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छोटी अवधि के डेट फंड में निवेश पर टिकी नजर

Last Updated- December 12, 2022 | 2:03 AM IST

मध्यम अवधि में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए बैठे डेट फंड मैनेजर निवेशकों को 1-3 साल की परिपक्वता अवधि वाले फंडों पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखने की घोषणा करने के साथ ही ऐसे संकेत भी दिए कि आगे चलकर नीतिगत रूप से स्थिति सामान्य हो सकती है। बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसी स्थिति में कम अवधि वाले फंड एवं मुद्रा बाजार फंड निवेशकों के लिए सबसे मुफीद होंगे। जहां नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला लेने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने ‘उदार’ रुख जारी रखने का फैसला किया है वहीं ट्रस्ट परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी संदीप बागला का मानना है कि आरबीआई की यह नीति मार्जिन के लिहाज से काफी आक्रामक है। बागला कहते हैं ‘आरबीआई ने मजूबत वृद्धि एवं मुद्रास्फीति के मोर्चे पर नकारात्मक आश्चर्यों की बात मानी है। एमपीसी के एक सदस्य उदार रुख में बदलाव के पक्षधर थे। इसकी संभावना है कि लंबी अवधि वाले फंडों का प्रतिफल धीरे-धीरे 6.5 फीसदी की ओर जाएगा। ऐसे में निवेशकों को ब्याज दरों का जोखिम कम करने के लिए तीन साल से कम परिपक्वता अवधि वाले बॉन्ड फंडों में निवेश करना चाहिए।’
अमूमन निर्धारित आय वाली प्रतिभूतियों की कीमतें तत्कालीन ब्याज दरों से तय होती हैं। ब्याज दर एवं कीमतों के बीच व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है। जब ब्याज दरें घटती हैं तो निर्धारित आय वाली प्रतिभूतियों की कीमतें बढ़ जाती हैं। वहीं ब्याज दरें बढऩे पर इन प्रतिभूतियों की कीमत गिर जाती है। इस तरह लंबी अवधि वाले डेट निवेश साधनों के ब्याज दर बढ़ते समय उठापटक का शिकार होने की आशंका अधिक होती है। व्यवस्था में अतिरिक्त तरलता को कम करने के लिए आरबीआई ने प्रतिफल बढऩे की संभावनाओं को देखते हुए एक परिवर्तनीय दर रिवर्स रीपो (वीआरआरआर) कार्यक्रम शुरू करने का ऐलान किया। आरबीआई ने इस कार्यक्रम के तहत राशि को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर चार लाख करोड़ रुपये करने का फैसला किया है।
क्वांटम म्युचुअल फंड के फंड मैनेजर (निर्धारित आय) पंकज पाठक कहते हैं कि हमें आरबीआई की तरफ से मौद्रिक नीति परिचालन को सामान्य करने के लिए एक नई तरह की कोशिश देखने को मिल सकती है। पाठक कहते हैं, ‘अगले छह महीनों में हम आरबीआई से बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता को कम करने की उम्मीद करेंगे। इसके लिए हमें रिवर्स रीपो दर को 3.75 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी करने की उम्मीद रहेगी। और वृद्धि स्थिर होने पर आरबीआई अपने उदार रुख से थोड़ा दूर हो सकता है और धीरे-धीरे ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है।’
पिछले एक साल में मुद्रा बाजार फंड, अत्यंत कम अवधि के फंड और गतिशील बॉन्ड जैसे कुछ डेट श्रेणियों का रिटर्न 4 फीसदी के करीब रहा है।

First Published - August 6, 2021 | 11:47 PM IST

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