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BS Manthan में बोलीं सीतारमण: द्विपक्षीय जरूरतों के हिसाब से बीआईटी मॉडल में बदलाव

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब निवेश सुरक्षा समझौते पर बातचीत द्विपक्षीय जरूरतों के हिसाब से हो रही है और इसके मुताबिक कई देशों के साथ समझौते हुए हैं

Last Updated- February 25, 2026 | 10:51 PM IST
FM Nirmala Sitharaman
बिज़नेस स्टैंडर्ड के मंथन समिट में अपनी बात रखतीं हुई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत अपनी आदर्श द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) की रूपरेखा से आगे निकल गया है और अब निवेश सुरक्षा समझौते पर बातचीत बहुत प्रगतिशील हो गई है। उन्होंने कहा कि अब भारत द्विपक्षीय जरूरतों की मांग के हिसाब से रूपरेखा में बदलाव करता है। बिज़नेस स्टैंडर्ड मंथन कार्यक्रम में सीतारमण ने एके भट्टाचार्य के साथ बातचीत में कहा कि भारत अभी भी खुद को 2016 मॉडल पर ही मानता है, लेकिन ऐसे बदलाव पारदर्शी तरीके से किए गए थे और इन्हें कैबिनेट की मंजूरी मिली थी। इसकी वजह से भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब से निवेश समझौते कर पाया।

वित्त मंत्री ने कहा कि आज की तारीख में बीआईटी उस तरह निर्णायक नहीं हैं, जैसी पहले थीं। उन्होंने कहा कि कुछ देश बीआईटी की मांग किए बगैर भारत में निवेश कर रहे हैं, वहीं भारतीय फर्में भी ऐसे देशों में निवेश कर रही हैं, जिनके साथ कोई समझौता नहीं है। उन्होंने कहा बीआईटी के बगैर भी देशों में निवेश आ रहा है और वे तरक्की कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं जल्दबादी में नहीं कह सकती कि सबके साथ बीआईटी होगी और यह भी नहीं कह सकती कि बीआईटी की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आज दुनिया ज्यादा गतिशील है।’

सीतारमण ने जोर दिया कि पिछली संधियों से जुड़े विवादों से सरकार के रुख का पता चलता है। जिन मामलों में विदेशी निवेशकों ने कराधान के मामलों में संधि पंचाट का सहारा लिया, या उच्चतम न्यायालय के स्तर पर मामला लंबित रहने के बावजूद भारतीय न्याय व्यवस्था की उपेक्षा की गई, ऐसे मामले चिंता का विषय बने हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसी कई चीजें हैं जो संधि में व्यवधान बन जाती हैं।’यह पूछे जाने पर कि क्या भारत को प्रेस नोट 3 पर फिर से विचार करने की जरूरत है, जिसकी वजह से भारत की जमीनी सीमा को छूने वाले देशों, खासकर चीन से निवेश के मामले में जांच सख्त कर दी गई है, सीतारमण ने कहा कि लाभदायक मालिकाना को लेकर चिंता सिर्फ चीन से जुड़ी हुई नहीं है, बल्कि सभी अधिकार क्षेत्रों पर लागू होती है।

उन्होंने कहा, ‘मैं कई गैर कारोबारी वजहों से लाभ उठाने वाले आखिरी मालिक के बारे में चिंतित रहूंगी। यह चिंता हो सकती है कि किस तरह का पैसा आ रहा है। मैं खास तौर पर चीन की बात नहीं कर रही हूं। मैं इन नजरियों से निवेश को लेकर चिंतित हूं, भले ही ऐसा न हो।’ उन्होंने कहा कि ऐसे पैसे को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के नियमों के मुताबिक होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘हालांकि यह (एफडीआई) ऑटोमेटिक रूट से आता है, लेकिन कुछ मामलों में आप सोचना शुरू कर देते हैं, जब शेयरधारिता बढ़ती है। उस समय यह सोचना शुरू होता है कि कौन है, कौन निवेश कर रहा है? क्या वह एक ब्लॉक है, जो कंपनी पर पकड़ बनाने जा रहा है? दबाव में आई कंपनियां, जो किसी व्यक्तिगत वजह से नहीं हैं, बल्कि अलग वजहों से समस्या है, उन्हें गंवाया नहीं जा सकता है।’

मंत्री ने कर्नाटक के कॉफी बागानों में विदेशी खरीदारों द्वारा डिजिटल बोली लगाए जाने को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा, ‘हो सकता है कि इसमें कुछ भी गलत न हो। लेकिन यह अनोखी भारतीय संपदा है। तमाम सवाल हैं, जिन पर हमें विराम लगाने की जरूरत है और फिर आगे बढ़ना है।’

शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की आवक सुस्त रहने के मसले पर सीतारमण ने कहा, ‘हम नीतिगत स्थिरता और कर स्थिरता मुहैया करा सकते हैं, इसके अलावा भी वैश्विक पूंजी की गति को प्रभावित करने वाली वजहें हैं। इसलिए हमें अनिश्चितता के दौर में इंतजार करने की जरूरत है।’

सीतारमण ने वैश्विक अनिश्चितताओं को सबसे बड़ी नीतिगत चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा, ‘सुबह अलग तरह की अनिश्चितता होती है, दोपहर बाद अनिश्चितता का स्तर दूसरा होता है। अगर शुल्क दरों के बारे में मैं अभी जवाब दूं तो शाम को वह अप्रासंगिक हो सकता है।’

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वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार हालात से निपटने के लिए सभी तैयारियां रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह हमेशा मुमकिन नहीं होता और ‘इसलिए आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।’ उन्होंने मॉनसून को देश के लिए स्थायी जोखिम करार दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं चाहती हूं कि आने वाला मॉनसून हमारे लिए अच्छा हो। हम पर मेहरबान हो। न अति वृष्टि, न अनावृष्टि हो।’

कृषि क्षेत्र के सुधारों पर सीतारमण ने एग्रीस्टैक जैसी कुछ पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘एग्रीस्टैक अनूठा प्रयोग है। मुझे लगता है कि अगली यूपीआई से जुड़ी बड़ी क्रांति एग्रीस्टैक से आएगी। अब हमारे सामने साफ तस्वीर होगी कि कितने उर्वरक की जरूरत है। अब कोई भंडारण नहीं होगा और किसानों को उर्वरक देने से मना भी नहीं किया जाएगा। अब हमें पता होगा कि कितनी खाद मिट्टी में जा रही है और कितनी अलग इस्तेमाल हो रही है।’

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First Published - February 25, 2026 | 10:28 PM IST

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