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US-बांग्लादेश ट्रेड डील से भारतीय टेक्सटाइल को झटका, निर्यातकों के लिए ‘दोधारी तलवार’ बना समझौता

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उद्योग के मुताबिक बांग्लादेश से कुछ टेक्सटाइल और परिधान वस्तुओं पर शून्य कर से अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हो सकती है

Last Updated- February 10, 2026 | 10:20 PM IST
textile industry
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय टेक्सटाइल और परिधान उद्योग अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौते को भारतीय निर्यातकों के लिए दोधारी तलवार के रूप में देख रहा है। उद्योग के मुताबिक बांग्लादेश से कुछ टेक्सटाइल और परिधान वस्तुओं पर शून्य कर से अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी तरह से अमेरिकी कपास आयात के कारण भारत से बांग्लादेश को होने वाले कपास निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।  

हालांकि भारत सरकार के एक सूत्र ने कहा कि बांग्लादेश ने उन क्षेत्रों को खोलकर महत्त्वपूर्ण रियायतें दी हैं, जिन्हें पहले संरक्षित रखा गया था। बदले में बांग्लादेश के कपड़ा क्षेत्र में मामूली लाभ हुआ है।

बांग्लादेश विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गारमेंट विनिर्माता है और अमेरिका के टेक्सटाइल और परिधान बाजार में वह वियतनाम और चीन के साथ भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी है। समझौते के तहत राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने बांग्लादेश के उत्पादों के लिए अमेरिकी शुल्क को 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया है, जिसका मतलब यह है कि भारत और बांग्लादेश के बीच शुल्क का अंतर 2 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत रह गया है।

अमेरिका ने ऐसी व्यवस्था बनाने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें बांग्लादेश  के कुछ टेक्सटाइल व परिधानों पर शून्य पारस्परिक शुल्क की दरें होंगी। संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘यह व्यवस्था बांग्लादेश से टेक्सटाइल और परिधान आयात की कुछ निश्चित मात्रा तक लागू रहेगी, लेकिन मात्रा का फैसला टेक्सटाइल के निर्यात की मात्रा के आधार पर होगा। उदाहरण के लिए अमेरिका में उत्पादित कपास और मानिव निर्मित फाइबर टेक्सटाइल इनपुट के निर्यात के आधार पर इसकी मात्रा का निर्धारण होगा।’

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सिटी) के चेयरमैन अश्विन चंद्रन ने कहा,‘सिटी अमेरिका के साथ हुए समझौते पर स्पष्टता का इंतजार कर रहा है। लेकिन इससे भारत के टेक्सटाइल व परिधान निर्यातकों के सामने एक नई चुनौती आई है, जिनके लिए अमेरिका बड़ा बाजार है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह चुनौती दोहरी है। पहला, भारत और बांग्लादेश के बीच शुल्क का अंतर 2 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत हो गया है, जो कम मुनाफे वाले क्षेत्र में चिंता का विषय है। दूसरा, अमेरिका-बांग्लादेश पारस्परिक व्यापार समझौता भारत के कपास के बांग्लादेश को होने वाले निर्यात को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।’

बांग्लादेश पहले से ही चीन, वियतनाम और भारत के साथ अमेरिका को टेक्सटाइल और परिधान के प्रमुख निर्यातकों में से एक है। बांग्लादेश के लिए कोई भी अतिरिक्त लाभ भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा सकता है।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि समझौते को एक प्रावधान या सेक्टर के आधार पर देखने के बजाय समग्रता से देखने की जरूरत है। भारत जहां अपने क्षेत्रों को संरक्षित रखने में सफल रहा है, वहीं बांग्लादेश ने व्यापक बाजार पहुंच प्रदान कर दी है।

दिल्ली स्थित टीटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और आईसीसी नैशनल टेक्सटाइल्स कमेटी के चेयरमैन संजय कुमार जैन ने कहा, ‘अगर अमेरिकी कपास से बने परिधान पर बांग्लादेश के लिए पारस्परिक शुल्क शून्य हो जाता है, जबकि भारत पर यह 18 प्रतिशत है।’

इंडियन टैक्सप्रेन्योर्स फेडरेशन के संयोजक प्रभु दामोदरन ने कहा, ‘संकेतों से पता चलता है कि अमेरिका कपास निर्यात को बनाए रखने के लिए लचीलापन दे रहा है। इससे भारत के लिए एक अवसर खुलता है। भारत को अमेरिकी कपास का उपयोग करके बनाए गए परिधानों पर शून्य-शुल्क रियायतों के लिए जोर देना चाहिए, जिससे इस अंतर को भारतीय परिधान निर्यात के लिए एक प्रतिस्पर्धी बढ़त में बदला जा सके।’

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First Published - February 10, 2026 | 10:20 PM IST

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