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सरकारी खर्च से चमकेंगी ये 4 कंपनियां? मजबूत ऑर्डर बुक और बढ़ते मार्जिन पर ब्रोकरेज का बड़ा दांव

एचवी ट्रांसमिशन सेक्टर में 33% ऑर्डर ग्रोथ और 20% से ज्यादा मार्जिन; 12.2 लाख करोड़ के सरकारी कैपेक्स से मिलने की उम्मीद बूस्ट

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- February 26, 2026 | 9:37 AM IST

India Capex Cycle 2026: देश में पूंजीगत खर्च की कहानी इस समय दो अलग तस्वीरें दिखा रही है। एक तरफ पावर ट्रांसमिशन से जुड़ी हाई वोल्टेज (एचवी) कंपनियां रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रही हैं, तो दूसरी तरफ गैर-विद्युत औद्योगिक कंपनियां अब भी धीमी चाल से आगे बढ़ रही हैं। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की ताजा रिपोर्ट यही इशारा कर रही है कि फिलहाल कैपेक्स चक्र की असली ताकत सरकार है।

एचवी ट्रांसमिशन का ‘ड्रीम रन’ जारी

रिपोर्ट के मुताबिक एचवी ट्रांसमिशन और वितरण कंपनियों का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है। इन कंपनियों के नए ऑर्डर में सालाना आधार पर 33 प्रतिशत की बढ़त हुई है, जबकि बिक्री 39 प्रतिशत बढ़ी है। मुनाफा मार्जिन बढ़कर 20.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो पिछले साल से 5.40 प्रतिशत ज्यादा है।

सरकार की ओर से नवीकरणीय ऊर्जा और ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बड़े निवेश ने इस सेक्टर को नई रफ्तार दी है। 2022 से 2032 के बीच ट्रांसमिशन क्षेत्र में 9.15 लाख करोड़ रुपये खर्च की योजना है। इस योजना में 8 से 10 बड़े हाई वोल्टेज बिजली ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इनमें से 3 कॉरिडोर के लिए जरूरी उपकरणों का काम पहले ही तय किया जा चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2027 में नए ऑर्डर और तेजी से आ सकते हैं। साथ ही 2030 तक इस क्षेत्र में मांग ज्यादा रहने की संभावना है, जिससे कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

12.2 लाख करोड़ रुपये का इंफ्रा दांव

वित्त वर्ष 2027 के बजट में सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है, जो पहले के अनुमान से 12 प्रतिशत ज्यादा है। माना जा रहा है कि अमेरिका और यूरोप के साथ व्यापार समझौते होने पर निर्यात भी बढ़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार फैक्ट्रियों की क्षमता उपयोग दर 77.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कई सालों में सबसे ऊंचा स्तर है। आमतौर पर जब यह दर 75 प्रतिशत से ऊपर लंबे समय तक रहती है, तो निजी कंपनियां नया निवेश बढ़ाने लगती हैं।

गैर-विद्युत कंपनियां अब भी इंतजार में

हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू अब भी कमजोर है। गैर-बिजली से जुड़ी औद्योगिक कंपनियों की बिक्री में साल भर में सिर्फ करीब 9 प्रतिशत की बढ़त हुई है। उनका मुनाफा मार्जिन भी घटकर 11.7 प्रतिशत रह गया है।

हालांकि राहत की बात यह है कि इन कंपनियों को मिलने वाले नए ऑर्डर 26 प्रतिशत बढ़े हैं। यह बढ़त धातु, तेल और गैस जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ डाटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे नए क्षेत्रों से आई है।

इसके बावजूद पारंपरिक फैक्ट्री लगाने और उत्पादन बढ़ाने वाला निवेश अभी भी धीमा है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार की कर कटौती, जीएसटी सुधार, प्रोत्साहन योजनाएं और ब्याज दरों में नरमी जैसे कदम आगे चलकर निजी निवेश को बढ़ा सकते हैं, लेकिन फिलहाल तेजी कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित है।

किन शेयरों पर नजर

नुवामा ने बीएचईएल, हिताची एनर्जी, जीवीटी एंड डी और सीजी पावर को अपनी टॉप पिक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक थर्मल उपकरण और बिजली ट्रांसमिशन से जुड़ी कंपनियों में फिलहाल मजबूती बनी हुई है। हालांकि पूरे निजी क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश की तेज लहर अभी शुरू नहीं हुई है और उसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

First Published : February 26, 2026 | 9:37 AM IST