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तेल संकट से निपटने के लिए भारत का बड़ा प्लान, सरकार बनाएगी 3 नए स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व

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तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने से भारत को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की सदस्यता हासिल करने में भी मदद मिल सकती है।

Last Updated- July 02, 2025 | 7:29 PM IST
Oil Reserve
प्रतीकात्मक तस्वीर

सरकार देश में तीन नए रणनीतिक तेल भंडार बनाने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में तेल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इससे ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। वह अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80% से भी ज्यादा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई में आने वाले झटकों को कम करने के लिए भारत लगातार अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता ला रहा है।

सरकारी कंसल्टेंसी कंपनी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (Engineers India Ltd) नए तेल भंडारों के लिए व्यवहार्यता अध्ययन (feasibility studies) कर रही है। यह जानकारी इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) के सीईओ एल. आर. जैन ने रॉयटर्स को दी। उन्होंने कहा, “आपात स्थितियों में हमारे पास बेहतर तैयारी होगी।”

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वर्तमान और प्रस्तावित तेल भंडारण सुविधाएं

भारत इस समय दक्षिण भारत के मैंगलोर, पदूर और विशाखापत्तनम में रणनीतिक तेल भंडार संचालित करता है। इन भंडारों में कुल लगभग 5.33 मिलियन टन (MT) कच्चा तेल स्टोर किया जा सकता है। ये भंडार सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट के असर को कम करने में मदद करते हैं।

अब तीन और स्थानों पर नए तेल भंडार बनाने की योजना पर काम हो रहा है:

  • बीकानेर (राजस्थान) में नमक की गुफाओं में 5.2–5.3 मिलियन टन क्षमता वाला भंडार
  • मैंगलोर (कर्नाटक) में 1.75 मिलियन टन क्षमता वाला नया प्लांट।
  • बीना (मध्य प्रदेश) में एक भंडारण प्लांट, जिसकी क्षमता अभी तय नहीं की गई है। हालांकि इन प्रस्तावित परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी कैबिनेट से तभी मिलेगी जब इनकी व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी हो जाएगी।

प्रस्तावित स्थलों के अलावा दो भंडारों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है:

  • पदूर में 2.5 मिलियन टन की क्षमता का विस्तार।
  • चांदीखोल (ओडिशा) में 4 मिलियन टन की नई प्लांट।

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निजी भागीदारी के साथ भंडारण बढ़ाने की तैयारी

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने रणनीतिक तेल भंडारण (Strategic Petroleum Reserves) से जुड़ी नीति में बदलाव किया है। अब इसमें निजी भागीदारी और वाणिज्यिक उपयोग की अनुमति दी गई है। यह वही मॉडल है जिसे जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनाते हैं, जहां बड़ी तेल कंपनियों जैसे निजी पट्टाधारकों (private lessees) को कच्चा तेल व्यापार के लिए भंडारित करने की अनुमति होती है।

जैन ने कहा, “हम 90 दिनों के तेल भंडार के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। साथ ही देश में ईंधन की मांग भी लगातार बढ़ रही है, इसलिए हमें अतिरिक्त भंडारण की जरूरत है।”

90 दिन का तेल भंडार रखने का लक्ष्य

तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने से भारत को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की सदस्यता हासिल करने में भी मदद मिल सकती है। IEA की शर्तों के अनुसार, सदस्य देशों को कम से कम 90 दिनों की तेल खपत के बराबर भंडार रखना अनिवार्य है। फिलहाल भारत के पास, कंपनियों द्वारा रखे गए भंडार और परिवहन में मौजूद तेल को मिलाकर, करीब 75 दिनों की ईंधन जरूरतों को पूरा करने लायक भंडारण क्षमता है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First Published - July 2, 2025 | 7:23 PM IST

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