facebookmetapixel
Gold-Silver Outlook: सोना और चांदी ने 2025 में तोड़े सारे रिकॉर्ड, 2026 में आ सकती है और उछालYear Ender: 2025 में आईपीओ और SME फंडिंग ने तोड़े रिकॉर्ड, 103 कंपनियों ने जुटाए ₹1.75 लाख करोड़; QIP रहा नरम2025 में डेट म्युचुअल फंड्स की चुनिंदा कैटेगरी की मजबूत कमाई, मीडियम ड्यूरेशन फंड्स रहे सबसे आगेYear Ender 2025: सोने-चांदी में चमक मगर शेयर बाजार ने किया निराश, अब निवेशकों की नजर 2026 पर2025 में भारत आए कम विदेशी पर्यटक, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया वीजा-मुक्त नीतियों से आगे निकलेकहीं 2026 में अल-नीनो बिगाड़ न दे मॉनसून का मिजाज? खेती और आर्थिक वृद्धि पर असर की आशंकानए साल की पूर्व संध्या पर डिलिवरी कंपनियों ने बढ़ाए इंसेंटिव, गिग वर्कर्स की हड़ताल से बढ़ी हलचलबिज़नेस स्टैंडर्ड सीईओ सर्वेक्षण: कॉरपोरेट जगत को नए साल में दमदार वृद्धि की उम्मीद, भू-राजनीतिक जोखिम की चिंताआरबीआई की चेतावनी: वैश्विक बाजारों के झटकों से अल्पकालिक जोखिम, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूतसरकार ने वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत दी, ₹87,695 करोड़ के AGR बकाये पर रोक

ब्याज दरों में कटौती मॉनेटरी पॉलिसी पर निर्भर

अक्टूबर, 2024 में महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर 6.21 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा पार कर गई है।

Last Updated- November 19, 2024 | 10:09 PM IST
Is the stock market ready to delay the interest rate cut? Analysts gave their opinion क्या ब्याज दर कटौती में देरी के लिए शेयर बाजार है तैयार? एनालिस्ट्स ने दी राय

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बैंकों से ब्याज दरें कम करने की अपील फिलहाल मूर्त रूप लेती नजर नहीं आ रही है। बैंकों का कहना है कि वे इस समय मुनाफे पर दबाव का सामना कर रहे हैं और वे भारतीय रिजर्व बैंक के नकदी को लेकर रुख और नीतिगत कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) वी टोंस ने संकेत दिया कि ब्याज में कटौती अभी भी कुछ दूर है। उन्होंने कहा कि जमा दरों को लेकर बाजार में अभी भी कुछ आक्रामकता है। साथ ही महंगाई दर (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) में वृद्धि ने ब्याज दरों के दृष्टिकोण को प्रभावित किया है।

अक्टूबर, 2024 में महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर 6.21 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा पार कर गई है।

टोंस ने कहा कि उधारी पर ब्याज दर को लेकर भविष्य की कार्रवाई तय करने के लिए बैंक, मौद्रिक नीति को लेकर रुख और नीतिगत दर कार्रवाई पर ध्यान देंगे। टोंस ने कार्यक्रम के दौरान अलग से बातचीत करते हुए यह कहा, जो स्टेट बैंक का खुदरा कारोबार और परिचालन का काम देखते हैं।

खुदरा ऋण और छोटी उधारी पर ब्याज दर तय करने के लिए ज्यादातर बैंक नीतिगत रीपो रेट को बाहरी बेंचमार्क मानते हैं। कॉर्पोरेट ऋण, धन की सीमांत लागत पर आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) से जुड़े होते हैं।

अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने रुख बदलकर तटस्थ कर दिया था। इससे मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक में रीपो रेट में कटौती की उम्मीद बढ़ गई थी।

अक्टूबर में ज्यादा महंगाई दर रहने के नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद धूमिल हुई है। मई 2022 और फरवरी 2023 के बीच नीतिगत रीपो रेट में 250 आधार अंक की बढ़ोतरी के बाद अब रिजर्व बैंक ने इसे 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।

इस माह की शुरुआत में दूसरी तिमाही के परिणाम के बाद विश्लेषकों से बातचीत में स्टेट बैंक के अधिकारियों ने कहा था कि जमा पर ब्याज दरें शीर्ष पर हैं, लेकिन ऋण पर यील्ड में सुधार होगा, क्योंकि बैंक ने एमसीएलआर दरें बढ़ाई हैं।

सोमवार को एसबीआई कॉन्क्लेव बोलते हुए सीतारमण ने कहा था कि सरकार चाहती है कि उद्योग अपनी क्षमता बढ़ाएं और उन्होंने ऐसे समय में बैंकों से ब्याज दरें कम करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि इस समय उधारी की बहुत ज्यादा दर तनाव पैदा करने वाली है।

सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के मुख्य वित्त अधिकारी ने कहा कि ऋण की दर में कटौती इस वित्त वर्ष के आखिर या अगले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2026) की शुरुआत से संभव है।

First Published - November 19, 2024 | 10:01 PM IST

संबंधित पोस्ट