facebookmetapixel
Advertisement
NFOs की बहार: 7 दिन में लॉन्च होंगे 7 नए म्युचुअल फंड, ₹500 से इक्विटी और डेट दोनों में मिलेगा निवेश का मौकाग्लोबल FMCG कंपनियों के लिए भारत बना ‘ग्रोथ इंजन’, जून तिमाही में बिक्री और बाजार हिस्सेदारी में भारी उछालRBI MPC Meet: अगस्त में Repo Rate बढ़ेगी, घटेगी या रहेगी स्थिर? 10 अर्थशास्त्रियों ने दिया जवाबUpcoming IPOs This week: इस हफ्ते आ रहे हैं 6 नए IPO, 11 कंपनियों की लिस्टिंग भी होगीइस हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार का हाल? RBI के फैसले, क्रूड ऑयल व SBI-एयरटेल के नतीजों पर टिकी नजरेंMCap: टॉप 10 में से 9 कंपनियों का मार्केट कैप ₹2.51 लाख करोड़ बढ़ा, बजाज फाइनेंस रही सबसे आगेशेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की धमाकेदार वापसी, 4 महीने की बिकवाली के बाद जुलाई में लगाए ₹20,200 करोड़दिल्ली में छाए रहेंगे बादल, 23 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; जानें आपके इलाके का कैसा रहेगा हाल8th Pay Commission की तैयारी तेज, कर्मचारियों से सुझाव लेने कई राज्यों का करेगा दौरा; जानें पूरा प्लान5 महीने बाद खत्म होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? ट्रंप बोले: शांति समझौते के पैरामीटर्स तय, हमले पर लगाई रोक

आएगी मल्टीमोडल कनेेक्टिविटी की योजना

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 6:13 AM IST

देश के विभिन्न औद्योगिक केंद्रों में मल्टीमोडल परिवहन सेवाओं के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान पेश कर सकते हैं। इसका मकसद आर्थिक वृद्धि को गति देना है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि मार्च के अंत में बड़ी शुरुआत की योजना थी। अधिकारी ने कहा, ‘बहरहाल असम और पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों में चुनाव के कारण इसकी तिथि टाल दी गई।’
अधिकारी ने कहा, ‘तिथि पर अभी चर्चा होनी है। प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सड़क, रेल, जहाजरानी, नागरिक उड्डयन और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्र के केंद्रीय मंत्रालयों को भी इस मेगा लॉन्च में शामिल किया जाएगा।’
राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत 11 औद्योगिक गलियारों का विकास किया जाएगा, जिसके तहत 2024-25 तक चार चरणों में विभिन्न परियोजनाओं पर काम होगा। उपरोक्त अधिकारी ने कहा कि सरकार ने 22,000 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा पैकेज को मंजूरी दी है, जिस पर विभिन्न चरणों में काम चल रहा है।  इनमें दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा, आंध्र-कोलकाता औद्योगिक गलियारा, चेन्नई-बेंगलूरु औद्योगिक गलियारा, विशाखापत्तनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारा, हैदराबाद-वारंगल औद्योगिक गलियारा सहित अन्य परियोजनाएं शामिल हैं।
इस योजना का मुख्य मकसद लॉजिस्टिक लागत, यात्रा के समय में कमी लाना और घरेलू विनिर्माताओं में ऐसे समय में प्रतिस्पर्धा लाना है, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार आत्मनिर्भर भारत के कदम उठा रही है।
अधिकारियों ने कहा, ‘चीन से बाहर निकल रही कंपनियां (कोविड-19 के बाद) भी आकर इन औद्योगिक केंद्रों में निवेश कर सकती हैं।’
इसके पहले उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव गुरुप्रसाद महापात्र ने कहा था कि प्रमुख बुनियादी ढांचा मंत्रालयों को इस मास्टर प्लान के लिए वक्त दिया गया है कि वे विभिन्न उत्पादन केंद्रों के लिए अगले 4 साल की मल्टीमोडल कनेक्टिविटी की कार्ययोजना सुनिश्चित करें। इसमें रेल, सड़क, जलमार्ग सहित बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रमुख विभागों को शामिल किया गया है, जिससे कनेक्टिविटी में सुधार हो सके। मास्टर प्लान पर डीपीआईआईटी की अगुआई में काम किया जा रहा है।
उद्योग जगत की शिकायत बहुत ज्यादा लॉजिस्टिक्स लागत को लेकर रही है, जिसकी वजह से घरेलू सामान की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। अगले 5 साल में सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिकल लागत सकल घरेलू उत्पाद के 13 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत करने की है। इसकी वजह से घरेलू विनिर्माण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
पिछले साल मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान कहा था कि भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र के विकास को लेकर नई दिशा की जरूरत है, जिसमें सड़क, रेल, हवाई  एवं जलमार्ग का एकीकरण हो। उन्होंने कहा था, ‘यह एक दूसरे के पूरक होने चाहिए।’

Advertisement
First Published - April 6, 2021 | 1:33 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement