facebookmetapixel
Q3 Results: Sun Pharma से लेकर GAIL और IDFC first bank तक, आज 72 से ज्यादा कंपनियों के नतीजेBudget Day Stock: मार्केट एक्सपर्ट ने बताया बजट डे के लिए मल्टीबैगर PSU स्टॉक, चेक कर लें टारगेट प्राइसBudget 2026: कब और कहां देखें निर्मला सीतारमण का भाषण, डेट और लाइव स्ट्रीमिंग की पूरी जानकारीबुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में 18.3% का इजाफा, बजट बढ़कर ₹35.1 लाख करोड़ पहुंचामॉनसून पर मंडराया अल नीनो का साया: स्काईमेट ने जताई 2026 में सूखे और कम बारिश की गंभीर आशंकाPDS में अनाज की हेराफेरी पर लगेगा अंकुश, सरकार लाएगी डिजिटल ई-रुपी वाउचरIndia- EU FTA से 5 साल में यूरोप को निर्यात होगा दोगुना, 150 अरब डॉलर तक पहुंचेगा व्यापार: पीयूष गोयलMoody’s का दावा: यूरोपीय संघ के साथ समझौता भारत को देगा बड़ा बाजार, अमेरिकी टैरिफ से मिलेगी सुरक्षाRBI का नया कीर्तिमान: स्वर्ण भंडार और डॉलर में उतार-चढ़ाव से विदेशी मुद्रा भंडार सर्वकालिक उच्च स्तर परBPCL की वेनेजुएला से बड़ी मांग: कच्चे तेल पर मांगी 12 डॉलर की छूट, रिफाइनिंग चुनौतियों पर है नजर

नए लेबर कोड के विरोध में ट्रेड यूनियनों ने देशभर में हड़ताल का ऐलान किया, कहा: ये मजदूरों के साथ धोखा

इन यूनियनों ने इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है और आने वाले बुधवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है

Last Updated- November 22, 2025 | 3:55 PM IST
labour
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत के दस बड़े ट्रेड यूनियनों ने शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड को “मजदूरों के साथ धोखा” बताया है। इन यूनियनों ने इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है और आने वाले बुधवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। ये यूनियन ज्यादातर विपक्षी पार्टियों से जुड़ी हुई हैं और पिछले पांच साल से इन कानूनों का लगातार विरोध कर रही हैं।

ये चारों लेबर कोड पांच साल पहले संसद से पास हो चुकी थीं। सरकार का कहना है कि इनसे पुराने ब्रिटिश काल के जटिल कानूनों को आसान बनाया गया है और निवेश के लिए माहौल बेहतर होगा। साथ ही मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम वेतन का फायदा भी मिलेगा। लेकिन यूनियनों का कहना है कि इन कानूनों से कंपनियों को कर्मचारियों को आसानी से निकालने की छूट मिल गई है, जो मजदूरों के हक पर डाका है।

क्या बदला इन नए कानूनों से?

  • फैक्ट्रियों में शिफ्ट अब लंबी हो सकती है
  • महिलाओं के लिए रात की पाली की इजाजत
  • छंटनी के लिए सरकारी इजाजत की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी कर दी गई
  • छोटी-मझोली कंपनियों को पहले से ज्यादा छूट

Also Read: 4 नए लेबर कोड आज से लागू: कामगारों को मिलेगी सामाजिक सुरक्षा, मौजूदा श्रम कानून बनेंगे सरल

इन बदलावों से कारोबारी जगत काफी खुश था क्योंकि वो लंबे समय से कहते आए हैं कि पुराने कानून मैन्युफैक्चरिंग को पीछे रखते हैं। देश की करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा अभी 20 फीसदी से भी कम है।

लेकिन सब एक मत नहीं हैं। छोटे-मंझोले उद्यमियों का संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ इंडियन एंटरप्रेन्योर्स’ ने भी चिंता जताई है कि नए नियमों से उनका खर्च बहुत बढ़ जाएगा और कई सेक्टर में कारोबार में रुकावट आएगी। उन्होंने सरकार से बदलाव के लिए ट्रांजिशन सपोर्ट और लचीला अमल मांगा है।

BMS नए लेबर कोड के समर्थन में

दक्षिणपंथी भारतीय मजदूर संघ (BMS) इन कानूनों का समर्थन कर रहा है। उसने राज्यों से कहा है कि कुछ मुद्दों पर बातचीत के बाद इन्हें जल्द लागू कर देना चाहिए।

श्रम मंत्रालय ने जून 2024 से अब तक यूनियनों से दर्जन भर से ज्यादा मीटिंग की हैं, लेकिन बात बनती नहीं दिख रही। मंत्रालय ने शनिवार को रॉयटर्स के सवालों का अभी कोई जवाब नहीं दिया है।

अब सारे राज्य अपने-अपने हिसाब से इन चार कोड — वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा — के हिसाब से नियम बनाएंगे।

First Published - November 22, 2025 | 3:55 PM IST

संबंधित पोस्ट