जिस AI से मुनाफे की उम्मीद थी, वही अब बाजार की बेचैनी बनता जा रहा है। AI में बढ़ते खर्च को लेकर डर बढ़ते ही गुरुवार को एशियाई शेयर बाजार लड़खड़ा गए। टेक शेयरों पर दबाव साफ दिखा, हालांकि वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स ने संभलने की कोशिश की क्योंकि चिप बनाने वाली कंपनियों में हल्की तेजी आई।
Google की पैरेंट कंपनी Alphabet ने बाजार बंद होने के बाद मजबूत नतीजे पेश किए, लेकिन असली झटका उसके ऐलान ने दिया। कंपनी ने बताया कि वह इस साल AI पर 175 से 185 अरब डॉलर खर्च करेगी। यह रकम बाजार की उम्मीद से कहीं ज्यादा थी। इस खबर के बाद Alphabet का शेयर एक समय 6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया, हालांकि बाद में गिरावट सिमटकर 0.4 प्रतिशत रह गई।
IG के एनालिस्ट टोनी साइकामोर ने कहा कि AI पर खर्च में इतनी बड़ी बढ़ोतरी ऐसे वक्त आई है जब निवेशक पहले से ही सॉफ्टवेयर कंपनियों, कैपेक्स और AI वैल्यूएशन को लेकर बेहद घबराए हुए हैं।
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निवेशक अब टेक दिग्गजों से दूरी बनाकर साइक्लिकल शेयरों की ओर बढ़ रहे हैं। AI की वजह से नौकरियों और बिजनेस मॉडल पर खतरे की आशंका बढ़ गई है।
Anthropic के Claude AI मॉडल के नए लीगल टूल से शुरू हुई बिकवाली ने 28 जनवरी के बाद से करीब 830 अरब डॉलर की बाजार वैल्यू साफ कर दी है।
इस डर के माहौल में Advanced Micro Devices (AMD) के कमजोर नतीजों ने आग में घी डाल दिया। चिप निर्माता कंपनी का शेयर रातों-रात 17 प्रतिशत टूट गया और टेक सेक्टर की हालत और बिगड़ गई।
AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च की उम्मीद से Nvidia के शेयरों में आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में करीब 2 प्रतिशत की तेजी आई। इससे Nasdaq फ्यूचर्स 0.6 प्रतिशत और S&P 500 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत ऊपर दिखे, मानो बाजार ने राहत की सांस ली हो।
अब बाजार की नजर Amazon के नतीजों पर टिकी है। साथ ही बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपियन सेंट्रल बैंक की बैठकों पर भी, जहां ब्याज दरों में फिलहाल किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है।
जापान में रविवार को होने वाले आम चुनाव से पहले जापानी येन लगातार चौथे दिन कमजोर हुआ। सर्वे प्रधानमंत्री साने ताकाइची की बड़ी जीत का संकेत दे रहे हैं, लेकिन उनके खर्च बढ़ाने के इरादों ने जापान की कमजोर वित्तीय हालत को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
डॉलर के मुकाबले येन 156.93 पर टिका रहा।
अमेरिका का 10-साल का बॉन्ड यील्ड 4.27 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहा। सरकारी शटडाउन के चलते टली जनवरी की अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट अब 11 फरवरी को आएगी।
दो दिन की तेजी के बाद तेल की कीमतें फिसल गईं। अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में बातचीत की खबर से नरमी आई। अमेरिकी कच्चा तेल 1.4 प्रतिशत गिरकर 64.23 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 68.47 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं पिछले हफ्ते की भारी गिरावट के बाद सोना और चांदी में हल्की रिकवरी दिखी। सोना 0.3 प्रतिशत बढ़कर 4,976 डॉलर और चांदी 88.20 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)