प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन प्रोफेसर एस महेंद्र देव बिज़नेस स्टैंडर्ड 'मंथन' में अपनी बात रखते हुए
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. महेंद्र देव ने भारत के 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ने के साथ तीन-सूत्रीय विकास विजन बताया। प्रो. देव ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में बिजनेस स्टैंडर्ड के महत्त्वपूर्ण सालाना कार्यक्रम बीएस मंथन में विषय ‘सुधार एजेंडा’ पर मंगलवार को चर्चा की। उन्होंने कहा कि विकास, समावेश और स्थिरता भारत के दीर्घकालिक परिदृश्य को परिभाषित करेंगे।
प्रोफेसर देव ने भारत के भविष्य के संदर्भ में कहा कि वर्ष 2047 तक देश के तीन प्रमुख विकास लक्ष्य हैं। पहला, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना है। इसके लिए निर्यात, टेक्नॉलजी, नवाचार, उत्पादकता, कुल उत्पादकता कारक और मानव पूंजी पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होगी। उन्होंने महिला श्रम बल की भागीदारी में सुधार की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
प्रोफेसर देव ने कहा, ‘भारत में महिला भागीदारी दर लगभग 35 प्रतिशत है। हालांकि विश्व औसत 50 प्रतिशत है। इसलिए हमें उस स्तर तक पहुंचना होगा।’ उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) सहित टेक्नालजी उत्पादकता और विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है। दूसरा लक्ष्य समावेश है। इसका अर्थ है कि गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करना।
प्रोफेसर देव ने दो संरचनात्मक मुद्दों की ओर भी इशारा किया जो स्वतंत्रता के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था में हैं। प्रथम, श्रम-गहन विनिर्माण की कमी है। द्वितीय, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र का कमजोर होना। उन्होंने कहा कि तीसरा लक्ष्य 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करना है।
प्रोफेसर देव ने कहा कि 2014 से सुधारों ने संरचनात्मक बदलाव का नेतृत्व किया है। यह विकसित अर्थव्यवस्था की नींव रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘इसका केंद्रीय तत्त्व राजकोषीय सुधार है।’ उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई सुधार किए हैं। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने विनिर्माण क्षेत्र की मदद की है जबकि मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने वैश्विक बाजारों तक पहुंच में सुधार किया है।
उन्होंने राज्य स्तर के सुधारों और नीति क्षेत्रों में अधिक समन्वय की जरूरत पर जोर दिया। पूंजीगत व्यय आधारभूत निर्माण को बढ़ावा देता है। इसी तरह कर और वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) में सुधार से खपत बेहतर हुई है। इससे बाजार दक्षता में सुधार होता है और वित्तीय क्षेत्र के सुधार नकदी प्रवाह को बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, ‘इन सभी सुधार एजेंडों में तालमेल है।’
प्रोफेसर देव ने वैश्विक अनिश्चितता पर कहा कि भारत वैश्विक झटकों से निपटने के लिए घरेलू स्तर पर तैयार है। उन्होंने कहा, वैश्विक उथल-पुथल से निपटने के लिए हमारी प्रतिक्रिया आत्मनिर्भर भारत है।