केंद्र सरकार ने उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (PLI ) योजना के तहत फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की 74 कंपनियों में 6,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को यह जानकारी दी।
शाह गांधीनगर में राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) के नवनिर्मित परिसर के उद्घाटन के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार ने एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है और 16 एपीआई (सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक) और दो केएसएम (प्रमुख प्रारंभिक सामग्री) के लिए किफायती, टिकाऊ और लागत प्रभावी प्रक्रिया विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगले एक दशक में भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि उन्हें (एपीआई और केएसएम) निर्यात करने की स्थिति में भी होगा। उन्होंने कहा, “नरेन्द्र मोदी सरकार ने पीएलआई योजना के तहत फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्टरिंग सेक्टर में करीब 48 छोटे-बड़े उद्योगों को 4,000 करोड़ रुपये के निवेश की इजाजत दे दी है।”
शाह ने कहा, “चिकित्सकीय उपकरण विनिर्माण (मेडिकल डिलाइस मैन्युफैक्चरिंग) के लिए भी पीएलआई योजना शुरू की गई, जिसके तहत केंद्र ने 26 निवेशकों को 2,000 करोड़ रुपये के निवेश की अनुमति दी है।” उन्होंने कहा कि सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की कुल लागत से तीन थोक दवा पार्क बनाए हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने कहा कि भारत को चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2023 लेकर आई है और अब इसके निर्यात के लिए भी एक अलग नीति बनाई जा रही है। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया भी उपस्थित थे।