facebookmetapixel
Advertisement
PM Kisan की 24वीं किस्त कब आएगी? जानें संभावित तारीख, पात्रता और e-KYC की पूरी जानकारीदेश भर में फिर सक्रिय हुआ मॉनसून, दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारीपश्चिम एशिया में जंग फिर तेज: अमेरिका ने खार्ग द्वीप के पास ईरानी जहाजों को बनाया निशाना, ईरान ने भी दी चेतावनी4000 लोगों की जा सकती है नौकरी! JLR बड़ी छंटनी की तैयारी में, बढ़ते खर्च से कंपनी परेशानसुभाष चंद्रा की बढ़ीं मुश्किलें: CBI ने दर्ज की FIR, फर्जी कागज दिखाकर ₹1,322 करोड़ के फ्रॉड का आरोपएक शेयर पर ₹60 का मोटा डिविडेंड! पावर ट्रांसमिशन सेक्टर से जुड़ी कंपनी का तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्सNPS में ‘नो मिनिमम इन्वेस्टमेंट’ का क्या है सच? एक्सपर्ट से समझें, किसे मिलेगा फायदा और किसे नहींटाटा मोटर्स खरीदेगी इटली की मशहूर इवेको ग्रुप, €3.82 अरब की डील से ग्लोबल मार्केट में बढ़ेगा दबदबामोटी कमाई का चांस! अगले हफ्ते लगभग 150 कंपनियां देंगी डिविडेंड, एक शेयर पर ₹60 तक कमाने का मौकाजन्माष्टमी पर बाजारों में बंपर खरीदारी की उम्मीद, 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के व्यापार का अनुमान

सुरक्षित निवेश और कम सप्लाई: क्यों सोने की कीमत लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है?

Advertisement

भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार की अनिश्चितता और अमेरिकी फेड की दरों में कटौती की उम्मीद से सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया है

Last Updated- January 26, 2026 | 5:58 PM IST
Gold
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आजकल लाखों लोग सोना खरीद रहे हैं, चाहे वो शादी के लिए ज्वेलरी हो, लंबी बचत का तरीका या फिर अनिश्चितता से बचने का सहारा। लेकिन इन दिनों सोने का दाम इतना डरावना हो गया है कि हर कोई हैरान है। परिवार वाले शादी की खरीदारी सोच रहे हैं, तो निवेशक रोजाना के रेट पर नजर रखे हुए हैं। सोने ने पहली बार 5 हजार डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा छुआ है, और 2025 में ये 60 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। ये तेजी दुनिया की राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक अस्थिरता और निवेशकों के बदलते रुझान की वजह से हो रही है। बाजार में हलचल मची हुई है, और सोना अब हर किसी की जुबान पर है।

राजनीतिक तनाव और अमेरिकी नीतियां सोने की चमका का कारण

दुनिया में जहां-तहां तनाव बढ़ रहा है, और ये सीधे सोने के दाम पर असर डाल रहा है। अमेरिका और नाटो के बीच ग्रीनलैंड को लेकर खींचतान चल रही है, जिससे बाजार में अनिश्चितता फैल गई है। लोग ऐसे में सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर भाग रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को धमकी दी है कि अगर वो चीन के साथ कोई व्यापार समझौता करता है, तो उस पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। ये बातें व्यापार नीतियों को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं।

सोने की ये रैली यूक्रेन और गाजा में चल रहे युद्धों से शुरू हुई, जो निवेशकों के मन में अब भी भारी हैं। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो के खिलाफ कदम उठाए हैं, जो वैश्विक अस्थिरता को और हवा दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थितियों में निवेशक सोने की शरण लेते हैं, क्योंकि इसे अनिश्चितता के दौर में ‘सुरक्षित आश्रय’ माना जाता है। ये सब मिलकर सोने को ऊपर की ओर धकेल रहे हैं।

Also Read: Budget 2026 से इंश्योरेंस सेक्टर को टैक्स में राहत की उम्मीद, पॉलिसीधारकों को मिल सकता है सीधा फायदा!

अनिश्चितता में सोना क्यों बन जाता है निवेशकों का सहारा?

सोना एक ऐसा निवेश है जो ‘सुरक्षित बंदरगाह’ की तरह काम करता है। इसका मूल्य किसी सरकार या कंपनी की आर्थिक स्थिति या कर्ज पर निर्भर नहीं करता, जैसे बॉन्ड या शेयर होते हैं। ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक, सोना रखना मतलब किसी और के कर्ज से दूर रहना। शेयर में कंपनी की परफॉर्मेंस गिरेगी, तो नुकसान होगा, लेकिन सोने में ऐसा नहीं। ये अनिश्चित दुनिया में विविधता लाने का बढ़िया तरीका है।

इसी वजह से सोना 1979 के बाद का अपना सबसे मजबूत सालाना लाभ दर्ज कर रहा है। निवेशक उन संपत्तियों से दूर जा रहे हैं जो नीतिगत झटकों या बाजार की अस्थिरता से प्रभावित हो सकती हैं। जब दुनिया में उथल-पुथल मचती है, तो सोना चमकने लगता है, और लोग इसे पकड़ लेते हैं।

ब्याज दरें और महंगाई सोने को और आकर्षक बना रही हैं

ब्याज दरों की उम्मीदें भी सोने के दाम को सहारा दे रही हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल दो बार अपनी मुख्य ब्याज दर में कटौती करने वाला है, जैसा कि बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है। जब दरें कम होती हैं, तो सरकारी बॉन्ड जैसे संपत्तियों से रिटर्न घट जाता है। ऐसे में सोना, जो कोई ब्याज नहीं देता, फिर भी ज्यादा आकर्षक लगने लगता है। अभी अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ रहा है, और महंगाई सामान्य से ऊपर है, जिससे निवेशक सोने को सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं।

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, पिछले साल उन्होंने सैकड़ों टन सोना अपने भंडार में जोड़ा। ये अमेरिकी डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश है, जो सोने की मांग को स्थिर रख रही है। निवेशकों की खरीदारी के साथ ये ट्रेंड सोने को मजबूती दे रहा है।

Also Read: सोने ने रचा इतिहास: 5,000 डॉलर के पार पहुंची कीमत; वैश्विक तनाव के चलते निवेशकों का बढ़ा भरोसा

सोने की सीमित उपलब्धता और सांस्कृतिक मांग

सोने की तेजी के पीछे एक बड़ा कारण उसकी भौतिक कमी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल बताता है कि अब तक दुनिया में करीब 2 लाख 16 हजार 265 टन सोना खोदा गया है, जो तीन-चार ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल भर सकता है। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे का अनुमान है कि जमीन के नीचे अभी 64 हजार टन बाकी है, लेकिन आने वाले सालों में उत्पादन स्थिर हो जाएगा।

मांग की बात करें, तो सांस्कृतिक और मौसमी फैक्टर भी अहम हैं। भारत में दिवाली जैसे त्योहारों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय घरों में 3.8 ट्रिलियन डॉलर का सोना है, जो देश की जीडीपी का लगभग 89 फीसदी है। चीन, जो सोने का सबसे बड़ा बाजार है, लूनर न्यू ईयर के आसपास ज्यादा खरीदारी करता है, जहां इसे सौभाग्य से जोड़ा जाता है।

Advertisement
First Published - January 26, 2026 | 5:58 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement