Indian Economy: सरकारी खजाने की चाल फिलहाल संभली हुई दिख रही है, लेकिन आने वाले महीनों में तस्वीर बदल सकती है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की ताजा रिपोर्ट में अप्रैल से दिसंबर 2025 तक केंद्र सरकार और 19 राज्यों की आय और खर्च का पूरा हिसाब सामने रखा गया है। रिपोर्ट बताती है कि कमाई की रफ्तार बहुत तेज नहीं है, जबकि खर्च का दबाव आगे बढ़ सकता है।
इस दौरान केंद्र और राज्यों का कुल टैक्स कलेक्शन 7.5 प्रतिशत बढ़ा। केंद्र का टैक्स 5.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि राज्यों का 9.3 प्रतिशत। कुल राजस्व खर्च 5.8 प्रतिशत बढ़ा। केंद्र का खर्च केवल 1.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि राज्यों का 7.7 प्रतिशत। लेकिन कर्ज पर ब्याज भुगतान 12.7 प्रतिशत बढ़ गया। इसका मतलब है कि सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज चुकाने में जा रहा है।
एक राहत की बात यह है कि पूंजीगत खर्च 15 प्रतिशत बढ़ा। यानी सड़क, रक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे विकास कार्यों पर सरकार ने खर्च बढ़ाया है। इससे साफ है कि विकास की रफ्तार बनाए रखने की कोशिश जारी है।
अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान संयुक्त राजकोषीय घाटा 56.2 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 58 प्रतिशत से कम है। इससे संकेत मिलता है कि अभी तक सरकार ने वित्तीय संतुलन बनाए रखा है।
राज्यों का टैक्स राजस्व 9.3 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन गैर कर आय 3.9 प्रतिशत घट गई। इसके बावजूद राज्यों ने पूंजीगत खर्च 14.9 प्रतिशत बढ़ाया। हालांकि उनका राजकोषीय घाटा बढ़कर 58.5 प्रतिशत तक पहुंच गया।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का अनुमान है कि चौथी तिमाही में टैक्स राजस्व करीब 11 प्रतिशत बढ़ सकता है। लेकिन पूंजीगत खर्च की रफ्तार घटकर लगभग 3.7 प्रतिशत रह सकती है। वहीं राजस्व खर्च 15.3 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
यानी आने वाले महीनों में सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी। कमाई बढ़ाने और खर्च संभालने के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। अब सबकी नजर चौथी तिमाही पर टिकी है, जहां सरकार की आर्थिक मजबूती की असली परीक्षा होगी।