Rural Economy boom: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी देखी जा रही है। बीते एक साल के दौरान ज्यादातर ग्रामीण परिवारों की खरीद बढ़ी है। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की खपत में इजाफा हुआ है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उछाल की मुख्य वजह जीएसटी दरों का तर्कसंगत होने के साथ ही ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आशावाद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। जिससे आगे भी इस अर्थव्यवस्था में तेजी आने की संभावना है।
नाबार्ड सितंबर 2024 से ग्रामीण आर्थिक स्थितियां व भावनाओं पर सर्वेक्षण करता है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि नाबार्ड द्वारा जारी आठवें ग्रामीण आर्थिक स्थितियां व भावनाएं सर्वेक्षण (RECSS) ने ग्रामीण भारत में व्यापक आर्थिक सुधार और तेज होती खपत की स्पष्ट तस्वीर पेश की है। इस सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण भारत में खपत, आय, निवेश, वित्तीय व्यवहार और सेवाओं की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जबकि महंगाई को लेकर चिंताएं एक वर्ष के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि सितंबर 2024 से नवंबर 2025 तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूत सुधार हुआ है। इस दौरान 80 फीसदी परिवारों की खरीद बढ़ी है। साथ ही लगभग 80 फीसदी ग्रामीण परिवारों ने पिछले एक वर्ष में अधिक खपत दर्ज की।
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नाबार्ड के सर्वेक्षण में कहा गया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इस तेजी की वजह ग्रामीण परिवारों की आय में तेज वृद्धि होना है। बीते एक साल के दौरान 42.2 फीसदी ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सिर्फ 15.7 फीसदी ने आय घटने की बात कही, जो अब तक का न्यूनतम स्तर है। ग्रामीण परिवारों की 67.3 फीसदी मासिक आय अब उपभोग पर खर्च हो रही है, यह सर्वेक्षण शुरू होने के बाद से सबसे ज्यादा है। इसमें जीएसटी दरों में सुधार का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
बीते एक साल के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आई मजबूती आगे भी जारी रहने की संभावना है। नाबार्ड के इस सर्वेक्षण के मुताबिक आशावाद रिकॉर्ड स्पर पहुंच गया है और भविष्य की संभावनाएं काफी मजबूत नजर आ रही हैं। सर्वेक्षण में 75.9 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि उनकी आय अगले वर्ष बढ़ेगी, जो सितंबर 2024 के बाद से सबसे ऊंचे स्तर का आशावाद है।
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पिछले वर्ष की तुलना में 29.3 प्रतिशत परिवारों में पूंजी निवेश में वृद्धि देखी गई है जो पिछले किसी भी चरण में अधिक है। यह कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में संपत्ति सृजन में नई तेजी को दर्शाता है। निवेश में यह तेजी मजबूत उपभोग और आय में वृद्धि के कारण है, न कि ऋण संकट के कारण। औपचारिक स्रोतों से ग्रामीण ऋण की पहुंच उच्चतम स्तर तक पहुंच गई है। इस सर्वेक्षण के अनुसार 58.3 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों ने केवल औपचारिक ऋण स्रोतों का ही उपयोग किया है जो कि अब तक के सभी सर्वेक्षणों में अब तक का सबसे उच्च स्तर है। सितंबर 2024 में यह 48.7 प्रतिशत था। हालांकि अनौपचारिक ऋण का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत है जो यह दर्शाता है कि औपचारिक ऋण की पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता है।
सरकार द्वारा दी जा रही हैं विभिन्न सब्सिडी योजनाओं से भी ग्रामीण परिवारों को काफी मदद मिल रही है। औसत मासिक आय का 10 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी वाले भोजन, बिजली, पानी, खाना पकाने की गैस, उर्वरक, स्कूल सहायता, पेंशन, परिवहन लाभ और अन्य कल्याणकारी हस्तांतरणों के माध्यम से पूरा हो रहा है। कुछ परिवारों के लिए मासिक सब्सिडी राशि कुल आय के 20 प्रतिशत से अधिक तक होती है जो ग्रामीण मांग को स्थिर करने में मदद करती है।
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महंगाई संबंधी धारणाएं एक वर्ष में अपने सबसे निचले स्तर पर है। इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि महंगाई के बारे में औसत धारणा घटकर 3.77 प्रतिशत हो गई। सर्वेक्षण शुरू होने के बाद यह पहली बार 4 प्रतिशत से नीचे आई है। 84.2 प्रतिशत लोगों का मानना है कि महंगाई 5 प्रतिशत या उससे कम रहेगी और लगभग 90 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि निकट भविष्य में महंगाई 5 प्रतिशत से नीचे ही रहेगी। महंगाई में कमी से वास्तविक आय में वृद्धि हुई है। जिससे क्रय शक्ति में सुधार आया। कम महंगाई और ब्याज दरों में नरमी के साथ ऋण चुकाने के लिए आवंटित आय का हिस्सा पहले के दौर की तुलना में कम हो गया है। सर्वेक्षण के मुताबिक 29.3 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में पिछले वर्ष के दौरान पूंजी निवेश में वृद्धि हुई है जो सभी सर्वेक्षणों में उच्चतम है।