facebookmetapixel
Advertisement
ऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेज

मजबूत GDP के बाद रीपो दर में कटौती की गुंजाइश कम, RBI MPC का लि​क्विडिटी पर रहेगा फोकस: BS Poll

Advertisement

RBI MPC Meeting: मौद्रिक नीति समिति ने जून में रीपेा दर में 50 आधार अंक की कटौती की थी मगर उसके बाद दो बैठकों में दर में कोई बदलाव नहीं किया गया

Last Updated- December 01, 2025 | 9:59 AM IST
Reserve Bank of India
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय ​रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की 3 से 5 दिसंबर को होने वाली बैठक में रीपो दर में बदलाव की उम्मीद नहीं है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वेक्षण (BS Poll) में शामिल ज्यादातर प्रतिभागियों ने कहा कि मौ​द्रिक नीति का रुख तटस्थ के साथ नरम बना रहेगा। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मजबूत आंकड़े को देखते हुए मौद्रि​क नीति समिति दर यथावत रख सकती है।

भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आ​र्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘कुछ दिन पहले तक रीपो में 25 आधार अंक की कटौती की उम्मीद की जा रही थी मगर अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है। दूसरी तिमाही में वृद्धि दर के मजबूत आंकड़ों से दर यथावत रखने का निर्णय हो सकता है।’

मौद्रिक नीति समिति ने जून में रीपेा दर में 50 आधार अंक की कटौती की थी मगर उसके बाद दो बैठकों में दर में कोई बदलाव नहीं किया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि आरबीआई यथा​स्थिति बनाए रख सकता है क्योंकि ढील देने की गुंजाइश कम है।

मौजूदा स्थिति बनाए रखेगा रिजर्व बैंक

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘आरबीआई से उम्मीद है कि वह मौजूदा स्थिति बनाए रखेगा क्योंकि ढील देने की गुंजाइश कम है और ऐसा तब किया जाना चाहिए जब तक कि वृद्धि दर में गिरावट का खतरा न हो।’

उन्होंने जमा वृद्धि को बढ़ावा देने का इशारा करते हुए कहा, ‘मौद्रिक नीति की असली चुनौती यह पुख्ता करना है कि जब जमा वृद्धि 10 फीसदी से नीचे हो तो बैंकिंग तंत्र 11-12 फीसदी ऋण वृद्धि का समर्थन कर सके। ऋण-जमा अनुपात 80 फीसदी के ऐतिहासिक उच्च स्तर के करीब बना हुआ है।’

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में इंडिया इकनॉमिक्स शोध प्रमुख अनुभूति सहाय ने कहा, ‘वृद्धि दर मजबूत है और राजकोषीय तथा मौद्रिक प्रोत्साहन पहले ही दिया गया है। ऐसे में दर कटौती से ज्यादा जोर बैंकिंग तंत्र में नकदी बढ़ाने पर होना चाहिए।’

मौ​द्रिक नीति का रुख तटस्थ रहने की उम्मीद

अ​धिकतर अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि आरबीआई मौ​द्रिक नीति का रुख तटस्थ बनाए रखेगा लेकिन ओपन मार्केट ऑपरेशन  जैसे उपाय से तरलता बढ़ा सकता है। बैंकिंग तंत्र को चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में तरलता समर्थन की जरूरत पड़ने की उम्मीद है क्योंकि रुपये में उठापटक को थामने के लिए आरबीआई मुद्रा बाजार में तेजी से दखल दे रहा है।

ज्यादातर अर्थशास्त्रियों को मौजूदा दर कटौती चक्र के लिए टर्मिनल दर 5.25 से 5.5 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है। आरबीएल बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री अनीता रंगन ने कहा, ‘अप्रैल से पहले  दर कटौती की उम्मीद नहीं है। वैसे, फरवरी में इसकी संभावना बन सकती है।’

अ​धिकतर प्रतिभागियों को उम्मीद है कि आरबीआई चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई दर का अनुमान घटाकर 2 फीसदी कर सकता है और जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान भी बढ़ाकर 7 फीसदी से अ​धिक किया जा सकता है।

Advertisement
First Published - November 30, 2025 | 10:27 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement