Silver Price Outlook: चांदी की कीमतों में हालिया तेज उछाल ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। बाजार में चांदी फिर चर्चा में है और ETF में बढ़ती दिलचस्पी ने इस चमक को और तेज कर दिया है। लेकिन इस तेजी के बीच एक सवाल भी खड़ा हो रहा है, क्या यह मौका है या जोखिम का जाल। Edelweiss म्युचुअल फंड की रिपोर्ट और टाटा एसेट मैनेजमेंट के कमोडिटी फंड मैनेजर तपन पटेल की राय इसी सवाल का जवाब देती है।
Edelweiss म्युचुअल फंड की रिपोर्ट बताती है कि सोना और चांदी सदियों से इंसानी सभ्यता का हिस्सा रहे हैं। पहले ये पूजा और मुद्रा के रूप में इस्तेमाल हुए, फिर निवेश और सुरक्षित ठिकाने बने। आज के दौर में भी जब बाजारों में डर बढ़ता है, तो निवेशक सबसे पहले इन्हीं की ओर देखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सोना जहां संकट के समय सुरक्षा देता है, वहीं चांदी की खासियत यह है कि वह निवेश के साथ साथ उद्योग की जरूरत भी पूरी करती है।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि चांदी सिर्फ एक कीमती धातु नहीं है। इसका करीब आधा इस्तेमाल उद्योगों में होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और नई तकनीक में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि जब भी कीमती धातुओं में तेजी आती है, चांदी अक्सर सोने से तेज भागती है। लेकिन यही तेजी इसे ज्यादा उतार चढ़ाव वाला निवेश भी बना देती है।
हाल के दिनों में चांदी के ETF में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। कुछ ETF अपने असली मूल्य से ज्यादा प्रीमियम पर ट्रेड करने लगे। टाटा एसेट मैनेजमेंट में कमोडिटी फंड मैनेजर तपन पटेल का कहना है कि ज्यादा मांग, सीमित सप्लाई और टैरिफ से जुड़ी आशंकाएं कई बार ETF की कीमत को उसकी असली वैल्यू से अलग कर देती हैं। यह स्थिति स्थायी नहीं होती, लेकिन जल्दबाजी में निवेश करने वालों के लिए नुकसान का कारण बन सकती है।
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तपन पटेल का साफ कहना है कि चांदी रिटर्न बढ़ाने की ताकत जरूर रखती है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक अस्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक चांदी को फिलहाल मुख्य सुरक्षा कवच की तरह नहीं, बल्कि रणनीतिक या सीमित हिस्से के रूप में देखना बेहतर है। वह निवेशकों को तेजी के पीछे भागने से बचने और धीरे धीरे निवेश करने की सलाह देते हैं।
Edelweiss की रिपोर्ट और तपन पटेल दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि गोल्ड और सिल्वर का संतुलन बेहद अहम है। गोल्ड सिल्वर रेशियो जब 50 के आसपास आता है, तो यह संकेत हो सकता है कि चांदी में तेजी काफी हद तक आ चुकी है। ऐसे में कुछ मुनाफा निकालकर सोने जैसे अपेक्षाकृत स्थिर विकल्पों में शिफ्ट करना समझदारी हो सकती है।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जब शेयर बाजार गिरता है, तब सोना अक्सर निवेशकों को बचाता है। वहीं चांदी तेजी के दौर में ज्यादा रिटर्न दे सकती है। दोनों को साथ रखने से पोर्टफोलियो का उतार चढ़ाव कम होता है और लंबी अवधि में संतुलन बना रहता है
Edelweiss म्युचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक सोना और चांदी में बराबर हिस्सेदारी और समय समय पर रीबैलेंसिंग से जोखिम को काफी हद तक काबू किया जा सकता है। SIP के जरिए निवेश करने से कीमतों के उतार चढ़ाव का असर औसत हो जाता है और निवेशक भावनाओं में बहकर गलत फैसले लेने से बचता है