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‘दोषमुक्त फेसलेस आकलन से दूर हुईं उद्योग की आशंकाएं’

Last Updated- December 12, 2022 | 6:07 AM IST

फेसलेस आकलन तंत्र को लागू हुए आठ महीने हो चुके हैं और इस दौरान यह आयकर विभाग के लिए सफल साबित हुआ है। इस तंत्र के माध्यम से अब तक दोष मुक्त तरीके से 1.06 लाख मामलों को निपटारा हुआ।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन पी सी मोदी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि इस तंत्र के सफलता पूर्वक कार्य करने से मुकदमेबाजी बढऩे और बढ़ा चढ़ा कर आकलन करने संबंधी उद्योग की आशंकाएं दूर हुई हैं। मोदी ने कहा कि फेसलेस योजना का महत्त्वपूर्ण पहलू है विभाग की ओर से बिंदुवार प्रश्नावली और निर्धारिती की तरफ से सुसंगत जवाब। पिछले वर्ष प्रयोग के दौरान 57,985 मामलों को आकलन के लिए चुना गया था और 46,822 मामलों में आदेश पारित किए गए थे। 13 अगस्त को इसका आरंभ होने के बाद 1.36 लाख नए मामले चुने गए थे जिनमें से अब तक 59,552 मामलों का आकलन पूरा किया जा चुका है।
सरकार ने करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच प्रत्यक्ष आमना सामना और भौगोलिक क्षेत्राधिकार को समाप्त करने के लिए फेसलेस आकलन, फेसलेस अपील और फेसलेस दंड की शुरुआत के साथ पिछले वर्ष फेसलेस योजना की शुरुआत की थी। वास्तव में, वित्त अधिनियम 2021 में फेसलेस आयकर अपील अधिकरण की व्यवस्था की गई है जो इस वर्ष प्रभावी होगा।   
मोदी ने कहा, ‘इस योजना की थीम ईमानदार को सम्मानित करना है। विभाग का ध्यान निष्पक्ष और स्पष्ट रहते हुए दी गई समय सीमा के भीतर विवादों का समाधान और आकलन कर अच्छी करदाता सेवाएं मुहैया करना है।’
हालांकि, फेसलेस अपीलों की प्रक्रिया धीमी गति से शुरू हो रही है। 4.12 लाख अपील मामलों में से अब तक केवल 14,743 आदेश पारित किए गए हैं। वास्तव में, कुल पारित आदेशों से 11,322 आदेश विवाद से विश्वास योजना निर्लिप्तता आदेशों से संबंधित हैं और कवेल 3,412 आदेश ही नियमित अपील मामलों में पारित किए गए हैं। हालांकि, मोदी ने स्पष्ट किया कि भले ही योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 25 सितंबर को हुई थी लेकिन मामलों को पारित करने की शुरुआत इस साल जनवरी से ही हुई है।
मोदी ने कहा, ‘अपीलों और मामलों का कार्यभार देने के लिए कार्यरूप को अंतिम रूप देने में समय लगता है। योजना तैयार की जानी थी, आंकड़े अपलोड किए जाने थे और उसके बाद यादृच्छ आवंटन किए जाने थे और अधिकारियों को नए स्थानों पर भेजा जाना था। वास्तविक आदेश जनवरी से पारित होने शुरू हुए।’ उन्होंने आगे कहा कि एक अन्य मुद्दा यह है कि 2016 तक के आदेश हाथ से लिखे थे।    
मोदी ने कहा, ‘उसके बाद से ही इन्हें सिस्टम पर किया जाने लगा। इसलिए उन सभी हस्त लिखित आदेशों और दस्तावेजों को अपलोड किया जाना था। इन लॉजिस्टिक ने अपना समय लिया। मुश्किल से 20 से 30 फीसदी काम बचा हुआ है।’ उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को सरलता के साथ लागू किए जाने से उद्योग की आशंकाओं का निराकरण हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘उद्योग को चिंता थी कि उनकी सुनवाई के लिए उचित अवसर मिलेंगे अथवा नहीं। हमें जो प्रतिपुष्टि मिल रही है वह बहुत उत्साहजनक है। सभी करदाताओं को संक्षेप और सुसंगत जवाब देने की सलाह दी गई है। इससे निष्पक्ष और तेजी से निर्णय होंगे। अपने अधिकारियों को मैंने सलाह दी है कि उन्हें प्रश्नों को व्यापक बनाने की जरूरत नहीं है। उन्हें केंद्रित तरीके से विशिष्ट सवाल पूछने चाहिए और विशिष्ट जवाब लेने चाहिए।’

First Published - April 9, 2021 | 12:32 AM IST

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