डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का रुख बना हुआ है। चालू वित्त वर्ष में अभी तक रुपये में 7.05 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। रुपये की चाल पर बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में अर्थशात्रियों ने अनुमान लगाया है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक रुपया 92.50 प्रति डॉलर के आसपास रह सकता है।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देर और विदेशी पूंजी की निकासी की वजह से पिछले सप्ताह रुपये में तेज गिरावट आई और यह 92 प्रति डॉलर के स्तर के करीब आ गया।
आरबीएल बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री अनीता रंगन ने कहा, ‘फिलहाल भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और वैश्विक अनिश्चितता के बीच हमें अगले दो महीनों में निवेश वापस आने की संभावना नहीं दिख रही है।’ उन्होंने कहा, ‘साल की दूसरी छमाही में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भू-राजनीतिक तनाव को कम कर सकते हैं और अनिश्चितता कम होने से भारत में विदेशी निवेश लौट सकता है।’
सर्वेक्षण के अनुसार अधिकांश प्रतिभागियों को उम्मीद है कि जून के अंत तक रुपया 90 प्रति डॉलर के करीब रह सकता है।
लगातार विदेशी पूंजी की निकासी और आयातकों के बीच डॉलर की मांग के कारण बीते शुक्रवार को रुपया लुढ़ककर 91.96 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर आ गया था। रुपये में 0.36 फीसदी की गिरावट आई और सभी एशियाई मुद्राओं में उसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा था।
एसटीसीआई प्राइमरी डीलर के मुख्य अर्थशास्त्री आदित्य व्यास ने कहा, ‘रुपये में गिरावट मुख्य रूप से निवेश निकाले जाने और निवेशकों का हौसला कमजोर रहने से
आई। आरईईआर/एनईईआर जैसे अन्य आंकड़ों को देखते हुए आगे गिरावट धीमी हो सकती है। साथ ही साल के दौरान किसी भी समय पर रुपया अच्छी वापसी भी कर सकता है।’ दिसंबर 2025 में भारतीय रुपये की वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) 95.30 थी, जो नवंबर 2025 में 97.52 थी।
कुछ प्रतिभागियों ने मार्च के अंत तक अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की संभावना जताई है। उनका मानना है कि इससे चालू वित्त वर्ष के अंत तक रुपया सुधरकर करीब 90 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट ने भारत पर लगाए गए 50 फीसदी शुल्क में से 25 फीसदी वापस लेने का संकेत दिया है क्योंकि देश ने रूस से तेल की खरीद में काफी कटौती की है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि मार्च 2026 तक अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही भुगतान संतुलन का घाटा मार्च 2026 में मौसमी कारकों के कारण कम होने की संभावना है जिससे रुपये को अस्थायी राहत मिलेगी।’
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘मार्च के बाद हमें वित्त वर्ष 2027 में भी भुगतान संतुलन के ऋणात्मक रहने के साथ गिरावट का दबाव बने रहने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2027 में घाटा वित्त वर्ष 2026 की तुलना में कम होगा क्योंकि नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर अधिक होगी। इससे पूंजी निवेश का प्रवाह बढ़ेगा।’
प्रतिभागियों ने कहा कि व्यापार समझौता अभी भी दूर होने के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत को लेकर अंडरवेट बने हुए हैं, जिससे रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में गिरावट की गति को कम करने के लिए कदम उठा सकता है लेकिन जब तक अंतर्निहित संरचनात्मक कारकों में सुधार नहीं होता तब तक वह मुद्रा की चाल को नहीं बदल सकता।
आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, ‘हमारा मानना है कि रुपया काफी हद तक व्यापार करार के आसपास होने वाली घटनाओं से प्रभावित होगा।’
डॉलर के मुकाबले रुपया 2025 में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा थी और जनवरी में भी अब तक ऐसा ही है। केंद्रीय बैंक किसी भी अनुचित अस्थिरता को रोकने के लिए मुद्रा बाजार में दखल देता रहा है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 701 अरब पर है जो 705 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब है।