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Iran-Israel War: प​श्चिम ए​शिया में रार ने बढ़ाई चिंता, व्यापार पर दिख रहा असर…

Iran-Israel War: उद्योग जगत ने कहा कि ईरान और इजरायल में तनाव बढ़ने से व्यापार होगा प्रभावित

Last Updated- April 21, 2024 | 11:13 PM IST
प​श्चिम ए​शिया में रार ने बढ़ाई चिंता, व्यापार पर दिख रहा असर..., West Asia conflict builds trade woes for India Inc

ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष पर दुनिया की पैनी नजर बनी हुई है। दोनों देशों के बीच तनाव के कारण भारतीय उद्योग जगत को कारोबार पर असर के संकेत दिखने लगे हैं। माल की आवाजाही में देरी हो रही है और मालवहन का किराया करीब दोगुना हो गया है। कार्यशील पूंजी चक्र एवं लागत में भी इजाफा हुआ है।

उद्योग के अ​धिकारियों ने कहा कि जिन क्षेत्रों में अभी इसका असर नहीं दिखा है, उनमें भी भविष्य के हालात को लेकर घबराहट बढ़ रही है। जैसा कि कहीं भी भू-राजनीतिक तनाव होने पर होता है, तेल की कीमतों और ईंधन लागत में बढ़ोतरी की आशंका केंद्र सरकार तथा उद्योग पर नजर रखने वालों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक वरिष्ठ अ​धिकारी ने कहा, ‘हम हमेशा से कहते रहे हैं कि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार होने से ​स्थिति काफी कठिन होगी। कीमतों में बढ़ोतरी का झटका लग सकता है मगर इस स्तर तक पहुंचने से पहले पर्याप्त बफर है। ताजा घटनाक्रम से व्यापार को लेकर अनि​श्चितता बढ़ गई है जिसके कारण हाजिर खरीद की औसत कीमतें भी बढ़ गई हैं।’

मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष से तेल की आपूर्ति पर सीधे तौर पर कोई असर पड़ने की आशंका नहीं है मगर सरकार वै​श्विक कीमतों और इस बढ़ोतरी के असर पर नजर बनाए हुए है। 19 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 87.39 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।

क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस ऐंड एनालिटिक्स में ​निदेशक-शोध सेहुल भट्ट ने कहा कि वर्ष 2024 के लिए क्रिसिल ने कच्चे तेल का दाम 83 से 88 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था मगर इसके बढ़ने का जो​खिम बना हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘जहाजों के आने जाने वाले समुद्री इलाकों में तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वै​श्विक कच्चे तेल की मांग का करीब 20 फीसदी या प्रति​दिन 2.1 करोड़ बैरल की आवाजाही होती है। लाल सागर के जरिये करीब 80 लाख बैरल कच्चे तेल की रोजाना आवाजाही होती है।’

ईंधन की लागत बढ़ने के जो​खिम के अलावा भारतीय कारोबारियों को ऊंची मालढुलाई लगात, माल की आपूर्ति में लंबा समय लगने और कच्चे माल की ​कमी का सामना करना पड़ रहा है।

भारतीय अ​भियांत्रिकी निर्यात संवर्धन परिषद इंजीनियरिंग (ईईपीसी) के चेयरमैन अरुण कुमार गरोडिया ने कहा कि लाल सागर में संकट शुरू होने के बाद मालवाहक जहाज केप ऑफ गुड होप होते हुए लंबा रास्ता तय कर रहे हैं। इससे माल की आपूर्ति में 2 से 3 हफ्ते का अ​धिक वक्त लग रहा है। उन्होंने कहा कि संकट बढ़ने पर निर्यात पर इसका असर ज्यादा दिख सकता है। इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तुओं के मामले में भारतीय कंपनियों की ऑर्डरबुक में प​श्चिम ए​शिया का अहम योगदान है।

स्टर्लिंग जेनरेटर्स के मुख्य कार्या​धिकारी संजय जाधव ने कहा कि कंपनी के तैयार माल की आपर्ति आं​शिक तौर पर प्रभावित हुई है। पूंजीगत वस्तुओं और इंजीनियरिंग उत्पादों के अलावा चाय, टेक्सटाइल, फार्मा तथा वाहन क्षेत्र में भी इसका असर दिख रहा है।

