facebookmetapixel
Advertisement
होर्मुज में बारूदी सुरंगों का जाल: समंदर की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर यह क्यों है एक गंभीर खतरा?Gen Z का गुस्सा? राघव चड्ढा का BJP में जाना युवाओं को नहीं आया रास, 24 घंटे में घटे 14 लाख फॉलोअर्स!IDFC First Bank Q4 Results: नेट प्रॉफिट ₹319 करोड़ पर पहुंचा, ₹NII 15.7% बढ़कर 5,670 करोड़ के पारSBI vs ICICI vs HDFC Bank: 20 साल के लिए लेना है ₹30 लाख होम लोन, कहां मिलेगा सस्ता?‘पोर्टेबल KYC से बदलेगा निवेश का अंदाज’, वित्त मंत्री ने SEBI को दिया डिजिटल क्रांति का नया मंत्रबीमा लेते वक्त ये गलती पड़ी भारी, क्लेम रिजेक्ट तक पहुंचा सकती है सच्चाई छुपानाआसमान से बरस रही आग! दिल्ली से लेकर केरल तक लू से लोग परेशान, IMD ने जारी की नई चेतावनीपेटीएम की दोटूक: RBI की कार्रवाई का बिजनेस पर कोई असर नहीं, कामकाज पहले की तरह चलता रहेगाअमेरिका में बड़ा बवाल! H-1B वीजा पर 3 साल की रोक का बिल पेश, भारतीय प्रोफेशनल्स पर असर की आशंकाUpcoming Rights Issue: अगले हफ्ते इन 4 कंपनियों के शेयर सस्ते में खरीदने का मौका, चेक करें पूरी लिस्ट

MDB को सालाना 3 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च की जरूरत

Advertisement

इस रिपोर्ट के अनुसार सभी MDB संस्थानों में 100 अरब डॉलर की नई इक्विटी की उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता है

Last Updated- July 16, 2023 | 11:20 PM IST
Federal Reserve can't stop raising interest rates despite SVB, Signature Bank crisis

G20 में बहुपक्षीय विकास बैंकों को मजबूत बनाने (MDB) के स्वतंत्र विशेषज्ञों के समूह ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2030 तक हर साल 3 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च की जरूरत होगी। इसका एक हिस्सा मौजूदा बैलेंस शीट का लाभ उठाकर और पूंजी पर्याप्तता ढांचे को लागू करने से आ सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार सभी MDB संस्थानों में 100 अरब डॉलर की नई इक्विटी की उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता है।

रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक आधिकारिक विकास वित्त में हर साल 500 अरब डॉलर की वृद्धिशील राशि की जरूरत होगी जिसमें 260 अरब डॉलर MDB के जरिये आना चाहिए। अभी इस रिपोर्ट पर G 20 देशों के वित्त और केंद्रीय बैंकों के उपप्रमुखों के प्रतिनिधि विचार-विमर्श कर रहे हैं।

नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समूह के सह संयोजक हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रेजिडेंट एमेरिट्स लॉरेंस समर्स, भारत के 15वें वित्त आयोगे के चेयरपर्सन व इंस्टीट्यूट ऑफ इकनोमिक ग्रोथ के अध्यक्ष नंद किशोर सिंह हैं। ये दोनों इस रिपोर्ट के लेखक भी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन और सतत आधारभूत संरचना पर चीन को छोड़कर अन्य विकासशील देशों को 2030 तक आदर्श रूप से अपना खर्च चार गुना बढ़ा देना चाहिए और SDG पर खर्च बढ़ाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य और शिक्षा की मानव पूंजी पर कम से कम खर्च 75 फीसदी बढ़ाया जाना चाहिए।

Advertisement
First Published - July 16, 2023 | 11:20 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement