राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रीय पात्रता-सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पर्चा लीक पर मचे घमासान और सियासी बवाल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को नीट प्रश्न पत्र लीक को ‘घोर पाप’ बताया। उन्होंने सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की एक बैठक में कहा कि इस ‘घोर पाप’ में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। उन्होंने राजग के सांसदों से लोगों के साथ ‘आत्मीयता और स्नेह’ से जुड़ने और ‘युवाओं का भरोसा’ जीतने का भी आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत द्वारा हाल ही में किए गए व्यापार समझौतों में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी गई है।
इससे पहले सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस ने नीट मामले पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठियां बरसाईं और आंसू गैस के गोले दागे।
राजग सांसदों को प्रधानमंत्री का यह संबोधन सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए ‘संसद चलो’ मार्च पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी घटनाओं के बाद हुआ। कहा जा रहा है कि अपने संबोधन के जरिये प्रधानमंत्री ने प्रश्न पत्र लीक होने पर युवाओं के गुस्से को शांत करने की कोशिश की है और यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह पूरे घटनाक्रम से काफी दुखी हैं।
जंतर-मंतर पर विरोध स्थल से पुलिस द्वारा अस्थायी ढांचे हटाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने जगह की सफाई की और भारी पुलिस मौजूदगी के बीच दिन भर वहां जमा होते रहे। मध्य दिल्ली में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन ने संसद तक अपना मार्च रद्द कर दिया है। उन्होंने समर्थकों खासकर महिलाओं से माफी मांगी जिनके बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिस अधिकारियों ने उनकी पिटाई की थी।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने ‘अनियंत्रित, आक्रामक और हिंसक व्यवहार दिखाया’ और सोमवार को चेतावनी के बावजूद ‘लागू निषेधाज्ञा का जानबूझकर उल्लंघन किया’। पुलिस ने आगजनी और हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए चार प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कीं।
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार सुबह 8 बजे तक राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आपातकालीन विभाग में 186 घायल लोग लाए गए जिनमें से 89 पुलिसकर्मी थे। कुल घायलों में 96 लोग प्लास्टर और टांके जैसे अलग-अलग इलाज के लिए शल्य चिकित्सा विभाग सर्जरी विभाग भेजे गए। वेंटिलेटर पर रखी गई एक महिला को छोड़कर बाकी सभी को छुट्टी दे दी गई।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कम से कम 60 प्रदर्शनकारी और 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। दीपके ने दावा किया कि 150 प्रदर्शनकारी घायल हुए। नड्डा ने अस्पताल का दौरा किया और कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा भी वहां पहुंचे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) ने कानूनी और स्वास्थ्य मदद सेवा (मेडिकल हेल्पलाइन) शुरू करने की भी घोषणा की।
दोपहर बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा घायलों को देखने अस्पताल गए और उसके बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना विरोध और तेज कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल और प्रियंका के नेतृत्व में पार्टी के कई नेता, प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर धरने पर बैठ गए जिनमें डी. के. शिवकुमार और वी. डी. सतीशन जैसे मुख्यमंत्री भी शामिल थे।
उनका आरोप था कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़ने का मुद्दा संसद में भी गूंजा। मॉनसून सत्र के दूसरे दिन भी संसद की कार्यवाही बाधित रही। विपक्ष ने सीजेपी के नेतृत्व में हुए मार्च पर हुए लाठीचार्ज का विरोध किया। साथ ही उसने नीट पेपर लीक और अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित चोरी पर भी चर्चा की मांग की।
जंतर-मंतर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सीजेपी के संस्थापक दीपके ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार सीजेपी से बातचीत कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई करा रही है। उन्होंने बताया कि सीजेपी के आशुतोष रांका और सौरभ दास ने सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा से मुलाकात की थी।
दीपके का आरोप है कि दोनों नेताओं के मोबाइल फोन ले लिए गए और उन्हें नड्डा के घर पर एक तरह से नजरबंद रखा गया। उनका कहना था कि सरकार का मकसद आंदोलन के नेताओं को अलग-थलग कर देना था ताकि अव्यवस्था फैलने पर कोई नेतृत्व न कर सके। हालांकि सरकार ने इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया और कहा कि वह सीजेपी से बातचीत के लिए तैयार है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी फिर से धरने पर बैठ गए। उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तस्वीर के साथ संविधान की एक प्रति, रामचरितमानस, चरखा और भगवान बुद्ध की एक छोटी प्रतिमा रखी। दीपके ने बताया कि सोनम वांगचुक पहले अपना अनशन समाप्त करने वाले थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई देखने के बाद उन्होंने अनशन जारी रखने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि वांगचुक की तबीयत गंभीर है। इसी बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आदेश दिया कि वांगचुक को तुरंत गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया जाए। सीजेपी नेताओं ने फिर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस नेताओं के धरने पर बैठने के लगभग 20 मिनट बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन राहुल गांधी से मिले। उन्होंने राहुल से धरना खत्म करने का अनुरोध किया। जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल संसद में इस मुद्दे पर बहस की अपनी पहले की मांग से पीछे हट गए हैं, जो उनके पद के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने धरना खत्म करने से इनकार कर दिया और इसके बजाय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने अब तक नियमों के अनुसार नीट मामले पर संसद में चर्चा कराने के लिए कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ‘सरकार नीट और उससे जुड़े आंदोलन पर संसद में चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन राहुल गांधी का रवैया लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।’
जितेंद्र सिंह के बयान के कुछ समय बाद पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को जबरन हटाकर हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी जमीन पर लेट गए और सुरक्षा कर्मियों द्वारा हटाए जाने का विरोध किया। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस दौरान राहुल गांधी की आंख के नीचे चोट लगी और हाथ-पैरों में भी हल्की चोटें आईं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी को अपने आवास के बाहर धरने पर बैठने की अनुमति इसलिए दी ताकि सीजेपी का आंदोलन कमजोर पड़ जाए।
दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता के उस आरोप को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाई। पुलिस ने इसे पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया। सीजेपी के सौरभ दास ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें दावा किया गया था कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाई। वीडियो में अस्पताल में घायल पड़े एक व्यक्ति को दिखाया गया था और कहा गया था कि उसे प्रदर्शन के दौरान पेलेट लगने से चोट आई है।
प्रदर्शनकारियों की ओर से जुड़े वकीलों के अनुसार, हिरासत में लिए गए 38 लोगों को बुराड़ी थाने ले जाया गया और बाद में शाम को छत्रसाल स्टेडियम भेज दिया गया। वकीलों का आरोप है कि उन्हें न तो हिरासत में लिए गए लोगों से मिलने दिया गया और न ही स्टेडियम में पुलिस से बात करने की अनुमति मिली। जिससे पता लगाना मुश्किल हो गया कि उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं, उन्हें गिरफ्तार किया गया है या नहीं, और उन पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं।
(साथ में एजेंसियां)