स्टील मंत्रालय ने सोमवार को स्पेशलिटी स्टील के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तीसरे दौर के तहत 55 कंपनियों के साथ 85 परियोजनाओं के लिए समझौता (एमओयू) किया है। इस समझौते में कंपनियों ने 11,887 करोड़ रुपये के निवेश और 87 लाख टन की क्षमता वृद्धि करने की प्रतिबद्धता जताई है।
विज्ञान भवन में स्टील और भारी उद्योग मंत्री एच डी कुमारस्वामी और राज्य मंत्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके साथ पिछले साल नवंबर में पेश पीएलआई स्कीम 1.2 की औपचारिक शुरुआत हो गई।
पीएलआई 1.2 स्पेशलिटी स्टील ग्रेड के लिए है। भारत इसके आयात पर निर्भर है। खासकर रणनीतिक, इलेक्ट्रिकल और हाई एंड डाउनस्ट्रीम ऐप्लीकेशंस में इस्तेमाल के लिए इसका आयात होता है। इस दौर में 4 सेग्मेंट में 22 उत्पादों की उप श्रेणियां हैं। इसमें रणनीतिक क्षेत्रों के लिए स्टील ग्रेड और कोटेड और वायर उत्पाद शामिल हैं। वित्त वर्ष 2026 से शुरू 5 वर्षों के लिए प्रोत्साहन की दरें 4 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत के बीच हैं।
कुमारस्वामी ने कहा कि पीएलआई 1.2 एक लचीला और वैश्विक प्रतिस्पर्धी स्पेशलिटी स्टील इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि इस योजना से घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और भारत विश्वसनीय वैश्विक स्टील आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित हो सकेगा।
उन्होंने कहा, ‘पीएलआई 1.0 और 1.1 में 43,874 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता से जमीनी स्तर पर प्रगति हुई है। इससे महत्त्वपूर्ण क्षमता निर्माण और रोजगार सृजन हुआ है। पीएलआई 1.2 इस गति को आगे बढ़ाने वाला है, जिससे घरेलू स्टील उत्पादन का वातावरण बेहतर होगा और मूल्य श्रृंखला मजबूत होगी।’
स्टील सचिव संदीप पौंड्रिक ने कहा कि पहले के दौर से मिले अनुभव के आधार पर योजना में बदलाव किया गया है, जिसमें कम निवेश सीमा, अनिवार्य वार्षिक उत्पादन लक्ष्यों को हटाना और वास्तविक वृद्धिशील उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन भुगतान शामिल हैं।