंबानी का बड़ा बयान: आयातित ऊर्जा पर निर्भरता लंबे समय के लिए ठीक नहीं, ग्रीन एनर्जी में निवेश बढ़ाएगी RILईशा अंबानी का मेगा प्लान: ₹1 लाख करोड़ के राजस्व लक्ष्य के साथ देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी बनेगी RCPLमुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा AI कंप्यूट प्लेटफॉर्म बनाएगी रिलायंसGold Price Crash: फेड के सख्त रुख और मजबूत डॉलर से टूटा सोना, लगातार तीसरे सप्ताह आई भारी गिरावटReliance Stocks: JIO IPO से चमकेगी रिलायंस की किस्मत, शेयरों की रेटिंग में बड़े सुधार के संकेत

महंगाई अनुमान बढ़ाएगा आरबीआई!

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 8:17 PM IST

पेट्रोल और डीजल के दाम दो हफ्ते से भी कम समय में 8 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। ऐेसे में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चालू वित्त वर्ष में 4.5 फीसदी मुद्रास्फीति रहने का अपना अनुमान बढ़ा सकता है। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए सर्वेक्षण में सभी 10 प्रतिभागियों ने मुद्रास्फीति अनुमान बढ़ाए जाने पर सहमति जताई है।
आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक 6 से 8 अप्रैल को होगी, जिसके नतीजों की घोषणा बैठक के अंतिम दिन की जाएगी। सर्वेक्षण में शामिल सभी प्रतिभागियों को लगता है कि आरबीआई रीपो दर में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा, वहीं अधिकतर का कहना था कि रिवर्स रीपो भी मौजूदा स्तर पर बनी रहेगी और दो साल से जारी समायोजन वाला नीतिगत रुख भी बरकरार रहेगा।
एलऐंडटी फाइनैंस होल्डिंग्स की समूह मुख्य अर्थशास्त्री रूपा रेगे नित्सुरे  ने कहा, ‘रूस-यूक्रेन युद्घ की चिंता के मद्देनजर जिंसों खास तौर पर कच्चे तेल के दाम में इजाफे और आपूर्ति पक्ष में बाधा को देखते हुए आरबीआई रीपो दर पर यथास्थिति बनाए रखेगा।’
कुछ प्रतिभागी मानते हैं कि चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्घि के अनुमान में बदलाव किया जा सकता है। आरबीआई ने पिछली बैठक में चालू वित्त वर्ष के लिए 7.8 फीसदी विकास दर का अनुमान जाहिर किया था। नोमुरा ने एक रिपोर्ट में कहा है, ‘मुद्रास्फीति और राजकोषीय जोखिम का भारत में असर दिखने लगा है… 8 अप्रैल को प्रस्तावित नीतिगत बैठक में आरबीआई जीडीपी वृद्घि का अनुमान घटा सकता है और खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ा सकता है।’ रिपोर्ट में कहा गया, ‘पूरी संभावना है कि आरबीआई नीतिगत दरों को सामान्य बनाने की दिशा में पहला कदम उठाते हुए अपने रुख को समायोजन से तटस्थ कर दे मगर हमें उम्मीद है कि वह सहज दिशानिर्देश के साथ इसमें संतुलन कायम करेगा।’ नोमुरा को लगता है कि मुद्रास्फीति 2 से 6 फीसदी के आरबीआई के लक्षित दायरे को पार कर सकती है और पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी से यह औसतन 6.3 फीसदी तक पहुंच सकती है। नित्सुरे ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति को संशोधित कर 5.7 से 5.8 फीसदी किया जा सकता है। बार्कले में प्रबंध निदेशक और भारत में मुख्य अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने कहा, ‘पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल, केरोसिन और सोने के दाम में तेजी को देखते हुए मुद्रास्फीति अनुमान को संशोधित कर बढ़ाया जा सकता है। मुझे लगता है कि मौद्रिक नीति समिति देश में बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए राजकोषीय नीति की भूमिका के भी संकेत दे सकती है।’
2020 में कोविड महामारी शुरू होने के बाद से आरबीआई ने सक्रियता दिखाते हुए रीपो दर में लगातार कटौती कर उसे 115 आधार अंक कम किया है। वृद्घि को सहारा देने के लिए आरबीआई ने नीति में नरमी बनाए रखी है।
हालांकि 2020-21 के निचले स्तर से वृद्घि में सुधार के बाद पिछले वित्त वर्ष में तरलता कम करने जैसे कुछ उपाय किए हैं। केंद्रीय बैंक ने भरोसा दिया था कि जब तक अर्थव्यवस्था में सुधार टिकाऊ नहीं हो जाता, वह समायोजन वाला रुख बनाए रखेगा। मई 2020 की समीक्षा बैठक से अब तक आरबीआई ने रीपो दर में कोई इजाफा नहीं किया है।
मगर मुद्रास्फीति में तेजी ने चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इससे भी मुद्रास्फीति में इजाफा हो सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक समूह के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘मुद्रास्फीति के साथ समस्या यह है कि लंबी अवधि में यह ज्यादा नुकसानदायक होती है और अल्पावधि में इसे नजरअंदाज करने से बाद में असर व्यापक हो सकता है। हम मानते हैं कि मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी से सुधार की गति पर असर पड़ सकता है।’ एक्यूट रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के मुख्य विश्लेषण अधिकारी सुमन चौधरी ने कहा, ‘जिंसों की ऊंची कीमतों के साथ ही वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां देखते हुए हम मानते हैं कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को बढ़ा सकता है और समायोजन वाले अपने रुख से धीरे-धीरे हटने का आधार तैयार कर सकता है।’ वृद्घि अनुमान की बात करें तो ज्यादातर प्रतिभागियों को लगाता है कि केंद्रीय बैंक इसकी समीक्षा के लिए अभी थोड़ा इंतजार कर सकता है। 2022-23 के लिए आरबीआई ने वास्तविक जीडीपी में 7.8 फीसदी वृद्घि का अनुमान लगाया है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘हमें लगता है कि आरबीआई वृद्घि परिदृश्य पर भारी अनिश्चितता और चुनौतियों जैसे यूरोप में संघर्ष, विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतियों में सख्ती और चीन में कोविड के नए मामले आदि से वाकिफ है।’

Advertisement
First Published - April 3, 2022 | 11:00 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement