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रत्न एवं आभूषण निर्यात की चमक फीकी पड़ी

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अमेरिका द्वारा अप्रैल में लगाए गए 10 प्रतिशत जवाबी शुल्क के बाद अप्रैल-जून तिमाही में अमेरिका को निर्यात धीमा हो गया।

Last Updated- August 08, 2025 | 11:17 PM IST
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भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात पर 50 प्रतिशत शुल्क की अमेरिकी घोषणा के बाद इस क्षेत्र की रफ्तार थम गई है। निर्यात थमने से रोजगार का एक प्रमुख स्रोत समझे जाने वाले इस क्षेत्र को तगड़ा झटका लगा है। 7 अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क लागू होने के बाद इस क्षेत्र पर कुल शुल्क बढ़कर 31.5 प्रतिशत (जिसमें 5.5 से 7 प्रतिशत का सर्वाधिक तरजीही देश शुल्क भी शामिल है) हो गया। आभूषण पर सर्वाधिक तरजीही देश शुल्क अप्रैल से पहले से ही  लागू था।

अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त से लागू होगा, जिसके बाद कुल शुल्क बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो जाएगा। अमेरिका द्वारा अप्रैल में लगाए गए 10 प्रतिशत जवाबी शुल्क के बाद अप्रैल-जून तिमाही में अमेरिका को निर्यात धीमा हो गया। वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका को 9.2 अरब डॉलर के रत्न एवं आभूषण का निर्यात हुआ था जबकि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा केवल 1.5 अरब डॉलर रहा था। इसका नतीजा यह हुआ है कि अमेरिका को रत्न एवं आभूषण के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 32.2 प्रतिशत से घट कर 22.9 प्रतिशत हो गई है। मगर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की हिस्सेदारी पहली तिमाही में 27.4 प्रतिशत से बढ़कर 34.4 प्रतिशत हो गई है।

इस उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में यूएई से निर्यात बढ़ गया था। इसके अलावा, निर्यातकों ने अप्रैल में 10 प्रतिशत शुल्क लागू होने से एक सप्ताह पहले अमेरिका को 50 करोड़ डॉलर मूल्य के रत्न एवं आभूषण भेजे थे जबकि कुछ निर्यात पिछले सप्ताह 10 प्रतिशत के साथ किए गए थे। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद (जीजेईपीसी) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत का रत्न एवं आभूषण का सकल निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 5.4 प्रतिशत गिरकर 6.48 अरब डॉलर हो गया जबकि सकल आयात 2.3 प्रतिशत घटकर 5.34 अरब डॉलर रह गया।

जीजेईपीसी के के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा, ‘अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा बाजार (10 अरब डॉलर से अधिक) है। हमारे उद्योग के कुल वैश्विक व्यापार में अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। भारत से सभी प्रकार के निर्यात पर इतना भारी भरकम शुल्क रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए विनाशकारी है।’ सीप्ज विशेष आर्थिक क्षेत्र से होने वाला निर्यात सीधे प्रभावित हुआ है क्योंकि इसका 85 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका जाता है। इससे करीब 50,000 रोजगार पर असर पड़ेगा। भारत से तराशे और पॉलिश किए गए आधे हीरे अमेरिका जाते हैं।

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First Published - August 8, 2025 | 10:55 PM IST

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