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वित्त वर्ष 24 में आई बॉन्ड यील्ड में गिरावट, बैंको को होगा फायदा

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चौथी तिमाही जनवरी-मार्च के अंतिम करोबारी दिन 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 14 आधार अंक गिरकर 7.06 प्रतिशत पर आ गई है।

Last Updated- March 29, 2024 | 9:29 PM IST
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वाणिज्यिक बैंक कारोबारी फायदा उठाने के लिए तैयार हैं। इसका कारण यह है कि चौथी तिमाही जनवरी-मार्च के अंतिम करोबारी दिन 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 14 आधार अंक गिरकर 7.06 प्रतिशत पर आ गई है।

कारोबारी की जाने वाली दो अन्य प्रतिभूतियों (securities) का यील्ड भी गिर गई है। इस तिमाही में पांच वर्षीय सरकारी बॉन्ड का यील्ड आठ आधार अंक और 14 वर्ष के बॉन्ड का यील्ड 23 आधार अंक गिर गई है। इस पूरे वित्तीय वर्ष की चार तिमाहियों में पहली बार बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई।

वर्ष 2023-24 (वित्त वर्ष 24) में बेंचमार्क यील्ड में 26 आधार अंक की गिरावट आई जबकि वर्ष 2022-23 में 48 आधार अंक की बढ़त हुई थी। इससे पहले यील्ड में अंतिम गिरावट वर्ष 2019-20 में 121 आधार अंक की उल्लेखनीय गिरावट आई थी।

हालांकि वर्ष 2020-21 में तीन आधार अंक और वर्ष 2021-22 में 67 आधार अंक की बढ़त हुई थी। बाजार साझेदारों के अनुसार विदेशी मु्द्रा के प्रवाह और अनुकूल मांग आपूर्ति गतिशीलता के कारण वित्त वर्ष 24 की यील्ड में गिरावट आई थी।

वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति बेहतर हुई, विदेशी मुद्रा प्रवाह ने ऋण प्रवाह को बढ़ावा दिया और यूएस फेडरल रिजर्व कमेटी ने 2024 में दरों में तीन बार कटौती करने का संकेत दिया। इन कारकों से बॉन्ड मार्केट का रुझान बेहतर हुआ।

एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा, ‘कुछ राजकोषीय लाभ होंगे। यह बैंकों के लिए भी लाभदायक होगा क्योंकि 31 दिसंबर की तुलना में मार्केट के स्तर में सुधार हुआ है। इसलिए हमने जो उपबंध किए थे, वह इस तिमाही में राइट बैक हो जाएंगे। लिहाजा मुझे यह बड़े लाभ नजर आता है।’

केंद्रीय बैंक के अनुसार प्रणाली में बुधवार को नकदी की कमी 40,981 करोड़ रुपये थी जबकि यह 31 दिसंबर, 2023 को 1.56 लाख करोड़ रुपये थी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने नकदी बढ़ाने के लिए कई बार परिवर्तनीय दर रीपो (VRR) नीलामी की थीं और रीपो दर के करीब ओवरनाइट मनी मार्केट दरें रखी गई थीं। हालिया रीपो दर 6.5 प्रतिशत है।

नैशनल सिक्योरिटी डिपॉजिट के 26 मार्च के आंकड़े के अनुसार विदेशी निवेशकों ने इस तिमाही में 53,051 करोड़ रुपये का निवेश किया था। पीएनबी गिल्ट्स के मुख्य कार्याधाकारी एवं प्रबंध निदेशक विकास गोयल ने कहा, ‘यील्ड में गिरावट का एक प्रमुख कारण नकदी है। विदेशी संस्थागत निवेशकों का प्रवाह अत्यधिक उच्च स्तर पर था।

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First Published - March 29, 2024 | 9:29 PM IST

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