सरकार ने सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), सुकन्या समृद्धि योजना सहित दर्जन भर लघु बचत योजनाओं पर मार्च तिमाही में ब्याज दरें यथावत रखने का फैसला किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नीतिगत दरों में पिछले साल फरवरी से अब तक 125 आधार अंक की कटौती के बावजूद लगातार 8 तिमाहियों से सरकार ने बचत योजनाओं ब्याज भुगतान स्थिर रखा है।
इसे देखते हुए बैंकों के लिए जमा पर ब्याज घटाना मुश्किल साबित हो रहा है। खासकर ऐसे वक्त में जब जमा आकर्षित करना कठिन हो गया है और ताजा आंकड़ों के मुताबिक बैंकों की जमा वृद्धि सुस्त होकर 9.35 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि ऋण वृद्धि करीब 12 प्रतिशत पर है।
सरकार ने बुधवार को कहा कि वह जनवरी-मार्च 2026 के लिए लघु बचत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगी। पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत, डाकघर बचत खाते पर 4 प्रतिशत, सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 प्रतिशत, 3 साल की सावधि जमा पर 7.1 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। वहीं राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) पर 7.7 प्रतिशत, किसान विकास पत्र पर 115 महीने की मेच्योरिटी में 7.5 प्रतिशत और 5 साल की डाकघर मासिक आय योजना पर 7.4 प्रतिशत ब्याज मिलेगा।
नीतिगत दर में कटौती के बात बैंकों ने रुपये में नए ऋण के लिए भारित औसत उधारी दर (डब्ल्यूएएलआर) फरवरी अक्टूबर 2025 के लिए 69 आधार अंक कम कर दिया है। वहीं इस अवधि के लिए रुपये में बकाया ऋण के लिए इसे 63 आधार अंक घटाया है। वहीं जमा के मामले में देखें तो नए जमा पर भारित औसत घरेलू सावधि जमा दर (डब्ल्यूएडीटीडीआर) 105 आधार अंक कम हुआ है, जबकि पहले से जमा पर यह 32 आधार अंक कम हुआ है।
दिसंबर में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नीतिगत दर में 25 आधार अंक की कटौती की थी। उसके बाद भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक सहित कुछ बड़े बैंकों ने चुनिंदा अवधि की जमा दरों में कमी की है, जिससे उनकी अधिकतम जमा दर 6.66 प्रतिशत से घटकर 6.45 प्रतिशत हो गई है।
बैंकरों ने कहा कि उनके लिए जमा दरों को और कम करना बहुत मुश्किल होगा, जब तक व्यवस्था में पर्याप्त नकदी न हो। ऐसी स्थिति में भी अतिरिक्त कटौती की सीमित संभावना है, क्योंकि इससे जमा आकर्षित करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘सरकार ने लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरें यथावत रखी हैं, जिसे बैंकों को अपनी जमा दरों का आकलन करते समय ध्यान में रखना होगा कि क्या आगे किसी बदलाव की संभावना है। लघु बचत योजनाएं व्यापक तौर पर कस्बाई और ग्रामीण इलाकों के कम आय वर्ग के लोगों के लिए होती हैं, जो बैंकों के ग्राहकों से थोड़ा अलग हैं। इस समय बैंकों को शेयर बाजारों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। इसकी वजह से लघु बचत योजनाओं को ध्यान में रखना होगा, लेकिन उनका महत्त्व थोड़ा कम है। प्राथमिक रूप से म्युचुअल फंडों और शेयर बाजारों से प्रतिस्पर्धा है।’