facebookmetapixel
42% चढ़ सकता है महारत्न कंपनी का शेयर, ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट; Q3 में ₹4011 करोड़ का हुआ मुनाफाईरान की ओर बढ़ रहा है ‘विशाल सैन्य बेड़ा’, ट्रंप ने तेहरान को फिर दी चेतावनीदुनिया में उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के क्या हाल हैं? रिपोर्ट में बड़ा संकेत30% टूट चुका Realty Stock बदलेगा करवट, 8 ब्रोकरेज का दावा – ₹1,000 के जाएगा पार; कर्ज फ्री हुई कंपनीसिर्फ शेयरों में पैसा लगाया? HDFC MF की रिपोर्ट दे रही है चेतावनीIndia manufacturing PMI: जनवरी में आर्थिक गतिविधियों में सुधार, निर्माण और सर्विस दोनों सेक्टर मजबूतसोना, शेयर, बिटकॉइन: 2025 में कौन बना हीरो, कौन हुआ फेल, जानें हर बातट्रंप ने JP Morgan पर किया 5 अरब डॉलर का मुकदमा, राजनीतिक वजह से खाते बंद करने का आरोपShadowfax Technologies IPO का अलॉटमेंट आज होगा फाइनल, फटाफट चेक करें स्टेटसGold and Silver Price Today: सोना-चांदी में टूटे सारे रिकॉर्ड, सोने के भाव ₹1.59 लाख के पार

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मेटल इंडस्ट्री को लगेगी लाखों करोड़ की चपत! मगर उद्योगपतियों ने क्यों कहा सीमित होगा असर

जहां टाटा स्टील ने देनदारी का जिक्र किया है, वहीं वेदांत, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और हिंदुस्तान जिंक जैसी अन्य कंपनियों को ज्यादा प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है।

Last Updated- August 14, 2024 | 10:29 PM IST
Western Australia to improve ties with India, focus on green tech: Minister

Supreme Court order’s impact on the mining industry:  बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का खनन उद्योग पर 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन बड़े उद्योगपतियों ने इसका सीमित प्रभाव पड़ने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि ये कंपनियां कानूनी प्रक्रिया पर आगे बढ़ने से पहले अधिक विवरण सामने आने और राज्यों द्वारा कार्रवाई किए जाने का इंतजार करेंगी।

फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज के एक अ​धिकारी ने कहा कि बकाया राशि को पिछली तारीख से वसूलने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के नए आदेश से भारतीय खनन उद्योग को और झटका लगेगा, क्योंकि बकाया राशि 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है तथा ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों की खदानें इससे सबसे अधिक प्रभावित होंगी। उद्योग के अधिकारी और विश्लेषक दोनों इस बात पर सहमत हैं कि इस संदर्भ में ओडिशा पर नजर रखी जाएगी।

उदाहरण के लिए, इस्पात उत्पादक टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय विवरण में 17,347 करोड़ रुपये की आक​स्मिक देनदारी का खुलासा किया है। प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों का मानना है कि सेल और एनएमडीसी जैसी अन्य इस्पात कंपनियों पर लौह अयस्क खनन के संबंध में 4,600 करोड़ रुपये और 6,200 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ सकता है।

जहां टाटा स्टील ने देनदारी का जिक्र किया है, वहीं वेदांत, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और हिंदुस्तान जिंक जैसी अन्य कंपनियों को ज्यादा प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है।

हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ अ​धिकारियों ने मंगलवार को वित्तीय परिणाम की घोषणा के बाद कहा कि कंपनी के सामने किसी तरह का पूर्वप्रभावी जो​खिम नहीं है।

​हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्या​धिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक अरुण मिश्रा ने बुधवार को कहा, ‘कंपनी पर इस निर्णय के पूर्वप्रभावी प्रभाव की वजह से ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।’ उसकी पैतृक कंपनी भारत में सूचीबद्ध वेदांत ने भी कहा है कि उसके बकाया दावे नहीं हैं। कंपनी के एक अ​धिकारी ने कहा, ‘हम पुष्टि कर सकते हैं कि इस समय हमारे किसी भी व्यवसाय पर कोई सवाल नहीं उठाया गया है।’

टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्या​धिकारी टी वी नरेंद्रन ने वित्तीय परिणाम के बाद बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘एक बार जब हमें (जुलाई के आदेश का) पूरा फैसला मिल जाएगा तो हमें सभी पहलुओं पर गौर करना होगा और फिर उस पर चर्चा करनी होगी।’

प्रभुदास लीलाधर कैपिटल में सलाहकार प्रमुख विक्रम कसाट ने कहा, ‘इस निर्णय का सीमेंट कंपनियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।’

First Published - August 14, 2024 | 10:04 PM IST

संबंधित पोस्ट