ईरान भारतीय चाय के शीर्ष तीन बाजारों में से एक है। ईरान-इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ने से चाय निर्यातकों में भी घबराहट देखी जा रही है क्योंकि पिछले साल खराब कारोबार के बाद वे इस बार अच्छी मांग की उम्मीद कर रहे हैं।

ए​शियान टी कंपनी के निदेशक मोहित अग्रवाल ने कहा कि नए सीजन की पहली तीन नीलामी में असम ऑर्थोडॉक्स चाय की अच्छी मांग देखी गई और 86 फीसदी से ज्यादा चाय पिछले साल की तुलना में 75 रुपये अ​धिक भाव पर बिक रही है।

एशियान टी कंपनी के निदेशक मोहित अग्रवाल ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में तनाव से निर्यातकों में घबराहट है। तनाव बढ़ने से परिवहन पर असर पड़ेगा और माल के बीमा की लागत भी बढ़ जाएगी।’

भारतीय चाय निर्यातक संघ के चेयरमैन अंशुमान कनोरिया ने कि अगर ईरान-इजरायल के बीच तनाव नहीं बढ़ता है तो असम ऑर्थोडॉक्स की अच्छी मांग रहेगी। माल की आपूर्ति में ज्यादा समय लगने से टेक्सटाइल कंपनियों का कार्यशील पूंजीगत चक्र भी बढ़ गया है। इंडो काउंट इंडस्ट्रीज के सीईओ और कार्यकारी निदेशक कैलाश लालपुरिया ने कहा, ‘केप ऑफ गुड होप के जरिये माल भेजने से 35 दिन का समय लग रहा है जबकि पहले स्वेज नहर के जरिये माल भेजने में 20 दिन ही लगता था। ऐसे में हमारी कार्यशील पूंजी भी ज्यादा समय तक अटकी रहती है।’

गरोडिया ने कहा कि चुनिंदा स्टेनलेस स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों के निर्यातकों को कारोबार का नुकसान हो रहा है क्योंकि माल की आपूर्ति में लंबा समय लग रहा है। भारतीय वाहन विनिर्माता भी पश्चिम एशिया में संकट से कारोबार पर असर पड़ने की बात कह चुके हैं। पिछले हफ्ते कंपनी के तिमाही नतीजे जारी करने के बाद बजाज ऑटो के कार्यकारी निदेशक राकेश शर्मा ने कहा था कि ईरान-इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ने से पश्चिमी देशों को वाहन भेजने में दिक्कत आ रही है।

कच्चे माल की किल्लत के कारण देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट के उत्पादों के दाम बढ़ने की आशंका है। कोडक ब्रांड की लाइसेंसी कंपनी सुपर प्लास्ट्रोनिक्स के सीईओ अवनीत सिंह मारवाह ने कहा, ‘मालढुलाई से लेकर कच्चे माल तक के दाम बढ़ गए हैं और चिप की भी किल्लत है। कीमतों में कुल 10 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है और अप्रैल में एकबार और इजाफा हो सकता है।’

भारतीय फार्मा उद्योग पर अभी तनाव का असर नहीं दिखा है। फार्ममेक्सिल के महानिदेशक उदय भास्कर ने कहा कि भारतीय फार्मा का निर्यात अभी तक बेअसर रहा है।

गुजरात के एक फार्मा निर्यातक ने कहा कि अभी तक इन देशों में मांग को लेकर कोई समस्या नहीं आई है क्योंकि इन देशों में 2 से 3 महीने का स्टॉक है। मगर कार्गो की आवाजाही पर असर पड़ता है तो मालढुलाई की लागत बढ़ सकती है और उत्पादों की आपूर्ति में लंबा समय लग सकता है।

(नई दिल्ली से शुभायन चक्रवर्ती, कोलकाता से ईशिता आयान दत्त, मुंबई से शार्लीन डिसूजा, सोहिनी दास और अमृता पिल्लै)

First Published - April 21, 2024 | 11:13 PM IST

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