facebookmetapixel
Advertisement
पश्चिम एशिया की जंग से भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट: क्या 7.4% की विकास दर हासिल कर पाएगा भारत?WTO में भारत का बड़ा कदम: डिजिटल ट्रेड पर टैरिफ न लगाने के मोरेटोरियम को दो साल के लिए दी मंजूरीमोदी-ट्रंप की फोन पर बातचीत में मस्क की मौजूदगी को भारत ने नकारा, कहा: सिर्फ दोनों नेता ही शामिल थेApple ने बदला अपना गेम प्लान, भारत में पुराने आईफोन खरीदना अब नहीं होगा इतना सस्ता2026 में आ सकता है फाइनेंशियल क्रैश? रॉबर्ट कियोसाकी ने चेताया, बोले: पर ये अमीर बनने का मौका होगाIPL 2026: इस बार बिना MS Dhoni उतरेगी CSK, कौन संभालेगा टीम की कमान?ITR Filing 2026: इस बार नया इनकम टैक्स एक्ट लागू होगा या पुराना? एक्सपर्ट से दूर करें सारा कंफ्यूजनIRB इंफ्रा और Triton Valves समेत ये 4 कंपनियां अगले हफ्ते देंगी बोनस शेयर, निवेशकों की बल्ले-बल्लेRentomojo ने सेबी के पास IPO के ड्राफ्ट पेपर जमा किए, ₹150 करोड़ फ्रेश इश्यू का लक्ष्य; बाजार में हलचलTVS Motor से लेकर CRISIL तक, अगले हफ्ते ये 7 दिग्गज कंपनियां बांटेंगी मुनाफा; चेक कर लें रिकॉर्ड डेट

जेनको को कोयला आयात के निर्देश

Advertisement
Last Updated- January 09, 2023 | 11:05 PM IST
कोल इंडिया

बिजली की मांग रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने सभी बिजली उत्पादन कंपनियों (जेनको) को अपनी कुल कोयला जरूरत का 6 प्रतिशत आयात करने का निर्देश दिया है। चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कोयले का उत्पादन बढ़ा है, वहीं बिजली मंत्रालय ने कहा है कि यह बढ़ोतरी ‘बिजली की मांग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी’ की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

सोमवार को बिजली मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों में कहा गया है, ‘बिजली की मांग में वृद्धि और मांग के मुताबिक घरेलू कोयले की आपूर्ति पर्याप्त न होने की स्थिति को देखते हुए घरेलू कोयले में आयातित कोयला मिलाने की जरूरत महसूस की गई है। एमओपी सभी जेनको को निर्देश देता है कि चालू वित्त वर्ष के शेष महीनों और अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही (सितंबर 2023 तक) में 6 प्रतिशत मिलावट के लिए कोयले का आयात करें।’

ग्रिड इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक देश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। यह वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही तक तेज रहेगी। बिजली मंत्रालय उम्मीद कर रहा है कि वित्त वर्ष 24 की पहली छमाही के दौरान घरेलू कोयला करीब 2.4 करोड़ टन कम पड़ेगा। अगर रोजाना के हिसाब से देखें तो घरेलू कोयले की आपूर्ति 1 से 3 लाख टन कम रहेगी।

यह भी पढ़ें: देश में समानता लाने में मददगार रही है कोविड महामारी: SBI रिपोर्ट

नोट मे कहा गया है, ‘यह आकलन किया गया है कि अगर घरेलू कोयले में आयातित कोयला नहीं मिलाया जाता है तो घरेलू कोयले पर आधारित संयंत्रों को को कोयले की कमी पड़ेगी और इससे देश में बिजली आपूर्ति की स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।’ इस समय बिजली इकाइयों के पास कोयले का भंडार करीब 3.2 करोड़ टन (मोटे तौर पर 11 दिन के संयंत्र चलाने के लिए) है, जबकि कोयला कंपनियों के पास 3.6 करोड़ टन कोयला है।

Advertisement
First Published - January 9, 2023 | 11:05 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement