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Interview: कीमतों में मिलीभगत के आरोपों पर टाटा स्टील की सफाई- ‘बाजार की स्थितियों से तय होते हैं दाम’

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टाटा स्टील के शीर्ष नेतृत्व द्वारा तीसरी तिमाही के प्रदर्शन, इस्पात कीमतों और नियामक जांच से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई है

Last Updated- February 09, 2026 | 10:27 PM IST
T V Narendran and Koushik Chatterjee
टाटा स्टील के सीएफओ कौशिक चटर्जी और प्रबंध निदेशक व सीईओ टीवी नरेंद्रन

टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक और सीईओ टीवी नरेंद्रन एवं कार्यकारी निदेशक और सीएफओ कौशिक चटर्जी ने ईशिता आयान दत्त के साथ एक वीडियो इंटरव्यू में कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद आगामी आय परिदृश्य और इस्पात की कीमतों के रुझान से लेकर कीमत में मिलीभगत के बारे में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच रिपोर्ट जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की। संपादित अंश …

तीसरी तिमाही में टाटा स्टील का शुद्ध लाभ एक साल पहले की तुलना में 723 फीसदी बढ़ा, लेकिन तिमाही आधार पर इसमें गिरावट आई। चौथी तिमाही के लिए परिदृश्य कैसा है?

नरेंद्रन: अक्टूबर-नवंबर में घरेलू इस्पात कीमतें पिछले पांच साल में सबसे नीचे पहुंच गई थीं। उसके बाद दिसंबर में कीमतों में बदलाव शुरू हुआ। इसका प्रभाव प्राप्तियों पर पड़ा था। सालाना प्रदर्शन को बेहतर बिक्री, लागत नियंत्रण और नीदरलैंड्स में लगातार हो रहे सुधार की वजह से मदद मिली। ब्रिटेन ने नौ महीने की तुलना में सुधार दर्ज किया, लेकिन तिमाही आधार पर ऐसा नहीं देखा गया, इसलिए वहां अभी काम करने की जरूरत है।

भारत में, कलिंगनगर में उत्पादन बढ़ने से बिक्री बढ़ रही है और कोल्ड रोलिंग मिल और गैल्वनाइजिंग लाइनों के चालू होने से उत्पाद मिश्रण बेहतर  हो रहा है। जमशेदपुर में कॉम्बी मिल शुरू हो गई है।

इस्पात के दाम कई वर्ष के निचले स्तर से उठे हैं, क्या यह तेजी बनी रहेगी?

नरेंद्रन: नवंबर तक, घरेलू इस्पात की कीमतें आयातित इस्पात से कम थीं, जो काफी असामान्य था। यह इस बात का संकेत है कि जब मांग बढ़ रही थी, तो बाजार में आपूर्ति भी ज्यादा हो गई। सभी क्षेत्रों में हम, ग्रामीण और शहरी, दोनों में बिक्री में तेजी देख रहे हैं।

आरोप हैं कि टाटा स्टील समेत इस्पात कंपनियों ने कीमतों को लेकर मिलीभगत की। आप इस पर क्या कहना चाहेंगे?

नरेंद्रन: डायरेक्टर जनरल (डीजी) ने कुछ जांच की है और कुछ नतीजों पर पहुंचे हैं। हमें कुछ एडिट किए हुए दस्तावेज मिले थे, अब हमारे पास पूरे दस्तावेज हैं। हम उनका अध्ययन करेंगे और सीसीआई के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

जैसा कि हमने कहा, हम कुछ भी गैर-कानूनी नहीं करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मुद्दा इस्पात कीमतों के एक साथ बढ़ने का है, लेकिन कमोडिटी मार्केट इसी तरह काम करते हैं। कोई भी अकेली कंपनी इस्पात की कीमतों को कंट्रोल नहीं करती है।

आप ब्रिटेन में कोटा के बदलाव के बारे में चर्चा कर रहे हैं। अभी क्या स्थिति है?

नरेंद्रन: हमें बताया गया है कि यह जल्द ही होगा। ब्रिटेन सरकार को भी परेशानी हो रही है क्योंकि वे वहां कुछ परिसंपत्तियों का परिचालन कर रहे हैं।

चटर्जी: कई चीजें हैं, जिन पर काम किया जाना है। नए पड़ोसी होने के नाते ब्रिटेन-ईयू व्यापार को आपसी बराबरी के स्तर पर आना होगा। ब्रिटेन से यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात पर कोई टैरिफ नहीं लगना चाहिए, जैसा कि पहले होता था। दूसरा है गैर-यूरोपीय संघ देशों से जुड़े कोटे को उसी तरह से बदलना जैसा ईयू ने किया है।

तीसरा हिस्सा ब्रिटेन और ईयू के बीच पारस्परिक आदान-प्रदान है, सिर्फ टैरिफ पॉइंट पर ही नहीं बल्कि मेल्ट-ऐंड-पोर शर्तों पर भी। चौथा, स्क्रैप ब्रिटेन के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है, इसे मुफ्त निर्यात किए जाने के बजाय ब्रिटेन में ही बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

क्या अमेरिकी टैरिफ का असर टाटा स्टील नीदरलैंड्स पर जारी रहेगा?

नरेंद्रन: हां, क्योंकि नीदरलैंड्स से हमारी लगभग 10 फीसदी डिलिवरी अमेरिका को होती थी। बिक्री कम होगी, शायद पिछले वर्षों की तुलना में यह आधा रह सकती है। इनमें से कुछ इस्पात को उसी ग्रेड में यूरोपीय बाजार में नहीं बेचा जा सकता। इसलिए बिक्री और उत्पाद मिश्रण पर असर पड़ेगा।

चटर्जी: कंपनी लैटिन अमेरिका और पश्चिम एशिया जैसे नए बाजारों पर ध्यान दे रही है, जहां पैकेजिंग से जुड़ी खपत ज्यादा है। कीमतें अमेरिका जितनी ज्यादा नहीं हैं, लेकिन दूसरों की तुलना में अधिक हैं। मिश्रण पर असर पड़ेगा, जैसा कि पिछली तिमाही में हुआ था।

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First Published - February 9, 2026 | 10:27 PM IST

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