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भारत-रूस व्यापार में नई रफ्तार: गैर-शुल्क बाधाएं हटाने पर तेजी से काम, 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत और रूस के बीच कुल व्यापार वित्त वर्ष 22 में 8.73 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 68.7 अरब डॉलर हो गया

Last Updated- December 08, 2025 | 10:42 PM IST
PM Modi and Putin

भारत और रूस समुद्री उत्पाद, डेरी और पोल्ट्री सहित औषधि और कृषि क्षेत्रों में गैर-शुल्क बाधाओं को लेकर भारत की चिंताओं को दूर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। बहरहाल, भारत इन मुद्दों पर बीते एक साल से आवाज उठा रहा है। ये मुद्दे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बीते सप्ताह भारत यात्रा के दौरान उठाए गए थे। इसके बाद इन कारोबारी बाधाओं को दूर करने के लिए प्रयास तेज हुए। पुतिन के साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था और इसमें न केवल सरकारी स्तर पर बातचीत हुई बल्कि दोनों पक्षों के उद्योगों ने भी बातचीत की थी।

कृषि निर्यातकों को लंबी रूसी प्रमाणन और लिस्टिंग प्रक्रियाओं से संबंधित गैर-शुल्क बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उधर फार्मास्युटिकल निर्यातकों को यूरेशियन मानकों से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ता है जिनका पालन करना आवश्यक है।

अधिकारियों ने कहा कि कृषि निर्यात के मामले में रूस इकाइयों के पंजीकरण और निरीक्षण की प्रणाली का पालन करता है, जो बेहद धीमी रही है। रूसी अधिकारी निरीक्षण के लिए भारत में प्रतिष्ठानों का दौरा भी करते हैं । कुछ कमियों के मामले में निर्यातकों को नोटिस जारी किए जाते हैं और कुछ मामलों में इन नोटिसों में स्पष्टता की कमी होती है।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल और रूस के कृषि नियामक के बीच समझौता होने के बावजूद पूरी प्रक्रिया में समय लगता है।’अधिकारी ने कहा, ‘यदि आदर्श रूप से ऐसी प्रणाली अपनाई जाती है तो किसी भी भौतिक निरीक्षण की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। हालांकि पिछले कुछ महीनों में हम पंजीकरण प्रक्रिया को तेज करने में सफल रहे हैं – जो हमारे लिए सकारात्मक विकास है।’

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (फियो) के महानिदेशक व मुख्य कार्याधिकारी अजय सहाय ने कहा कि यदि व्यापार संबंधी बाधाओं को दूर कर लिया जाता है तो हम एक वर्ष में रूस को अपने निर्यात को दोगुना करने में सक्षम होंगे। भारत और रूस ने शुक्रवार को 2030 तक संयुक्त ‘आर्थिक सहयोग कार्यक्रम’ पर सहमति व्यक्त की। इसमें मुख्य रूप से रूस ने गैर-शुल्क बाधाओं और नियामक अड़चनों को दूर कर भारतीय निर्यात का विस्तार करके 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है।

उपरोक्त अधिकारी ने कहा, ‘संतुलित व्यापार के साथ 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रूस को भारत के निर्यात को बढ़ाने की जरूरत है। रूस से भारत का आयात पहले ही शीर्ष पर है व इसे और बढ़ाने की गुंजाइश नहीं है।’ सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत और रूस के बीच कुल व्यापार वित्त वर्ष 22 में 8.73 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 68.7 अरब डॉलर हो गया। इसका मुख्य कारण भारत का रूस से तेल खरीदना है।

वित्त वर्ष 22 में आयात 5.48 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 63.8 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 3.5 अरब डॉलर से बढ़कर केवल 4.88 अरब डॉलर हुआ है। नतीजतन, व्यापार घाटा वित्त वर्ष 22 में 1.98 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 58.92 अरब डॉलर हो गया।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 23 वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद संयुक्त बयान में कहा गया, ‘दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि शुल्क और गैर-शुल्क व्यापार बाधाओं को दूर करना, लॉजिस्टिक्स में अड़चनों को दूर करना, कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना, सुचारू भुगतान तंत्र सुनिश्चित करना, बीमा व पुनर्बीमा के मुद्दों के लिए आपसी स्वीकार्य समाधान खोजना और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच नियमित बातचीत 2030 तक 100 अरब डॉलर के संशोधित द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य की समय पर उपलब्धि के लिए महत्वपूर्ण तत्त्वों में से हैं।’

First Published - December 8, 2025 | 10:31 PM IST

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