facebookmetapixel
Advertisement
BSBD अकाउंट से कैश निकालना होगा महंगा! SBI बदल रहा है 1 अक्टूबर से नियमत्योहारों से पहले चीनी की कीमतों पर लगाम की तैयारी, अब सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रख सकेंगे बड़े डीलरमजबूत डिमांड से पावर सेक्टर में जोश! लंबी अवधि के लिए ब्रोकरेज को ये शेयर पसंद429 रुपये वाला शेयर छू सकता है 709 रुपये का स्तर! 2 ब्रोकरेज ने दी खरीदने की सलाहSEBI का बड़ा प्लान! विदेशी निवेशकों को वापस लाने की तैयारी, ट्रेडिंग नियमों में बड़े बदलाव संभवHDFC बैंक में 9.99% तक हिस्सेदारी खरीद सकेगी LIC, आरबीआई से मिली मंजूरी; बैंक शेयर 1% उछलाStarlink Gen 2 की भारत में फिर एंट्री! 30 हजार सैटेलाइट के लिए मांगी मंजूरी, सीधे मोबाइल से जुड़ेगा नेटवर्कटेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स आईपीओ: आज से खुला ₹650 करोड़ का इश्यू; GMP ₹220, लिस्टिंग पर 73% मुनाफे का संकेतडॉलर में कमजोरी से चमका सोना-चांदी: ग्लोबल मार्केट में सोने ने भरी उड़ान, चांदी भी 67 डॉलर के पारStock Market Update: शेयर बाजार में जोरदार रिकवरी! सेंसेक्स 500 अंक उछला; IT शेयरों में तेजी से निफ्टी की 7 दिन की गिरावट थमी

RBI से मल्टीपल प्राइस पद्धति पर लौटने की मांग

Advertisement
Last Updated- March 05, 2023 | 10:11 PM IST
RBI Dividend: What is the reason for Reserve Bank of India giving huge dividend to the government? economists explained RBI Dividend: रिजर्व बैंक के सरकार को भारी लाभांश देने की क्या है वजह? अर्थशास्त्रियों ने समझाया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक बैठक में सरकारी बॉन्ड बाजार में भाग लेने वालों ने सुझाव दिया कि केंद्रीय बैंक सॉवरिन ऋण की प्राथमिक नीलामी के लिए मल्टीपल प्राइस पद्धति पर वापस लौटे। सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।

यह बैठक अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिए केंद्र द्वारा बाजार उधारी कैलेंडर जारी करने से पहले RBI के अधिकारियों के साथ आयोजित बातचीत की श्रृंखला का हिस्सा थी। अप्रैल-सितंबर का यह उधारी कैलेंडर आम तौर पर मार्च के अंत में जारी किया जाता है।

RBI सरकार का ऋण प्रबंधक होता है। वर्ष 2023-24 (अप्रैल-मार्च) के आम बजट में सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए 15.43 लाख करोड़ रुपये के सकल उधार कार्यक्रम की घोषणा की है, जो एक नया शीर्ष स्तर है। सरकार आम तौर पर वित्त वर्ष के पहले छह महीने में ऋण के एक बड़ा हिस्से का इंतजाम करती है। इस कवायद को ‘फ्रंट-लोडिंग’ कहा जाता है।

बजट में संशोधित अनुमान के अनुसार सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सकल आधार पर पुरानी प्रतिभूतियों की बिक्री के जरिये 14.21 लाख करोड़ रुपये उधार लिए है।
एक सूत्र ने कहा कि बातचीत के बिंदुओं में बेंचमार्क बॉन्ड के लिए वापस मल्टीपल प्राइस पद्धति नीलामी का ओर जाने का सुझाव दिया गया था। वर्तमान में केवल सबसे लंबी परिपक्वता वाले बॉन्ड की नीलामी ही मल्टीपल प्राइस के जरिये की जाती है।

सूत्र ने कहा कि हालांकि RBI वर्ष 2021 में एक समान पद्धति की ओर स्थानांतरित हो गया था, लेकिन नीलामी में भारी मात्रा में अस्थिरता थी। नीलामियां लगातार प्राथमिक डीलरों को दी जा रही थी। लेकिन वास्तव में अब में ऐसा नहीं है। मल्टीपल प्राइस पद्धति बोली लगाने वालों को कुछ लचीलापन प्रदान करती है।

जुलाई 2021 में RBI ने दो वर्षीय बॉन्ड, तीन वर्षीय बॉन्ड और पांच वर्षीय बॉन्ड के लिए मल्टीपल प्राइस पद्धति से एक समान मूल्य पद्धति की ओर जाने का फैसला किया था। एक समान मूल्य नीलामी में कारोबारी ऐसे मूल्य स्तरों पर बोली लगाने में सावधान बरतते हैं, जो द्वितीयक बाजार में किसी बॉन्ड के प्रचलित मूल्य से काफी अलग हो।

एक समान मूल्य की नीलामी में सभी बोलीदाताओं को RBI द्वारा निर्धारित किसी खास मूल्य पर शेयर प्राप्त होता है, जबकि मल्टीपल प्राइस नीलामी में केंद्रीय बैंक उन सभी इकाइयों को शेयर आवंटित करता है, जो कटऑफ मूल्य से ऊपर बोली लगाते हैं।

Advertisement
First Published - March 5, 2023 | 7:33 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement