facebookmetapixel
Advertisement
सोने पर 15% ड्यूटी से क्या घटेगा भारत का ट्रेड डेफिसिट? जानिए क्यों इतना आसान नहीं है यह गणिततेल संकट के बीच सरकार का बड़ा दावा! 4 साल से नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दामMSCI Index में बड़ा फेरबदल! Adani Energy और MCX की एंट्री, RVNL बाहरAirtel Q4 Results: मुनाफे में 33.5% की भारी गिरावट, ₹7,325 करोड़ पर आया नेट प्रॉफिटDA Hike: सरकार का बड़ा तोहफा! रेलवे कर्मचारियों और पेंशनर्स का DA बढ़ा, सैलरी में होगा सीधा असरस्मार्ट लाइटिंग से चमकेगा भारत! 2031 तक 24 अरब डॉलर पार करेगा स्मार्ट होम मार्केटकैबिनेट का बड़ा फैसला, नागपुर एयरपोर्ट बनेगा वर्ल्ड क्लास हब; यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएंKharif MSP 2026: खरीफ फसलों की MSP में इजाफा, धान का समर्थन मूल्य ₹72 बढ़ाFMCG कंपनियों में निवेश का मौका, DSP म्युचुअल फंड के नए ETF की पूरी डीटेलUS-Iran War: चीन यात्रा से पहले ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- ‘डील करो वरना तबाही तय’

पूंजीगत वस्तुओं की फर्मों में दिख रहा दम

Advertisement
Last Updated- January 08, 2023 | 11:17 PM IST
Tata Steel
Creative Commons license

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में जारी रफ्तार से चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (वित्त वर्ष 23 की तीसरी तिमाही) में पूंजीगत वस्तुओं वाली कंपनियों के राजस्व और आय वृद्धि में सालाना आधार पर मदद मिलने की संभावना है। इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि क्रमिक रूप से राजस्व और आय के आंकड़े सुस्त नजर आ रहे हैं, लेकिन अक्टूबर-दिसंबर की अवधि के दौरान जोरदार ऑर्डर मिले हैं।

पूंजीगत वस्तुओं के बाजार पर नजर रखने वाले विश्लेषकों ने कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत की शुद्ध बिक्री वृद्धि और कर के बाद लाभ (पीएटी) में 10.3 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। इसमें बीएस रिसर्च ब्यूरो द्वारा संकलित की गई 25 शीर्ष कंपनियों की सूची में लार्सन ऐंड टुब्रो (एल ऐंड टी), थर्मेक्स, एबीबी, सीमेंस और केईसी इंटरनैशनल शामिल हैं।

बीएस रिसर्च के आंकड़ों से पता चलता है कि तिमाही आधार पर राजस्व और कर के बाद लाभ वृद्धि दोनों ही इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए 3.3 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर एबिटा में क्रमिक आधार पर 5.9 प्रतिशत की गिरावट नजर आने के आसार हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि एक साल पहले की अवधि की तुलना में एबिटा में 13.3 प्रतिशत वृद्धि नजर आने के आसार हैं।

केईसी इंटरनैशनल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विमल केजरीवाल कहते हैं ‘पानी, रेलवे, पारेषण और वितरण जैसे क्षेत्रों में निविदा गतिविधि मजबूत बनी हुई हैं।’ वह कहते हैं कि साथ ही साथ निजी पूंजीगत व्यय की गतिविधि भी जोर पकड़ रही है।

एलऐंडटी के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक एसएन सुब्रह्मण्यन ने कर्मचारियों को नए साल के अपने संबोधन में कहा था कि कंपनी के पास अब तक के सबसे ज्यादा बचे हुए ऑर्डर हैं, जो सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा दमदार निविदा गतिविधि की ओर संकेत करते हैं।

यह भी पढ़ें: पश्चिमी भारत में पैठ बढ़ाएगी लाल पैथलैब्स

सुब्रह्मण्यन ने कहा ‘सरकार ने प्रमुख बुनियादी ढांचा पूंजीगत व्यय शुरू किया है।’ उन्होंने कहा कि पीएलआई योजनाओं की शुरुआत और कारोबार सुगमता जैसे सक्रिय कदमों ने वृद्धि का सकारात्मक माहौल तैयार किया है।

मुंबई की ब्रोकर एलारा कैपिटल के विश्लेषक हर्षित कपाड़िया और मुदित काबरा के अनुसार दिसंबर तिमाही में पूंजीगत वस्तुओं वाली कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर इस क्षेत्र में आठ साल में सबसे अधिक रहे। कपाड़िया और काबरा ने 4 जनवरी की अपनी रिपोर्ट में कहा कि पूंजीगत वस्तुओं वाली प्रमुख कंपनियों ने वित्त वर्ष 23 की तीसरी तिमाही के दौरान 41,500 करोड़ के संचयी ऑर्डर की घोषणा की है। सालाना आधार पर यह 240 प्रतिशत की वृद्धि है, जो आठ साल में सबसे अधिक तिमाही दर है।

Advertisement
First Published - January 8, 2023 | 11:17 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement