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वीवो ने 62,000 करोड़ रुपये चीन भेजे : ईडी

Last Updated- December 11, 2022 | 5:45 PM IST

मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी वीवो इंडिया के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की धन शोधन जांच में पता चला है कि भारत में कर चुकाने से बचने के लिए कंपनी ने 2017 से 2021 के बीच अपनी कमाई में से 62,476 करोड़ रुपये चीन भेज दिए हैं।
निदेशालय के मुताबिक कथित रूप से फर्जीवाड़े से बनाई गई 18 कंपनियों ने इस स्मार्टफोन कंपनी को अपनी कमाई का 50 फीसदी हिस्सा भारत से बाहर भेजने में मदद की। यह रकम मुख्य रूप से चीन भेजी गई। उपरोक्त अवधि में बिक्री से कुल कमाई 1.25 लाख करोड़ रुपये रही।
ईडी ने आज कहा, ‘भारत में बनी कंपनियों में भारी नुकसान दिखाने के लिए यह पैसा बाहर भेजा गया ताकि यहां कर चुकाने से बचा जा सके।’ निदेशालय ने कहा कि अभी तक विभिन्न कंपनियों के 119 बैंक खाते धन शोधन निरोध अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत कुर्क किए गए हैं। खातों में कुल 465 करोड़ रुपये हैं, जिसमें वीवो इंडिया की 66 करोड़ रुपये की एफडी, 2 किलोग्राम सोने की सिल्ली और करीब 73 लाख रुपये की नकदी शामिल है।
एक अधिकारी के मुताबिक वीवो इंडिया के खातों में इसकी ज्यादातर सहायक कंपनियों में घाटा दिखाया गया है, जबकि इनके जरिये चीन को मोटी राशि भेजी गई है। निदेशालय ने इस सप्ताह की शुरुआत में वीवो इंडिया और उसकी 23 सहायक कंपनियों के 48 ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की थी, जिसके बाद ये खुलासे हुए हैं। वीवो इंडिया की स्थापना अगस्त 2014 में हॉन्ग कॉन्ग की एक कंपनी मल्टी अकॉर्ड लिमिटेड की सहयोगी के रूप में हुई थी। इसका पंजीकरण दिल्ली में कराया गया था।
कंपनी मामलों के मंत्रालय ने वीवो की सहायक कंपनियों में से एक- ग्रैंड प्रॉस्पेक्ट्स इंटरनैशनल कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड (जीपीआईसीपीएल), उसके निदेशकों, शेयरधारकों और प्रमाणित करने वाले पेशेवरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पीएमएलए के तहत जांच की गई है। आरोप था कि जीपीआईसीपीएल और उसके शेयरधारकों ने कंपनी की स्थापना के समय पहचान के जाली दस्तावेज और गलत पते का इस्तेमाल किया।
ईडी ने कहा, ‘ये आरोप सही पाए गए। जांच में खुलासा हुआ कि जीपीआईसीपीएल के निदेशकों द्वारा दिए गए पते उनके नहीं हैं क्योंकि उन्होंने सरकारी इमारतों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के घर के पतों को अपने पते के सबूत के रूप में इस्तेमाल किया था।’
इस कंपनी की स्थापना झेंगशेन ओऊ, पिन लोऊ और झांग ची ने चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन गर्ग की मदद से की थी। कंपनी के निदेशक देश से भाग गए। एक निदेशक पिन लोऊ ने अप्रैल 2018 में भारत छोड़ दिया था। झेंगशेन ओऊ और झांग ची 2021 में भारत से चले गए थे। जांच में यह भी पाया गया है कि पिन लोऊ पहले वीवो का भी निदेशक रह चुका था। उसने देश के विभिन्न राज्यों में कई कंपनियों की स्थापना की।
ईडी ने कहा है, ‘वीवो की 2014-15 में स्थापना के ठीक बाद कुल 18 कंपनियों की स्थापना की गई। इसके बाद एक अन्य चीनी नागरिक झिशिन वेई ने चार और कंपनियां बनाईं।’

First Published - July 7, 2022 | 11:59 PM IST

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