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बीमारी के लक्षणों से पहले ही स्वास्थ्य जांच पर जोर, महत्त्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा भारत का डायग्नोस्टिक्स बाजार

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डायग्नोस्टिक्स बाजार में आ रहा महत्त्वपूर्ण बदलाव, स्वास्थ्य के प्रति अ​धिक जागरूक दिख रहे शहरी लोग

Last Updated- December 24, 2025 | 10:33 PM IST
Diagnostics

भारत का डायग्नोस्टिक्स क्षेत्र महत्त्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब उपभोक्ता लक्षण के आधार पर जांच कराने के बजाय निवारक परीक्षण यानी कोई बीमारी दिखने से पहले ही सतर्कता बरतते हुए स्वास्थ्य जांच का विकल्प चुन रहे हैं। एगिलस डायग्नोस्टिक्स का यह निष्कर्ष है। वर्ष के अंत में जारी उसके आंकड़ों के अनुसार रोकथाम से जुड़े स्वास्थ्य परीक्षण में सालाना आधार पर 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इससे पता चलता है कि लोग मेटाबोलिक, हृदय से जुड़े जो​खिम और पोषण संबंधी स्थिति की शुरुआती निगरानी के बारे में जागरूक हो रहे हैं। विशेष यह कि दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलूरु, कोलकाता, लखनऊ और चंडीगढ़ जैसे तमाम बड़े शहरों के युवाओं में यह रुझान अ​धिक देखा जा रहा है।

लाइफस्टाइल और गट हेल्थ डायग्नोस्टिक्स ने तो स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और बीमारी के लक्षण दिखने से पहले ही निवारक परीक्षण कराने की दर में और भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की है। इसने पिछले साल के 31 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में इस साल 47 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी है।

माइक्रोबायोम, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, अग्नाशयी कार्य और खाद्य संबंधी विकारों से संबंधित परीक्षणों की संख्या बढ़ रही है। यह परिवर्तन भोजन की आदतों में बदलाव, बहुत कम चलने-फिरने वाली या गतिहीन जीवन शैली और चिकित्सीय जांच की अ​धिक सिफारिशों के कारण आ रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सीय परीक्षणों में वृद्धि इसलिए हो रही है, क्योंकि डॉक्टर शुरुआती स्तर पर ही बीमारी का पता लगाना चाहते हैं ताकि समय रहते इलाज शुरू किया जा सके और गंभीर ​स्थिति बनने से पहले मरीज ठीक हो जाए। इसीलिए नियमित जांच अब आम हो रही है।

इस वर्ष ऑन्कोलॉजी डायग्नोस्टिक्स में भी तेज वृद्धि देखी गई है। परीक्षण में लगने वाले समय में कटौती के कारण ऑन्कोजेनोमिक्स जांच की मात्रा में इस साल 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रक्त कैंसर के लिए जीनोमिक परिणाम अब तीन दिनों के भीतर मिल जाते हैं, जबकि ठोस ट्यूमर की व्यापक प्रोफाइलिंग पांच दिनों के भीतर दी जा रही है। जल्द मरीज की ​स्थिति का पता चलने के कारण चिकित्सक समय पर उपचार संबंधी निर्णय लेने में सक्षम हो रहे हैं।

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First Published - December 24, 2025 | 10:28 PM IST

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