भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में एक नया सवेरा होने जा रहा है। मंगलवार को होने वाला भारत-EU शिखर सम्मेलन न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि सुरक्षा और रक्षा के लिहाज से भी ऐतिहासिक साबित होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ मिलकर इस नई साझेदारी की नींव रखेंगे।
खास बात यह है कि यह समिट ऐसे समय में हो रही है जब 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कर्तव्य पथ पर EU के सैन्य दस्ते की भागीदारी ने पहले ही साफ कर दिया था कि दोनों पक्षों के बीच अब सैन्य तालमेल काफी गहरा होने वाला है।
भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं, लेकिन अब इस रिश्ते को एक नई ऊंचाई देने की तैयारी है। इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) यानी मुक्त व्यापार समझौता है। वॉन डेर लेयेन के मुताबिक, यह एक ‘ऐतिहासिक व्यापार समझौता’ है जो करीब 200 करोड़ लोगों का एक विशाल बाजार तैयार करेगा। यह बाजार दुनिया की कुल GDP का लगभग एक-चौथाई हिस्सा होगा।
बता दें कि इस व्यापार समझौते की राह इतनी आसान नहीं रही है। इसके लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में कुछ मतभेदों के चलते इसे रोक दिया गया था। लगभग 9 साल के लंबे इंतजार के बाद जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू हुई और अब मंगलवार को इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविच ने भी संकेत दिए हैं कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार के नए द्वार खोलेगा।
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व्यापार के अलावा इस समिट का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ ‘सुरक्षा और रक्षा साझेदारी’ (SDP) है। यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ की सेनाओं के बीच तालमेल (Interoperability) बढ़ाएगा। इसके जरिए भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ के ‘सेफ’ (SAFE – Security Action for Europe) कार्यक्रम में शामिल होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
‘सेफ’ यूरोपीय संघ का 150 अरब यूरो का एक विशाल फंड है, जिसे सदस्य देशों की रक्षा तैयारियों को तेज करने के लिए बनाया गया है। भारत के इस प्रोग्राम से जुड़ने का मतलब है कि रक्षा क्षेत्र में तकनीक और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही दोनों पक्ष ‘सिक्योरिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन एग्रीमेंट’ (SOIA) पर भी बातचीत शुरू करेंगे, जिससे औद्योगिक रक्षा सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
इस समिट में आम भारतीयों के लिए भी एक बड़ी खुशखबरी छिपी है। भारत और EU के बीच ‘मोबिलिटी फ्रेमवर्क’ यानी प्रवासन और आवाजाही से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। यह फ्रेमवर्क भारतीय पेशेवरों और कामगारों के लिए यूरोप के विभिन्न देशों में जाकर काम करने की प्रक्रिया को सरल बनाएगा।
वैसे तो भारत के फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों के साथ पहले से ही ऐसे समझौते हैं, लेकिन अब पूरे यूरोपीय संघ के स्तर पर इस तरह की व्यवस्था होने से भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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आज की बदलती दुनिया में, विशेषकर वाशिंगटन की व्यापार और सुरक्षा नीतियों में आ रहे बदलावों के बीच भारत और यूरोपीय संघ का करीब आना काफी अहम माना जा रहा है। समिट में रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। हालांकि दोनों पक्षों के कुछ मुद्दों पर अलग विचार हो सकते हैं, लेकिन वे अंतरराष्ट्रीय नियम-कायदों और स्थिरता बनाए रखने के साझा लक्ष्य पर एकमत हैं।
यूरोपीय नेताओं का मानना है कि एक सफल और समृद्ध भारत पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए जरूरी है। इसी सोच के साथ अब दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण तकनीकों और वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं।
(PTI के इनपुट के साथ)