facebookmetapixel
India–EU FTA Final! 20 साल बाद हुआ बड़ा सौदा, भारत को क्या मिलेगा?Budget 2026: क्या डेट म्युचुअल फंड्स में लौटेगा इंडेक्सेशन बेनिफिट? जानें निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरीITR की डेडलाइन चूकी? घबराएं नहीं! ITR-U के जरिए सुधारें अपनी गलती और भारी पेनल्टी से खुद को बचाएंAsian Paints Q3 Results: मुनाफे में 4.6% की गिरावट, पर सेल्स और वॉल्यूम ग्रोथ ने दिखाई मजबूतीGoogle Pay से अब मिनटों में मिलेगा पर्सनल लोन, वो भी बिना किसी गारंटी के! जानें पूरा मामलाBudget 2026: सरकार हो राजी तो म्युचुअल फंड बनेंगे बुढ़ापे का सहारा, NPS जैसे ही टैक्स फायदे मिलने की उम्मीद  डॉलर की गिरती साख ने बदला वैश्विक बाजार का मिजाज: क्या रुपये में आगे भी जारी रहेगी गिरावट?वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच SME मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स बढ़ा, बजट से मिलेगा और सहाराEPFO 3.0 के साथ PF सिस्टम में बड़ा बदलाव: नया पोर्टल, कोर बैंकिंग और AI से सेवाएं होंगी आसानGold Jewellery Sales: कीमतों में तेजी के बावजूद सोने की चमक बरकरार, दिसंबर में ज्वेलरी बिक्री 12% बढ़ी

पलायन से बढ़ी शहरी गरीबी!

दिल्ली में 11 में से पांच जिलों (मध्य, उत्तर, पश्चिम, दक्षिण पश्चिम और नई दिल्ली) में बहुआयामी गरीबी बढ़ गई।

Last Updated- July 24, 2023 | 11:02 PM IST
poverty

नीति आयोग ने पिछले हफ्ते जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) जारी किया था, जिसमें 2015-16 और 2019-21 के बीच देश भर में गरीबी में तेज कमी दिखाई गई थी। मगर 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 24 जिलों में उसी दौरान गरीबी बढ़ गई, जिसका कारण संभवत: शहरों की ओर पलायन था।

दिल्ली में 11 में से पांच जिलों (मध्य, उत्तर, पश्चिम, दक्षिण पश्चिम और नई दिल्ली) में बहुआयामी गरीबी बढ़ गई। पंजाब में पांच जिलों (बठिंडा, फरीदकोट, जालंधर, लुधियाना, रूपनगर), केरल में चार जिलों (कासरगोड, कोट्टायम, कोझिकोड, पलक्कड़) और हरियाणा (अंबाला, यमुनानगर), तमिलनाडु (चेन्नई, डिंडीगुल) तथा सिक्किम (मांगन, नामची) में भी गरीबी बढ़ी। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ के एक-एक जिले में भी उस दरम्यान गरीबी में इजाफा देखा गया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हिमांशु कहते है कि प्रवासियों की लगातार आमद के कारण इन जिलों में बहुआयामी गरीबी के शिकार लोगों का अनुपात बढ़ा हो सकता है। ये प्रवासी देश के अंदरूनी इलाकों से पलायन कर शहर आते हैं। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत के शहरों और कस्बों में भीतरी इलाकों से लोगों का आना लगा रहता है, इसलिए उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना सरकार के लिए चुनौती बन जाता है। इसलिए हमें शहरी गरीबी की ओर ध्यान देना चाहिए, जिस पर नीति निर्माताओं को ध्यान नहीं के बराबर है।’

Also read: भारत और ब्रिटेन में FTA को लेकर 11वें दौर की बातचीत पूरी

चौथे और पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के बीच के आंकड़े बताते हैं कि इस बीच मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले में बहुआयामी गरीब आबादी का अनुपात सबसे अधिक बढ़ गया। पहले इनकी आबादी 39.6 फीसदी थी मगर पांचवें सर्वेक्षण तक यह बढ़कर 52.5 फीसदी हो गई। इसके बाद बीजापुर, उत्तरी दिल्ली, फरीदकोट और बठिंडा जिलों में गरीबों की आबादी सबसे अधिक बढ़ी।

First Published - July 24, 2023 | 11:02 PM IST

संबंधित पोस्ट