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कोरोना की मार से उबरा राखी कारोबार

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Last Updated- December 12, 2022 | 1:43 AM IST

देश के ज्यादातर कारोबारी क्षेत्रों में कोरोना महामारी का घाव अब भी हरा होगा मगर इस साल राखी का कारोबार इसकी मार से पूरी तरह उबरता दिख रहा है। राखी निर्माताओं को इस बार भरपूर ऑर्डर मिले हैं क्योंकि अभी तक कोरोना की बहुचर्चित तीसरी लहर नहीं आई है। लागत बढऩे की वजह से राखी के दाम बढ़ गए हैं फिर भी बिक्री में अच्छा-खासा इजाफा रहा। यह बात अलग है कि राखी बनाने वाले लागत के हिसाब से दाम नहीं बढ़ा पाए और उनके मार्जिन पर चोट पड़ी है। मगर राखी के कारोबार में मार्जिन बहुत अधिक होता है, इसलिए कारोबारियों को ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
अनुमान है कि देश में राखी का सालाना कारोबार 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये का है। पिछले साल कोरोना के कारण 2,500 से 3,000 करोड़ रुपये का कारोबार ही हो पाया था। इस साल इसमें 1,000 से 1,500 करोड़ रुपये का इजाफा होने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल राखी निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र है और कुल कारोबार में उसकी 50-60 फीसदी हिस्सेदारी है। उसके बाद गुजरात, मुंबई, दिल्ली और राजस्थान में बड़े पैमाने पर राखियां बनती हैं। चीन से बनी-बनाई राखियां आम तौर पर नहीं आतीं मगर इनमें लगने वाला कच्चा माल मसलन फैंसी आइटम, पन्नी, फोम, स्टोन आदि वहां से आयात होते हैं। हर साल 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये का कच्चा माल चीन से आता है।

शुभ लक्ष्मी ब्रांड की राखी बनाने वाले गुजरात के कारोबारी सुबोध अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल कोरोना के डर से नया माल बहुत कम खरीदा गया था और पुराने स्टॉक से ही काम चलाया गया था। लिहाजा इस साल कारोबारियों के पास स्टॉक ही नहीं बचा। इस बार थोक कारोबारियों से भरपूर ऑर्डर मिले। अग्रवाल को पिछले साल से दोगुने ऑर्डर मिले हैं। उन्होंने कहा कि मोती, मनके, पैकेजिंग सामग्री जैसा कच्चा माल महंगा होने से राखी निर्माण की लागत 40-50 फीसदी बढ़ गई है, जिससे राखी के दाम भी 30 फीसदी तक बढ़ाने पड़े हैं। 
पश्चिम बंगाल के राखी निर्माता संजय बंसल ने बताया कि ऑर्डर तो 40-50 फीसदी बढ़ गए मगर लागत के अनुपात में दाम नहीं बढ़ाए गए। अलग-अलग किस्म का मोती 250 से 2,000 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव मिल रहा है। पैकिंग बॉक्स भी 40 के बजाय 50 रुपये का मिल रहा है। राखी की प्रिंटिंग 25 फीसदी महंगी हो गई है और राखी बनाने में काम आने वाली पन्नी का दाम भी 100-150 रुपये बढ़ गया है। मगर राखी के दाम इस हिसाब से नहीं बढ़ाए जा सके, इसलिए कम मुनाफे पर काम करना पड़ रहा है।

दिल्ली में सदर बाजार के थोक राखी कारोबारी अनिल गुप्ता ने बताया कि शुरुआत में कारोबारी कोरोना की तीसरी लहर से डर रहे थे मगर जब लगा कि राखी तक लहर नहीं आएगी तो कारोबारियों ने माल उठाना शुरू कर दिया।

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First Published - August 21, 2021 | 1:26 AM IST

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