facebookmetapixel
Advertisement
भारत-अमेरिका को मतभेद दूर कर भरोसेमंद कर व्यवस्था बनाने पर काम करना चाहिए: सर्जियो गोरभारतीय चुनाव व्यवस्था की तारीफ कर बोले ट्रंप, कांग्रेस ने कहा- ईवीएम भी अमेरिका भेज देंगेब्रिक्स देशों ने पर्यावरण संरक्षण पर चार ज्ञान संकलन जारी किए, टिकाऊ विकास पर जोरदुबई का कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार मजबूत, पहली छमाही में लेनदेन 8.5% बढ़ाबाल यौन शोषण सामग्री पर सरकार सख्त, सोशल मीडिया के ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान पर साफ संदेश17 सितंबर से सेमीकॉन इंडिया 2026, वैश्विक सीईओ और 500 से ज्यादा प्रदर्शक करेंगे ​शिरकत 13-17 साल के किशोरों के लिए नया चैटजीपीटी, मजबूत सुरक्षा और पैरेंटल कंट्रोल की सुविधालाठीचार्ज और पुलिस हिंसा की जांच करेगी 3 सदस्यीय समिति, सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देशपायलटों की आकस्मिक ड्रग जांच 25% करने की मांग, डीजीसीए से एफआईपी की अपीलभारत के समुद्री व्यापार का नया गेटवे बना विझिंजम, 57 लाख टीईयू क्षमता की ओर बढ़ा बंदरगाह

बुरे दौर से गुजर रहा विनिर्माण क्षेत्र

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 3:37 PM IST

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों की पिछले साल की वृद्धि से तुलना करने पर पता चलता है कि विनिर्माण क्षेत्र बहुत संकट के दौर से गुजर रहा है। जुलाई में जहां इसमें पिछले साल की समान अवधि से 3.2 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि कोविड के पहले के साल 2019-20 के समान महीने से तुलना करें तो इसमें महज 1.1 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि आईआईपी के दो अहम क्षेत्रों खनन व बिजली क्षेत्र की स्थिति अलग रही है। जुलाई में खनन क्षेत्र का उत्पादन पिछले साल के समान महीने की तुलना में 3.3 प्रतिशत कम हुआ है,  वहीं यह 2019-20 की तुलना में करीब 1 प्रतिशत बढ़ा है। बिजली उत्पादन जुलाई में पिछले साल के समान महीने की तुलना में 2.3 प्रतिशत बढ़ा है, वहीं 2019-20 की तुलना में करीब 11 प्रतिशत बढ़ा है।
वित्त वर्ष 23 के पहले 4 महीने में विनिर्माण क्षेत्र में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। लेकिन अगर हम 2019-20 की समान अवधि से तुलना करें तो इसमें महज 2.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े भी विनिर्माण को लेकर यही कहानी दोहरा रहे हैं। विनिर्माण का सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) महज 4.8 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कुल मिलाकर जीवीए में 12.7 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।उल्लेखनीय है कि आईआई में विनिर्माण को भौतिक मात्रा के आधार पर देखा जाता है, जबकि जीडीपी या जीवीए में यह मूल्यवर्धन के हिसाब से देखा जाता है। इसके अलावा आईआईपी में गैर कॉर्पोरेट और असंगठित क्षेत्र का इस्तेमाल होता है।
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जुलाई के आईआईपी में विनिर्माण के आंकड़े निश्चित रूप से सुस्त हैं। उन्होंने कहा, ‘बहरहाल जीएसटी ई-वे बिल और वाहन उत्पादन जैसे आंकड़े अगस्त में बेहतरी की ओर इशारा कर रहे हैं।’देश की शीर्ष 7 वाहन कंपनियों की बिक्री 30.2 प्रतिशत बढ़ी है। कंपनियों की मासिक बिक्री के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल के 2,34,743 वाहनों की तुलना में इस बार 3,05,744 वाहन बिके हैं। अगस्त में 782 लाख ई-वे बिल बने हैं, जबकि जुलाई में 756 लाख ई-वे बिल बने थे।

Advertisement
First Published - September 13, 2022 | 9:44 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement