पेंशन फंड रेगुलेटर PFRDA ने NPS वात्सल्य स्कीम में कई अहम बदलाव किए हैं। अब पेंशन फंड्स को बच्चों के पेंशन खाते से जुड़ी चुनिंदा जानकारी मिलेगी और वे 100% तक इक्विटी में निवेश कर सकेंगे। इन बदलावों का मकसद स्कीम को ज्यादा जुड़ाव वाला बनाना है, ताकि बच्चों का पैसा लंबे समय में बेहतर तरीके से बढ़ सके।
डेटा शेयरिंग से निवेशकों को क्या मिलेगा?
NPS वात्सल्य 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पेंशन स्कीम है, जिसे माता-पिता चलाते हैं। PFRDA के नए सर्कुलर के तहत सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसियां अब पेंशन फंड्स के साथ कुछ तयशुदा जानकारी साझा करेंगी। इसमें माता-पिता के बारे में जानकारी, बच्चे का जेंडर और पैसे जमा करने का तरीका जैसी बातें शामिल होंगी।
पेंशनबाजार.कॉम के हेड विश्वजीत गोयल के मुताबिक, इससे फंड्स को अपने निवेशकों को बेहतर समझने में मदद मिलेगी। वे जान सकेंगे कि लोग स्कीम से कैसे जुड़े हैं और उसी हिसाब से उनसे संपर्क कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, अगर टियर-2 शहरों में माता-पिता नियमित निवेश नहीं कर रहे हैं, तो फंड्स उन्हें रिमाइंडर या वित्तीय जागरूकता से जुड़ी जानकारी भेज सकते हैं। गोयल का कहना है कि इससे बच्चों के लंबे समय के निवेश को बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।
अनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के डायरेक्टर और हेड (प्रेफर्ड) थॉमस स्टीफन इसे बड़ा बदलाव मानते हैं। उनके अनुसार, NPS अब सिर्फ एक साधारण ऑपरेशनल मॉडल नहीं रहेगा, बल्कि ज्यादा कस्टमाइज्ड और जुड़ाव बढ़ाने वाला मॉडल बनेगा। उनका कहना है कि 50-60 साल जैसे लंबे समय में अगर निष्क्रिय खातों को पहचानकर माता-पिता को दोबारा निवेश के लिए प्रेरित किया जाए, तो कंपाउंडिंग का फायदा काफी बढ़ सकता है।
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प्राइवेसी सिक्योरिटी के लिए क्या इंतजाम?
सर्कुलर में साफ कहा गया है कि डेटा का इस्तेमाल सख्त नियमों के तहत ही होगा। यह जानकारी केवल स्कीम से जुड़ी बातचीत, सर्विस और परफॉर्मेंस की समीक्षा के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और IT एक्ट 2000 का पालन करना अनिवार्य है। साथ ही पर्पस लिमिटेशन, रेगुलेटरी ऑडिट ट्रेल्स और सिस्टम लेवल एक्सेस कंट्रोल जैसे सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं।
विश्वजीत गोयल का कहना है कि अगर डेटा का गलत इस्तेमाल हुआ तो रेगुलेटर कड़ी कार्रवाई करेगा। वहीं, थॉमस स्टीफन मानते हैं कि सुरक्षा इंतजाम मजबूत हैं, लेकिन निवेशकों को डेटा लीक या जरूरत से ज्यादा टारगेटिंग के खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
100 फीसदी इक्विटी: रिस्क ज्यादा, लेकिन फायदा भी?
अब पेंशन फंड्स NPS वात्सल्य में पूरा 100 प्रतिशत तक पैसा शेयर बाजार (इक्विटी) में लगा सकते हैं। विश्वजीत गोयल के मुताबिक, छोटे बच्चों के लिए जिनके पास 15–20 साल का लंबा समय है, ज्यादा इक्विटी निवेश से बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलते हुए लंबे समय में बेहतर कंपाउंडिंग मिल सकती है। हालांकि, कम समय में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है।
थॉमस स्टीफन का कहना है कि 50-60 साल जैसे लंबे निवेश अवधि और ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता रखने वालों के लिए यह विकल्प उपयुक्त हो सकता है। उनका मानना है कि सालाना रिटर्न में सिर्फ 1–2 प्रतिशत का फर्क भी कई दशकों में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।
पैरेंट्स कैसे चुनें स्ट्रैटेजी?
माता-पिता को निवेश की अवधि, कितना जोखिम उठा सकते हैं, रणनीति कितनी पारदर्शी है, रीबैलेंसिंग कैसे होती है और फंड का पुराना प्रदर्शन कैसा रहा है, इन सभी बातों पर ध्यान देना चाहिए। थॉमस स्टीफन की सलाह है कि ज्यादा इक्विटी लंबे समय में फायदा दे सकती है, लेकिन वही रणनीति चुनें जिसे बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान भी अनुशासन के साथ जारी रख सकें।
First Published : February 25, 2026 | 4:31 PM IST